24/08/2026
# साहित्य, संगीत और कला से दूर लोगों की संगति—कहीं आप भी अपनी संवेदनशीलता तो नहीं खो रहे?
मनुष्य केवल रोटी, पैसा, मकान और सुविधाओं से महान नहीं बनता। उसके भीतर **संवेदना, कल्पना, करुणा, सौंदर्यबोध और संस्कार** भी होने चाहिए। साहित्य हमें सोचने की शक्ति देता है, संगीत मन को मधुर बनाता है और कला हमारे भीतर छिपी भावनाओं को अभिव्यक्ति देती है।
इसलिए यदि हमारी मित्रता और संगति केवल उन लोगों तक सीमित हो जाए जिन्हें **न किताबों से लगाव है, न संगीत से, न चित्रकला से, न किसी रचनात्मक कार्य से**, तो जीवन धीरे-धीरे केवल स्वार्थ, दिखावे और निरर्थक चर्चाओं में उलझ सकता है।
यह कहना उचित नहीं कि हर व्यक्ति को कलाकार ही होना चाहिए, लेकिन **हर संवेदनशील व्यक्ति के जीवन में कला के लिए कुछ स्थान अवश्य होना चाहिए।** क्योंकि कला से जुड़ा व्यक्ति जीवन को केवल देखता नहीं, बल्कि उसे महसूस करना भी सीखता है।
🎨 **चित्रकला कल्पना जगाती है।**
🎵 **संगीत मन को शांत और संवेदनशील बनाता है।**
📚 **साहित्य विचारों को गहराई देता है।**
🖌️ **कला व्यक्तित्व में आत्मविश्वास और रचनात्मकता भरती है।**
🙏 *योग तन मन को शांत करता है, शरीर को स्वास्थ्य प्रदान करता है।*
आज आवश्यकता है कि हम बच्चों और युवाओं को केवल परीक्षा और नौकरी के लिए ही नहीं, बल्कि **एक बेहतर, संवेदनशील और रचनात्मक इंसान बनने के लिए भी तैयार करें।**
अपने मित्रों से कहिए—
**आइए, कुछ समय कला के लिए निकालें।**
एक चित्र बनाइए, कोई गीत सीखिए, कविता पढ़िए, रंगों से खेलिए और अपने भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानिए।
कौन जाने, जिस कला को आज आप केवल शौक समझ रहे हैं, वही कल आपकी **पहचान, आत्मविश्वास और सफलता का माध्यम** बन जाए!
# # 🌟 आइए, साहित्य पढ़ें, संगीत सुनें और कला सीखें—
# # # क्योंकि कला केवल विषय नहीं, जीवन को सुंदर बनाने की शक्ति है।
**प्रेषक:**
# # # विकास ललित कला अकादमी (रजि.)
न्याय मार्ग, श्रीनगर, सिवान (बिहार)
**संबद्ध:**
सुरो भारती संगीत कला केंद्र, हुगली (पश्चिम बंगाल)
**विषय:** पेंटिंग • आर्ट एंड क्राफ्ट • योगासन • संगीत • रेसिटेशन
**ऑनलाइन एवं ऑफलाइन प्रशिक्षण उपलब्ध**
**डॉ./प्रो. विकाश कुमार**
**(प्राचार्य)**
📱 **मोबाइल नं.: 7563939396**
# # # **“कला सीखिए, प्रतिभा जगाइए और अपने व्यक्तित्व को नई पहचान दीजिए।”**