10/08/2025
18 वर्ष 3 दिन के एक ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानी कि कहानी जिसने 1857 क्रांति में अपने साहस व युध्द कौशल से अंग्रेजों के मशहूर रेजीमेंट हडसन हार्स को भागने पर विवश किया !
एक ऐसे वीर बलिदानी की दास्तां जिसके शौर्य और पराक्रम की घटना को सुनकर ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया ने उस महान व्यक्ति की छवि देखने का निश्चय किया और बलभद्र सिंह का चित्र अपने बंकिघम पैलेस में लगवाया !
मां भारती के ऐसे सपूत जिनके युध्द कौशल और मां भारती के प्रति समर्पण को ब्रिटिश युद्ध संवाददाता विलियम रसेल और ब्रिगेडियर होपग्रांट ने अपने डिस्पैच में खुलकर सराहना किया है ।
आज हम पराक्रम, शौर्य, कर्तव्यनिष्ठा, देशभक्ति के अद्वितीय प्रतीक ठाकुर बलभद्र सिंह चहलारी के इतिहास से परिचित होंगे ।
#ठाकुर_बलभद्र_सिंह_रैकवार
भारत के आज़ादी के नायक राजा बलभद्र सिंह रैकवार जी का जन्म 10 जून 1840 ई. को उत्तरप्रदेश के चहलारी राज्य ( बहराइच जिले के महसी तहसील में हुआ था )।इनके पिताजी का नाम राजा श्रीपाल सिंह था, चहलारी रियासत पर कश्मीर से आए रैकवार क्षत्रियों का शासन होता था ! रैकवार वंश प्रसिद्ध राठौड़ वंश की ही शाखा है ! वर्तमान भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह जी राठौड़ वंश की शाखा इसी रैकवार वंश से संबंध रखते हैं ।
राजा बलभद्र सिंह जी किशोरावस्था में मात्र 18 वर्ष की ही आयु में राजा बन गए ।ये बचपन से ही निडर और महान पराक्रमी और युद्ध कला में पारंगत महारथी थे ! इनके उदारता और संवेदनशीलता के कारण ही इनके राज्य की जनता पूरी तरह शोषण मुक्त होकर सुख, शांति से जीवन यापन करते थी ! चहलारी, बहराइच (उत्तर प्रदेश) के 18 वर्षीय जमींदार बलभद्र सिंह ऐसे वीर थे जिनके पास 33 गाँवों की जमींदारी थी
1857 कि क्रांति ने ठाकुर बलभद्र सिंह को स्वतंत्रता से प्रेरित किया, और मां भारती के को स्वतंत्र कराने के लिए प्रतिज्ञा लेकर रणभूमि में कूद पड़े! जब बलभद्र सिंह सेना के साथ प्रस्थान करने लगे, तो वे अपनी गर्भवती पत्नी के पास गये। वीर पत्नी ने उनके माथे पर रोली-अक्षत का टीका लगाया और अपने हाथ से कमर में तलवार बाँधी। इसी प्रकार राजमाता ने भी बेटे को आशीर्वाद देकर अन्तिम साँस तक अपने वंश और देश की मर्यादा की रक्षा करने को कहा। बलभद्र सिंह पूरे उत्साह से महादेवा जा पहुँचे।
महादेवा में बलभद्र सिंह के साथ ही अवध क्षेत्र के सभी देशभक्त राजा एवं जमींदार अपनी सेना के साथ आ चुके थे। वहाँ राम चबूतरे पर एक सम्मेलन हुआ, जिसमें सबको अलग-अलग मोर्चे सौंपे गये। नवाबगंज के मोर्चे का बागडोर ठाकुर बलभद्र सिंह को सौंपा गया !
#अद्वितीय_युध्द :-
12 जून 1858 को ठाकुर बलभद्र सिंह की सेना और अंग्रेजों की सबसे प्रसिद्ध रेजीमेंट हडसन हार्स आमने सामने हुए, युद्ध शुरू हुआ और 16 हजार सैनिकों के साथ राजा बलभद्र सिंह ने अंग्रेजी सेना पर हमला बोल दिया ! देखते ही देखते फिरंगियों की लाशें बिछने लगी. इसे देखकर अंग्रेज बौखला गए और उनकी सेना में भगदड़ मच गया ! मैदाने जंग का हाल देख अंग्रेजी सेना का सेनापति भाग खड़ा हुआ !
अगले दिन यानी 13 जून को सेनापति होप ने अंग्रेजो की 2-3 सेना टुकड़ी और बुला लिया, जो पुरी तरह से असलहों व तोपों से सुसज्जित थी, बड़ी संख्या में तोपें और राइफलों के साथ अंग्रेजी सेना मैदानी जंग में आ पहुंचा।
बलभद्र ने एक बार फिर फिरंगियों की लाशें बिछाना शुरू किया, आखिरकार राजा बलभद्र सिंह और फिरंगी सेनापति होपग्रांट आमने सामने आ गए ! ठाकुर बलभद्र के वार से होपग्रांट का यूनियन जैक कटकर गिर गया और वो बेहोश हो गया !
बदकिस्मती से उसी वक्त तोप के गोले ने उनके हाथी को धराशाई कर दिया, उन्होंने तुरंत एक घोड़े पर बैठकर फिरंगियों का नरसंहार शुरू कर दिया ! एक बार फिर एक गोले ने उनके घोड़े को गिरा दिया तब पैदल ही दोनों हाथों में तलवार लेकर फिरंगियों पर कहर बरपाने लगे ! इसी बीच अंग्रेज सेनापति होपग्रांट ने धोखे से पीछे से वार किया और उनका सिर धड़ से अलग हो गया ! कहा जाता है कि सिर धड़ से अलग हो जाने के बाद भी वो काफी देर तक लड़ते रहे और कई फिरंगियों को मौत के घाट उतारते रहे ! अंततः मां भारती के लिए एक 18 वर्ष का शुरवीर बलिदान हो गया लेकिन एक स्वर्णिम इतिहास रच गया !
#युध्द_कौशल :-
ठाकुर बलभद्र सिंह के इस युद्ध कौशल, पराक्रम और अपने मातृभूमि के प्रति समर्पण को देखकर ब्रिगेडियर होपग्रांट व अन्य ब्रिटिश सैनिक दंग रह गये । समस्त ब्रिटिश रेजीमेंट में इस भयावह युद्ध का चर्चा होने लगा ।
इस घटना का पता जब ब्रिटिश रानी विक्टोरिया को चला तो उन्होंने उस 18 वर्ष के रणबांकुरे को देखने की धारणा व्यक्त किया, जो युवा 18 वर्ष की आयु मे अपने मातृभूमि के लिए बिना सर के भी लड़ता रहा ।
#ब्रिटेन_महारानी_विक्टोरिया :-
ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया के निर्देश पर ठाकुर बलभद्र सिंह का छवि तैयार किया गया , फिर ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया ने बलभद्र सिंह का चित्र अपने बंकिघम पैलेस में लगवाया !
अफ़सोस, ऐसे रणबांकुरों को इतिहास में वह स्थान नहीं मिला जिसके वह पात्र थे 🥲
शत् शत् नमन ऐसे वीर अमर बलिदानी ठाकुर बलभद्र सिंह रैकवार जी को 🙏🇮🇳
- आशा है, आप सभी ऐसे वीर बलिदानी का इतिहास साझा कर सभी को उनके पराक्रम व शौर्य से परिचित करायेंगे ।
जय मां भारती
जय हिन्द 🇮🇳
#आजादी_का_अमृत_महोत्सव