28/07/2026
M.K. Digvijay Singh Ratlam
तू माटी का लाल है, कंकड़ या धूल नहीं,
रतलाम की संस्कृति का दीप है, कोई भूल नहीं।
राजपूती स्वाभिमान तेरी पहचान बन जाए,
तेरा हर कर्म ही तेरे कुल का सम्मान कहलाए।
ना तख़्त की चाह, ना ताज का अभिमान,
संस्कारों से ही बनती है इंसान की पहचान।
दिग्विजय नाम नहीं, एक विश्वास की मिसाल है,
रतलाम की माटी का हर कण तुझ पर निहाल है।
ना ऊँची आवाज़, ना झूठा कोई शोर,
सादगी में ही छिपा है राजपूती गौरव का दौर।
माथे की पगड़ी नहीं, चरित्र असली शान है,
यही रतलाम की धरती का अमिट सम्मान है। ⚔️👑