10/10/2026
ੴ श्री मुक्तसर साहिब: 'आत्मा के समर्पण' और मुक्ति का इतिहास
"मुक्ति" केवल शरीर की नहीं, बल्कि साधक के 'अहंकार, मोह और मैं-मेरी' के पूर्ण समर्पण का नाम है।
ऐतिहासिक गुरुद्वारा टूटी गंडी साहिब, श्री मुक्तसर साहिब के मुख्य पाठी जी के साथ हुई इस विशेष चर्चा में जानिए इस पावन धाम के दिव्य इतिहास और "मुक्ति" के गूढ़ दर्शन को।
विशेषांकन (नोट): रील के अंत में पाठी जी द्वारा 'आरे नाल चलाना' का संदर्भ केवल और केवल इंसान के अहंकार त्याग, कठोर साधना और ईश्वर के प्रति संपूर्ण आत्म-समर्पण (Absolute Surrender of Ego) का एक पारंपरिक रूपक (Metaphor) है। यह 40 मुकतों की अमर शहादत और गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज की असीम कृपा से मिलने वाली आत्म-मुक्ति की राह को दर्शाता है।
'Dr. Raajan Maluuja' की ओर से श्री मुक्तसर साहिब की पवित्र धारा से आप सभी के लिए सुख, शांति और गुरु-कृपा की मंगलकामनाएँ। 🙏
📍 स्थान: गुरुद्वारा श्री टूटी गंडी साहिब, श्री मुक्तसर साहिब (पंजाब)