Jat History, Our Valour

Jat History, Our Valour यह पेज जाटो के गौरवशाली इतिहास को सामने लाने का एक प्रयत्न है। जय दादा सूरजमल 🚩🚩🇮🇳 Jat, & Only Jat!!

King Jasrat Khokhar Jáṭ ❤️🙏🏻Jasrat Khokhar defeated Afghans and Delhi sultanate and others several times. He also revolt...
13/04/2025

King Jasrat Khokhar Jáṭ ❤️🙏🏻
Jasrat Khokhar defeated Afghans and Delhi sultanate and others several times. He also revolted against (Taimoor) in 1398 A.D. when Taimoor invaded the Indian subcontinent. (Introduction, including Map in first 2 Slides).

S. Westphal-Hellbusch in 1968 published a book on Jáṭs in German language titled "Zur Geschichte und Kultur der Jat" page 121 mentioned that Khokhars declared themselves as Rajputs only in (or after) 1881. Before that they were Jats originally. (Slide 3).
The same page also called Jasrat Khokhar as the leader of the Jáṭs. (Slide 3).

The journal of the Royal Asiatic Society of the Great Britain and Ireland (1899) mentioned "Khokhar, Langāh, Tātar, Virk are doubtfully Rajput (tribes)." (Slide 4).

The Khokhar Tribe of Jáṭs (to which Jasrat belonged), once killed and beheaded Mu'izzuddin Ghori (Mohmmad bin Sām) at Dhamyak (Sindh) (present Dhamiak Kot, Pakistan) on 15 March 1206 A.D. (Slide 5).

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The Robinhood of Punjab ❤️ Jatt Dulla Bhatti 🔥कुछ र*डियों का र*ण्डी-रोना। (Slide 1)13वीं शताब्दी में मिन्हास अल-सिराज जु...
05/04/2025

The Robinhood of Punjab ❤️ Jatt Dulla Bhatti 🔥

कुछ र*डियों का र*ण्डी-रोना। (Slide 1)

13वीं शताब्दी में मिन्हास अल-सिराज जुज़्जानी ने "टबक़ात-ए-नाषिरी" नामक फ़ारसी पुस्तिका कि रचना की, जिसमें वह पंजाब के भट्टी कबीले को जाट कबीला लिखता है। इस फारसी पुस्तक का अंग्रेज़ी अनुवाद 1881 में मेज़र एच जी रवर्ती द्वारा किया गया। Vol. 1, p. 326. (Slide 2)

अबुल फ़ज़ल द्वारा कृत "आइन-ए-अकबरी" 16वीं शताब्दी कि एक महत्वपूर्ण पुस्तक है, जो कि धुल्ला भट्टी की समकालीन ( ) भी है। जिसमें अबुल फ़ज़ल भट्टी को एक जाट कबीले के रूप में वर्णित करता है। (Slide 3).

Biographical Encyclopedia Punjab 1986 by Abdulhamid Bhatt के पृष्ठ 86 पर धुल्ला भट्टी को जट्ट लिखा है। (Slide 4)

1972 की पुस्तक "पंजाबी अदब दी मुख्तसर तारीख़" में कृतक हमीदुल्लाह शाह हाशमी पृष्ठ 298 पर धुल्ला भट्टी को जाट लिखते हैं। (Slide 5)

राजस्थानी इतिहास के रचयिता ल्यूटीनेंट कर्नल जेम्स टॉड (Lt. Col. J. Tod), यह मानते हैं कि यदु-भट्टी वस्तुत जिट या युति जाति से उत्पत्तित हुए हैं। (Annals and Antiquities of Rajasthan Volume 2 (1832) Annals of Bikaner, page 139), (Slide 6)

प्रोफेसर जे. ऍफ़. हैविट्ट (J. F. Hewitt) के अनुसार मूलरूपी हेले जाटों को भट्टी बोलते हैं तथा इन्हें ही मालव जाट भी कहा जाता है। (Myth-Making Age, 1901, page 387)।
"मूलरूपी (Originally)" कथन से यह स्पष्ट होता है कि सारे भट्टी शुरू में जाट ही थे जिनका कि बाद में राजपूतिकरण हुआ है। (Slide 7).

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⚠️ #जाट #किसान #पंजाब #मातृभूमि

Jats are a global race, known today by many different names including Getae, Goth, Geti, Jet, Djati, Zjati etc.    ❤️❤️❤...
23/03/2025

Jats are a global race, known today by many different names including Getae, Goth, Geti, Jet, Djati, Zjati etc.

❤️❤️❤️

Herodotus (Greek historian) in 5rd century BCE said that the Getae are the most powerful people beside they have unity.
Pāṇini (an Indian Sankrit scholar) in the same age (5th cen. BCE) named the group of Āyudhjīvī (warrior-like) people (clans) as "Jaṭa".


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Antonio Monserrate का जन्म 1536 ईसा में स्पेन (Spain) में हुआ था, वह एक यहसूट/इशूइत पादरी (Jesuit Priest) था, उसने एक कि...
13/03/2025

Antonio Monserrate का जन्म 1536 ईसा में स्पेन (Spain) में हुआ था, वह एक यहसूट/इशूइत पादरी (Jesuit Priest) था, उसने एक किताब (लैटिन भाषा में) लिखी थी, "Commentarius de itinere et rebus gestis in India et other Orientalibus" जिसमें वह जाटों की समरूपता यूरोप के Getae (जेटी) लोगों से करता है। यह एक स्पैनिश मूल का व्यक्ति था।

Monserrate/Monserrat/Montserrate, यह अक़बर के दरबार में भी ईसाई धर्म के प्रचार के लिए गया था तथा 4 मार्च 1580 को अक़बर के दरबार में उपस्थित हुआ था।
इसके बाद यह अक़बर के दूसरे बेटे मुराद मिर्ज़ा का शिक्षक बना तथा अक़बर के क़ाबुल हमले के दौरान (1581 ईसा) उसके साथ ही गया/रहा।
इसके बाद इसने अक़बर का दरबार अप्रैल (April) 1582 में छोड़ा तथा गोवा चला गया जिसके बाद 26 अक्टूबर 1605 को इसकी गोवा में मृत्यु हो गई।

इसके द्वारा लिखित पुस्तिका का अंग्रेज़ी अनुवाद जे. एस. हॉलैण्ड द्वारा सन् 1922 में किया गया (पृष्ठ 110)। (Slide 3)

इसके द्वारा जाटों और Getae (जेटी) लोगों पर की गई टिप्पणी का वर्णन् सन् 1932 में एडवर्ड मैक्लेग़न ने अपनी पुस्तक "The Jesuits and the Great Mogul" में पृष्ठ संख्या 153-154 पर किया गया। (Slide 4)

इसके बाद लेखक संदीप एस. झुट्टी का लेख "The Getes - Sino-Platonic Papers No. 127, Oct. 2003" (Editor Victor H. Mair, published by University of Pennsylvania) के पृष्ठ 10 पर भी इस तथ्य का ज़िक्र किया है। (Slide 5)

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"जट झट संघाते" (महर्षि पाणिनिः द्वारा 2500 वर्ष पूर्व, धातुपाठः में जट समुदाय का ज़िक्र।)  #आयुधजीवी  #जाट follow  महर्ष...
20/02/2025

"जट झट संघाते" (महर्षि पाणिनिः द्वारा 2500 वर्ष पूर्व, धातुपाठः में जट समुदाय का ज़िक्र।) #आयुधजीवी #जाट follow

महर्षि पाणिनिः का वास्तविक काल विवादित है परन्तु इस बात पर आम सहमति है कि कम से कम 2500 साल पहले वह अस्तित्व में था उसने अष्टाध्याई लिखी जिसमें संस्कृत व्याकरण का विग्रह किया गया, उसके पाठ "धातुपाठः" में जाट नस्ल का ज़िक्र योद्धाओं के समूह (आयुधजीवी) के रूप किया गया है। (याद रहे आज से 2500 साल पहले।) इस हिसाब से पाणिनीः यूनान के इतिहासकार हैराडॉट्स का समकालीन हुआ। जो कि थ्रेस ( यूरोप) के जेटी ( ) लोगों का ज़िक्र भी सबसे महान् योद्धाओं के रूप में करता है।



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भारतीय सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इण्डिया) मानता है कि राजपूत जाटों की औलादें हैं (उनसे अलग हुए) तथा जाट समुदा...
11/02/2025

भारतीय सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इण्डिया) मानता है कि राजपूत जाटों की औलादें हैं (उनसे अलग हुए) तथा जाट समुदाय वैदिक आर्यों का वंशज समुदाय है जो 4500-2500 BC, यानी आज से 6500 से 4500 सालों पहले तक सरस्वती नदी पर बसे हुए थे।

Case का नाम? "Ram Singh & Ors. Versus Union of India"

जज का नाम? चीफ जस्टिस रन्जन गोगोई.
Writ Petition (Civil) No. 247 of 2014.
फ़ैसले की तिथि - 17 मार्च 2015.

Special thanks to भाई & ig@contemporary_jat

यह केवल प्रथम भाग है इसके कुल 4 भाग आवेंगे। बाकियों के लिए Instagram पर  को फॉलो करलो सब उधर ही आवेंगी।बयाना (भरतपुर) से...
27/01/2025

यह केवल प्रथम भाग है इसके कुल 4 भाग आवेंगे। बाकियों के लिए Instagram पर को फॉलो करलो सब उधर ही आवेंगी।

बयाना (भरतपुर) से प्राप्त सिक्कों में धारण/गुप्त सम्राटों को जित/जत कहा गया है।

पुस्तक "Catalogues of The Gupta Coins in the Bayana Hoard" सन् 1954 में ए. एस. अल्तेकर द्वारा छापा गया इसमें बयाना में मिले 1800 से ज़्यादा सिक्कों पर शोध किया गया तथा उनमें से 400 से अधिक सिक्कों पर जत/जित शब्द अंकित है। यह Hoard (गढ़ा) बयाना में सन् 1946 में खोजा गया था तथा 1951 तक ये भरतपुर के महाराजा सवाई बृजेंद्र सिंह बहादुर के संग्रहालय में संरक्षित रखा गया था तथा 1951 में यह प्रेसीडेण्ट को सौंप दिया गया था तथा आज ये राष्ट्रीय म्यूजियम में सुरक्षित रखा है सारे सिक्के वहीं रखे हैं तथा किताब (1954) के अन्त में भी उनका चित्रण दिया गया है। यह पुस्तक "Numismatic Society of India" द्वारा छांपी गई थी।

जय हो #धारण #जाट वंश के महान सम्राटों की। 🙏🏻🙏🏻



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पाण्डव वंशी सम्राट युद्धिष्ठिर जाट था (समकालीन और ऐतिहासिक प्रमाण) ।बौद्ध धर्म में कुल 547 जातक लिखे गए आज से 2300-2400 ...
24/01/2025

पाण्डव वंशी सम्राट युद्धिष्ठिर जाट था (समकालीन और ऐतिहासिक प्रमाण) ।

बौद्ध धर्म में कुल 547 जातक लिखे गए आज से 2300-2400 साल पहले उसमें से एक 300 ईसा पूर्व लिखित "धूमकारी जातक" भी है, उसमें इंद्रप्रस्थ के राजा युद्धिष्ठिर को गोट (अथवा जाट) लिखा है, ये जातक सम्राट अशोक मोर के काल के हैं। (Slide 2-3)

गोट और जाट एक ही शब्द है (ग्रिम के वेरिएशन/विभिन्नता के नियम के अनुसार) (Slide 4-5-6)

#महाभारत के आदि पर्व के पाठ 187 के श्लोक 28 में युद्धिष्ठिर खुद को जाट कहता है। एस डी सतवेलकर द्वारा सन् 1968 में कृत महाभारत का पृष्ठ 927. (Slide 7)

महाभारत आदि पर्व में सम्राट युद्धिष्ठिर को कौन्तेय कहा गया, कौन्तेय जाटों का गोत्र है तथा किसी अन्य समाज में यह गोत् नहीं है। देखो पाठ 187 का श्लोक 27, एस सतवेलकर 1968 हिन्दी का पृष्ठ 927. (Slide 8)

वर्तमान पिसावा (अलीगढ़) का राजा यादवेंद्र सिंह तोमर कौन्तेय जाट है और सम्राट अनंगपाल देव का वंशज है जिन्होंने दिल्ली को पुनः स्थापित किया था। यह वंश महाभारत के नायक #अर्जुन का वंशज है (Slide 9) । (श्रोत देखो पाण्डव गाथा, कँवरपाल सिंह, पृष्ठ 144 {Slide 8 पर})

अन्त में एक अत्यंत महत्वपूर्ण श्रोत इतिहासकार बी एस दहिया जी (IRS, r.) द्वारा सन् 1982 में कृत पुस्तिका "जाट प्राचीन शासक" का पृष्ठ 323. (Slide 10)।।। यह भी मानना पड़ेगा कि इस पुस्तिका के लिए लेखक का जितना धन्यवाद करा जाए उतना कम है, मैं इसे एक जाटग्रन्थ के रूप में देखता हूँ।

#जाट ⚠️
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एलिज़ाबेथ विल्सन विदेशी इतिहासकार द्वारा जाटों का ज़िक्र सन् 1882 में। #जाट                ⚠️                           ...
22/01/2025

एलिज़ाबेथ विल्सन विदेशी इतिहासकार द्वारा जाटों का ज़िक्र सन् 1882 में।

#जाट ⚠️

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