World - Tulasi batika

World - Tulasi batika तुलसी बाटिका बिहार

31/10/2025
सुंदरकांड के 25वें दोहे में गूढ़ रहस्य से छिपा है जिसकी जानकारी से आधुनिक मौसम विज्ञान भी अनभिज्ञ है ।तुलसीदास जी ने लिख...
30/09/2025

सुंदरकांड के 25वें दोहे में गूढ़ रहस्य से छिपा है जिसकी जानकारी से आधुनिक मौसम विज्ञान भी अनभिज्ञ है ।

तुलसीदास जी ने लिखा जब हनुमान जी ने लंका मे आग लगाई थी

हरि प्रेरित तेहि अवसर चले मरुत उनचास।

अट्टहास करि गर्जा कपि बढ़ि लाग अकास॥
---

अर्थात :- जब हनुमान जी ने लंका को अग्नि के हवाले कर दिया तो वे उनचासों पवन चलने लगे।हनुमान जी अट्टहास करके गर्जे और आकार बढ़ाकर आकाश मार्ग से जाने लगे।

इन उनचास मरुत का क्या अर्थ है ?

तुलसीदासजी के वायु ज्ञान पर सुखद आश्चर्य होता है, जिससे शायद आधुनिक मौसम विज्ञान भी अनभिज्ञ है ।

---

यह जानकर आश्चर्य होगा कि वेदों में वायु की 7 शाखाओं के बारे में विस्तार से वर्णन मिलता है। अधिकतर लोग यही समझते हैं कि वायु तो एक ही प्रकार की होती है, किंतु उसका रूप बदलता रहता है, जैसे कि ठंडी वायु, गर्म वायु और समवायु, लेकिन ऐसा नहीं है।

---

जल के भीतर जो वायु है उसका शास्त्रों में अलग नाम दिया गया है और आकाश में स्थित जो वायु है उसका नाम अलग है। अंतरिक्ष में जो वायु है उसका नाम अलग और पाताल में स्थित वायु का नाम अलग है। नाम अलग होने का मतलब यह कि उसका गुण और व्यवहार भी अलग ही होता है। इस तरह वेदों में 7 प्रकार की वायु का वर्णन मिलता है।

---

ये 7 प्रकार हैं- 1. प्रवह, 2. आवह, 3. उद्वह, 4. संवह, 5. विवह, 6. परिवह और 7. परावह।

1. प्रवह :- पृथ्वी को लांघकर मेघमंडलपर्यंत जो वायु स्थित है, उसका नाम प्रवह है। इस प्रवह के भी प्रकार हैं। यह वायु अत्यंत शक्तिमान है और वही बादलों को इधर-उधर उड़ाकर ले जाती है। धूप तथा गर्मी से उत्पन्न होने वाले मेघों को यह प्रवह वायु ही समुद्र जल से परिपूर्ण करती है जिससे ये मेघ काली घटा के रूप में परिणित हो जाते हैं और अतिशय वर्षा करने वाले होते हैं।

---

2. आवह :- आवह सूर्यमंडल में बंधी हुई है। उसी के द्वारा ध्रुव से आबद्ध होकर सूर्यमंडल घुमाया जाता है।

3. उद्वह :- वायु की तीसरी शाखा का नाम उद्वह है, जो चन्द्रलोक में प्रतिष्ठित है। इसी के द्वारा ध्रुव से संबद्ध होकर यह चन्द्र मंडल घुमाया जाता है।

4. संवह :- वायु की चौथी शाखा का नाम संवह है, जो नक्षत्र मंडल में स्थित है। उसी से ध्रुव से आबद्ध होकर संपूर्ण नक्षत्र मंडल घूमता रहता है।

---

5. विवह :- पांचवीं शाखा का नाम विवह है और यह ग्रह मंडल में स्थित है। उसके ही द्वारा यह ग्रह चक्र ध्रुव से संबद्ध होकर घूमता रहता है।

6.परिवह :- वायु की छठी शाखा का नाम परिवह है, जो सप्तर्षिमंडल में स्थित है। इसी के द्वारा ध्रुव से संबद्ध हो सप्तश्रर्षि आकाश में भ्रमण करते हैं।

7. परावह :- वायु के सातवें स्कंध का नाम परावह है, जो ध्रुव में आबद्ध है। इसी के द्वारा ध्रुव चक्र तथा अन्यान्य मंडल एक स्थान पर स्थापित रहते हैं।

---

इन सातों वायु के सात-सात गण (संचालित करने वाले) हैं जो निम्न जगह में विचरण करते हैं-

ब्रह्मलोक, इंद्रलोक, अंतरिक्ष, भूलोक की पूर्व दिशा, भूलोक की पश्चिम दिशा, भूलोक की उत्तर दिशा और भूलोक कि दक्षिण दिशा। इस तरह 7x7=49, कुल 49 मरुत हो जाते हैं जो देव रूप में विचरण करते रहते हैं।

---

06/04/2025

भगवान श्री राम के शुभ गुणों के बारे में कई रचनाएँ, महाकाव्य आदि लिखे गए हैं। श्री राम के शुभ चरित्र का वर्णन वाल्मीकि रामायण, योगवाशिष्ठ और विभिन्न पुराणों जैसे संस्कृत महाकाव्यों में मिलता है। तुलसीदास द्वारा लिखित हिन्दी रामचरितमानस और भानु भक्त द्वारा लिखित नेपाली रामायण भी रामकथा की अनूठी प्रस्तुतियाँ हैं। भगवान की भक्ति के लिए रामायण कथा सुनाने की परंपरा है। इसके अलावा, विभिन्न लोक संस्कृतियां भी इस रामनवमी के दिन बालुन, राम कथा, रामलीला आदि प्रस्तुत करती हैं।

राम राज्य सुशासन, व्यवस्था, धर्म, शांति, न्याय और नैतिकता है। आज भी पूर्वी सभ्यताओं में अच्छे शासन वाले देशों को राम राज्य कहा जाता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के व्यक्तिगत गुण जैसे पिता और माता के प्रति भक्ति, माता-पिता के प्रति आज्ञाकारिता, भ्रातृ प्रेम, एकनिष्ठ प्रेम, कृतज्ञता, राज्य के प्रति समर्पण और लोगों की भावनाओं के अनुरूप शासन करना, आदर्श चरित्र के रूप में स्थापित हुए हैं।

26/01/2025

तुलसी बाटिका

Ramjanmabhumi
15/01/2024

Ramjanmabhumi

Address

Tilothu

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when World - Tulasi batika posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category