EXPose Bihar

EXPose Bihar अपने हलचल भरें शहरों से लेकर शांत जंगलों तक,बिहार में हर किसी के लिए कुछ न कुछ है ! देखें और आनंद ले।

26/03/2024

होली हो ।

24/03/2024

सभी को होलिका दहन की शुभकामनाएँ ।।

होलिका के साथ आपके दुःखों का भी नाश हो ।

08/03/2024

नशा नहीं त्याग है, शिव ।

महाशिवरात्रि 🔱

14/02/2024

शहर का कोना-कोना माँ शारदे वीणापानी की पूजा-अर्चना में डूबे श्रद्धालु।

बोलो माँ सरस्वती की जय 🙏

14/02/2024

Black Day 🇮🇳

26/01/2024

सभी भारतवाशियों को 25वां गणतंत्र दिवस की बधाई ॥

▪️Valmiki Tiger Reserve - ( वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान )📍West Champaran - 845105, BiharLocation:  https://maps.app.goo.gl...
09/08/2023

▪️Valmiki Tiger Reserve - ( वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान )
📍West Champaran - 845105, Bihar

Location: https://maps.app.goo.gl/E87eC4MQgaKBWcgs5?g_st=ic

वाल्मिकी टाइगर रिज़र्व भारत में हिमालय तराई जंगलों की सबसे पूर्वी सीमा बनाता है और बिहार का एकमात्र बाघ रिज़र्व है। देश के गंगा के मैदानी जैव-भौगोलिक क्षेत्र में स्थित इस जंगल में भाबर और तराई इलाकों का संयोजन है। वाल्मिकी टाइगर रिजर्व बिहार के उत्तर-पश्चिमी (ज्यादातर पश्चिम चंपारण में) जिले में स्थित है। जिले का नाम दो शब्दों चंपा और अरण्य से मिलकर बना है जिसका अर्थ है चंपा के पेड़ों का जंगल।
अभयारण्य में पक्षियों की 250 प्रजातियों, 53 स्तनधारियों, 145 पक्षियों, 26 सरीसृपों और 13 उभयचरों और टाइगर रिजर्व का आश्रय है ।

वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान पश्चिमी चम्पारण ज़िले के सबसे उत्तरी भाग में नेपाल की सीमा के पास बेतिया से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह एक छोटा कस्‍बा है जहां कम आबादी है और यह अधिकांशत: वन क्षेत्र के अंदर है।

पश्चिमी चंपारण जिले का सबसे निकटतम एक मुख्य रेलवे स्‍टेशन #बगहा BUG से उतरकर बस द्वारा वाल्मीकिनगर (भैंसालोटन) जा सकते हैं। बगहा रेलवे स्टेशन नरकटियागंज के रेलखंड के पास वाया हरिनगर 5वां स्टेशन है। पटना, मुजफ्फरपुर से वाया बेतिया जिला मुख्यालय से सड़क मार्ग से भी बगहा,वाल्मीकिनगर (भैंसालोटन) आया जा सकता है।

यह पार्क उत्तर में नेपाल के रॉयल चितवन नेशनल पार्क और पश्चिम में हिमालय पर्वत की गंडक नदी से घिरा हुआ है। यहां पर आप बाघ, स्‍लॉथ बीयर, भेडिए, हिरण, सीरो, चीते, अजगर, पीफोल, चीतल, सांभर, नील गाय, हाइना, भारतीय सीवेट, जंगली बिल्लियां, हॉग डीयर, जंगली कुत्ते, एक सींग वाले राइनोसिरोस तथा भारतीय भैंसे कभी कभार चितवन से चलकर वाल्‍मीकि नगर में आ जाते हैं।

#वाल्मीकि #वाल्मीकिटाइगर #बिहार

▪️Kanwar Lake - ( कांवर झील )📍Begusrai- 848202, Begusrai (Bihar)  Location : https://maps.app.goo.gl/wYebB6vuYeTN1GU37?g...
06/08/2023

▪️Kanwar Lake - ( कांवर झील )
📍Begusrai- 848202, Begusrai (Bihar)

Location : https://maps.app.goo.gl/wYebB6vuYeTN1GU37?g_st=ic

काबर झील अथवा कावर झील जिसे स्थानीय रूप से काबर ताल, कनवार ताल या कावर ताल भी कहते हैं, भारतीय राज्य बिहार के बेगूसराय जिले में मीठे पानी की एक उथली झील है। यह झील जिला मुख्यालय बेगूसराय से तकरीबन 22 किलोमीटर उत्तर में और बिहार के राजधानी नगर पटना से 100 किलोमीटर पूरब में स्थित है। इस झील और आसपास की नमभूमि (वेटलैंड) को पक्षी विहार का दर्जा प्राप्त है। बिहार सरकार के वन विभाग के आँकड़ों के मुताबिक़ इसे पक्षी विहार का दर्जा 1989 में दिया गया और यह कुल 63.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर विस्तार लिए हुए है ! यहाँ जाड़ों में काफी प्रवासी पक्षी आते हैं जिनमें विदेशी पक्षी भी शामिल हैं, हालाँकि, हाल के समय में यह झील पानी की कमी से जूझ रही है और सरकारी योजनाओं के पारित होने के बावज़ूद उपेक्षा के चलते संकटपूर्ण स्थिति में है। झील पर निर्भर स्थानीय मछुआरे (मल्लाह) भी इसके कारण संकट झेल रहे हैं !

झील के नजदीक ही जय मंगल गढ़ के नाम से एक प्रसिद्ध एक मंदिर भी है जिसे पाल वंश के काल में स्थापित माना जाता है और यह भी अनुमान है कि यह एक किले के रूप में था।

#कांवरझील #बेगूसराय #बेगूसराई

▪️Nalanda Mahavihar - ( नालंदा विश्वविद्यालय / खण्डहर )📍 Nalanda - 803111, Nalanda (Bihar)Location: https://maps.app.goo...
05/08/2023

▪️Nalanda Mahavihar - ( नालंदा विश्वविद्यालय / खण्डहर )
📍 Nalanda - 803111, Nalanda (Bihar)

Location: https://maps.app.goo.gl/2YjyheKSsgW4a3LUA?g_st=ic

नालंदा प्राचीन भारत में उच्च शिक्षा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और विख्यात केन्द्र था। महायान बौद्ध धर्म के इस शिक्षा-केन्द्र में हीनयान बौद्ध-धर्म के साथ ही अन्य धर्मों के तथा अनेक देशों के छात्र पढ़ते थे। वर्तमान बिहार राज्य में पटना से 90 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और राजगीर से 12 किलोमीटर उत्तर में एक गाँव के पास अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा खोजे गए इस महान बौद्ध विश्वविद्यालय के भग्नावशेष इसके प्राचीन वैभव का बहुत कुछ अंदाज़ करा देते हैं। अनेक पुराभिलेखों और सातवीं शताब्दी में भारत के इतिहास को पढ़ने आया था के लिए आये चीनी यात्री ह्वेनसांग तथा इत्सिंग के यात्रा विवरणों से इस विश्वविद्यालय के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है। यहाँ १०,००० छात्रों को पढ़ाने के लिए २,००० शिक्षक थे। प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने ७ वीं शताब्दी में यहाँ जीवन का महत्त्वपूर्ण एक वर्ष एक विद्यार्थी और एक शिक्षक के रूप में व्यतीत किया था। प्रसिद्ध 'बौद्ध सारिपुत्र' का जन्म यहीं पर हुआ था।

यह विश्व का प्रथम पूर्णतः आवासीय विश्वविद्यालय था। विकसित स्थिति में इसमें विद्यार्थियों की संख्या करीब १०,००० एवं अध्यापकों की संख्या २००० थी। सातवीं शती में जब ह्वेनसाङ आया था उस समय १०,००० विद्यार्थी और १५१० आचार्य नालंदा विश्वविद्यालय में थे। इस विश्वविद्यालय में भारत के विभिन्न क्षेत्रों से ही नहीं बल्कि कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत, इंडोनेशिया, फारस तथा तुर्की से भी विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते थे। नालंदा के विशिष्ट शिक्षाप्राप्त स्नातक बाहर जाकर बौद्ध धर्म का प्रचार करते थे। इस विश्वविद्यालय को नौवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी तक अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त थी।

प्रसिद्ध चीनी विद्वान यात्री ह्वेन त्सांग और इत्सिंग ने कई वर्षों तक यहाँ सांस्कृतिक व दर्शन की शिक्षा ग्रहण की। इन्होंने अपने यात्रा वृत्तांत व संस्मरणों में नालंदा के विषय में काफी कुछ लिखा है।[3][क] ह्वेनत्सांग ने लिखा है कि सहस्रों छात्र नालंदा में अध्ययन करते थे और इसी कारण नालंदा प्रख्यात हो गया था। दिन भर अध्ययन में बीत जाता था। विदेशी छात्र भी अपनी शंकाओं का समाधान करते थे। इत्सिंग ने लिखा है कि विश्वविद्यालय के विख्यात विद्वानों के नाम विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर श्वेत अक्षरों में लिखे जाते थे।

इस विश्वविद्यालय के अवशेष चौदह हेक्टेयर क्षेत्र में मिले हैं। खुदाई में मिली सभी इमारतों का निर्माण लाल पत्थर से किया गया था। यह परिसर दक्षिण से उत्तर की ओर बना हुआ है। मठ या विहार इस परिसर के पूर्व दिशा में व चैत्य (मंदिर) पश्चिम दिशा में बने थे। इस परिसर की सबसे मुख्य इमारत विहार-१ थी। आज में भी यहां दो मंजिला इमारत शेष है। यह इमारत परिसर के मुख्य आंगन के समीप बनी हुई है। संभवत: यहां ही शिक्षक अपने छात्रों को संबोधित किया करते थे। इस विहार में एक छोटा सा प्रार्थनालय भी अभी सुरक्षित अवस्था में बचा हुआ है। इस प्रार्थनालय में भगवान बुद्ध की भग्न प्रतिमा बनी है। यहां स्थित मंदिर नं. ३ इस परिसर का सबसे बड़ा मंदिर है। इस मंदिर से समूचे क्षेत्र का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है। यह मंदिर कई छोटे-बड़े स्तूपों से घिरा हुआ है। इन सभी स्तूपों में भगवान बुद्ध की विभिन्न मुद्राओं में मूर्तियां बनी हुई है।

छात्रों को किसी प्रकार की आर्थिक चिंता न थी। उनके लिए शिक्षा, भोजन, वस्त्र औषधि और उपचार सभी निःशुल्क थे। राज्य की ओर से विश्वविद्यालय को दो सौ गाँव दान में मिले थे, जिनसे प्राप्त आय और अनाज से उसका खर्च चलता था।
यहां छात्रों का अपना संघ था। वे स्वयं इसकी व्यवस्था तथा चुनाव करते थे। यह संघ छात्र संबंधित विभिन्न मामलों जैसे छात्रावासों का प्रबंध आदि करता था।
यहां छात्रों के रहने के लिए ३०० कक्ष बने थे, जिनमें अकेले या एक से अधिक छात्रों के रहने की व्यवस्था थी। एक या दो भिक्षु छात्र एक कमरे में रहते थे। कमरे छात्रों को प्रत्येक वर्ष उनकी अग्रिमता के आधार पर दिये जाते थे। इसका प्रबंधन स्वयं छात्रों द्वारा छात्र संघ के माध्यम से किया जाता था।
नालंदा में सहस्रों विद्यार्थियों और आचार्यों के अध्ययन के लिए, नौ तल का एक विराट पुस्तकालय था जिसमें ३ लाख से अधिक पुस्तकों का अनुपम संग्रह था।[3] इस पुस्तकालय में सभी विषयों से संबंधित पुस्तकें थी। यह 'रत्नरंजक' 'रत्नोदधि' 'रत्नसागर' नामक तीन विशाल भवनों में स्थित था। 'रत्नोदधि' पुस्तकालय में अनेक अप्राप्य हस्तलिखित पुस्तकें संग्रहीत थी। इनमें से अनेक पुस्तकों की प्रतिलिपियाँ चीनी यात्री अपने साथ ले गये थे।

#नालंदा #नालंदाखण्डहर #नालंदामहाविहार #नालंदाविश्वविद्यालय

Address

Patna

Telephone

+919142297965

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when EXPose Bihar posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share

Category