06/08/2026
“डांगावास (नागौर) हत्याकांड: राजनीति का चयनात्मक (Selective) रवैया!!”
वर्ष 2011 में जनवरी माह की 7 तारीख को भारतीय सिनेमाघरों में एक सच्ची घटना पर आधारित मूवी रिलीज होती है जिसका नाम था ‘No One Killed Jessica’ !!
इस मूवी को मैंने विधाधर नगर, जयपुर के उस समय के एक प्रसिद्ध सिनेमा हॉल में देखा था। फ़िल्म को देखने की एक बड़ी वजह ये भी थी की अख़बारों और समाचार चैनल्स के माध्यम से टॉप ट्रेंडिंग हो चुके जेसिका लाल हत्याकांड की कहानी में बिना किसी ख़ास वजह के दिलचस्पी हो गई थी। हरियाणा के उस समय के कद्दावर नेता के बेटे मनु शर्मा पर जेसिका लाल की हत्या का आरोप लगा। पुलिस जाँच और कोर्ट कचहरी की लंबी प्रक्रिया के बाद मनु शर्मा को बरी कर दिया गया। उसी परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए ‘No One Killed Jessica’ मूवी का निर्माण हुआ।
सिनेमा समाज का आईना है सच और झूठ का बेमिसाल कॉकटेल है। हम चाहकर भी इससे दूर नहीं रह सकते। “No One Killed Jessica” केवल एक फिल्म नहीं थी, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल थी जहाँ हत्या सबने देखी, लेकिन दोषी कोई नहीं था। जेसिका लाल हत्याकांड में अंततः न्याय की दिशा बदली, इसलिए वह कहानी उम्मीद के साथ समाप्त हुई।
लेकिन डांगावास हत्याकांड की कहानी कहीं अधिक पीड़ादायक है। डांगावास हत्याकांड केवल छह लोगों की हत्या का मामला नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था, जांच प्रक्रिया और समाज की संवेदनशीलता की भी कठिन परीक्षा है। न्यायालय का निर्णय कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होता है, इसलिए उसका सम्मान सर्वोपरि है। लेकिन जब इतनी बड़ी घटना में किसी को भी दोषी नहीं ठहराया जाता, तो यह स्वाभाविक है कि जांच की गुणवत्ता और पीड़ितों को न्याय मिलने की प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न उठें।
इस घटना ने एक और कड़वी सच्चाई उजागर की है दलित उत्पीड़न के मामलों में समाज और राजनीति का चयनात्मक (Selective) रवैया। यदि किसी घटना पर आवाज़ केवल जाति, विचारधारा या राजनीतिक सुविधा देखकर उठे और दूसरी घटनाओं पर मौन साध लिया जाए, तो यह पीड़ितों के साथ न्याय नहीं, बल्कि संवेदनाओं का विभाजन है।
डांगावास के पीड़ित केवल एक समुदाय के नहीं, बल्कि पूरे समाज के न्याय के अधिकार का प्रतीक हैं। आवश्यकता इस बात की है कि हर पीड़ित के लिए समान संवेदना, निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग हो बिना किसी जातीय, राजनीतिक या वैचारिक चयन के। न्याय तभी सार्थक होगा जब उसकी कसौटी सभी के लिए समान होगी।
– तनुज सिंह ढाणी बाढ़ान