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जयपुर शहर से माह दिसम्बर-2022 की आकाशीय स्थितिसंध्याकाश में पाँचों प्रमुख ग्रहों को एक साथ देखने का सुनहरा अवसर बन रहा ह...
30/11/2022

जयपुर शहर से माह दिसम्बर-2022 की आकाशीय स्थिति
संध्याकाश में पाँचों प्रमुख ग्रहों को एक साथ देखने का सुनहरा अवसर बन रहा है। रात्रि आसमान में पहले से ही मौजुद मंगल, बृहस्पति व शनि के साथ बुध व शुक्र भी माह के उत्तरार्ध में नजर आने लगेंगे। झिलमिलाते-टिमटिमाते सितारों के बीच इन्हीं पाँच ग्रहों को हम कोरी आखों से देख पाते हैं। ग्रहों को पहचानने की कोई खास तरकीब नही है। लेकिन चमक-दमक तारों से अधिक होने की वजह से इन्हें आसानी से पकड़ा जा सकता है। तारों के बीच जगह बदल रही ग्रह-मण्डली के हर ग्रह की अपनी एक अलग रंगत व खासियत भी है। यही खासियत इनकी पहचान करवा देती है। एक छोटी दूरबीन या बाइनोक्युलर से इनकी छवि और स्पष्ट नजर आती है।

सूर्य का सबसे करीबी छोटा बुध 1 दिसेम्बर से सूर्यास्त के समय पश्चिमी क्षितिज पर अपनी जगह बना रहा है। यह क्षितिज पर ऊँचा नहीं उठ पाता और जल्दी ही डूब जाता है। माह के उत्तरार्ध में पश्चिमी क्षितिज से लगभग 15 डिग्री ऊपर इसे ढूँढ़ने का प्रयास सफलता दिलवा सकता है। सीधी चाल में चल रहा चंचल बुध 21 दिसम्बर को क्षितिज से अपनी अधिकतम ऊँचाई और 29 दिसम्बर से वक्री होगा। इस दौरान यह चमकदार शुक्र से भी ऊपर है, जिससे बुध को पहचानना आसान है।

सबसे चमकदार ग्रह शुक्र साँझ के तारा बनके जलवा बिखेरने को तत्पर है। दैत्यगुरु बहुत ही धीरे-धीरे दिन-प्रतिदिन पश्चिमी क्षितिज पर ऊपर ऊठ रहे हैं। माह के उत्तरार्ध में गोधुलि के ऊपर आप सभी को शुक्र अपनी चमक से आकर्षित करेगा। 29 दिसम्बर को शुक्र की दाँयी और छोटे बुध को भी देखा जा सकता है। कोशिश कीजिए।

संध्याकाश में शासन चल रहा है - महारथी मंगल का। 8 दिसम्बर को लाल ग्रह वियुति (opposition) पर होगा। वियुति के आस-पास ग्रह की चमक सर्वाधिक होती है। मंगल हर 26 महीने बाद वियुति पर आता है। ग्रह की चमक भी कई गुना बढ़ जाती है। अंधेरा घिरते पूर्वी क्षितिज पर लाल मंगल प्रकट होगा और पूरी रात, पूरे माह नजर आयेगा। इसकी लाल चमक आपको अनायास अपनी और खींच रही है।

सबसे विशाल, ग्रहराज बृहस्पति, मीन राशि के धुँधले तारों के बीच अपनी सफेद उज्ज्वल आभा में दमक रहा है। तारों की झिलमिलाहट शुरु होने के पहले ही देवगुरु मध्याकाश में आपको नजर आ जायेंगे। इनकी चमक-दमक तारों से काफी ज्यादा है, और एक छोटी दूरबीन से ही इसके इर्द-गिर्द घूम रहे चार चन्द्रमा भी नजर आ जाते हैं।

वलयधारी शनि मकर राशि में संध्याकाश में पश्चिमी क्षितिज की और बढ़ रहा है। यह सफेद-पीली आभा में एक चमकदार तारे जैसा नजर आ रहा है। तारों की झिलमिलाहट शुरु होते ही दक्षिणी क्षितिज से लगभग 50 डिग्री ऊपर, जरा पश्चिमी भाग में, इस सुन्दर ग्रह को आप आसानी से पकड़ लेंगे।

चन्द्रमा 2 व 29 को बृहस्पति, 8 को मंगल, 24 को शुक्र, फिर बुध तथा 26 दिसम्बर को शनि ग्रह के आस-पास दिखाई देगा। 8 को चन्द्रमा लाल मंगल को आच्छादित (occult) कर रहा है। यह नजारा भारत भूमि से नजर नहीं आयेगा। लेकिन 8 दिसम्बर को चन्द्रमा से जरा ऊपर लाल मंगल एक अनुपम नजारा पेश कर रहा है। जैसे चन्द्रमा के माथे पर लाल तिलक। एक बार देखिये जरुर।

पूर्वी क्षितिज पर छटा बिखेरते प्रसिद्ध एवं भव्य तारामण्डल - कालपुरुष, बृहल्लुब्धक, सारथी, मिथुन तथा वृषभ, बहुत ही आकर्षक लग रहे हैं। चमकदार नक्षत्र से सजे इन तारामण्डलों को आसानी से पहचाना जा सकता है। दसअसल, वर्षभर बाद तारों का समाज ऊपर आसमान में वैसा का वैसा वापस आ जाता है। चार चमकदार तारों द्वारा बन रहे एक बड़े आयत के अन्दर तीन सितारे एक ही पंक्ति में हैं। यह कालपुरुष मण्डल (Orion - the hunter) या मृगशीर्ष है। इसकी कल्पना एक शिकारी के रूप में की गई है। इस मण्डल की मदद से अन्य तारों व तारामण्डलों को ढूंढ़ा जा सकता है। कालपुरुष की कमर पर तीन तारे एक ही पंक्ति में है। इसी पंक्ति को आगे, नीचे बढ़ाने पर आसमान का सबसे चमकदार तारा लुब्धक मिल जायेगा। यह हमसे लगभग 8.7 प्रकाश वर्ष दूर है। लुब्धक के आसपास धुँधले तारों को मिलाकर बृहल्लुब्धक तारामण्डल की रचना होती है। दरअसल, तारामण्डल आसमान का एक निश्चित सीमांकित भाग होता है। पूरे आसमान को 88 भागों या तारामण्डलों में बाँटा गया है। हर एक भाग में किसी ना किसी आकृति की कल्पना की गई है। उसी आकृति के आधार पर उस तारामण्डल का नाम पड़ गया। जैसे, बृहल्लुब्धक है एक 'शिकारी कुत्ता'।

कालपुरुष के पश्चिम में है वृषभ राशि। इसमें लाल रंग का तारा है रोहिणी। लाल रंग के तारे वास्तब में बहुत बड़े होते हैं। ऐसा ही एक तारा कालपुरुष के कंधे पर है - आर्द्रा। आर्द्रा हमारे सूर्य से लाखों गुना बड़ा है। रोहिणी के पश्चिम में तारों का एक रोचक गुच्छा है - कृत्तिका नक्षत्र। कृत्तिका युवा तारों का एक सुन्दर समुह है। इसके बारे में लगभग हर प्राचीन सभ्यता में कई मिथक प्रचलित हैं। दरअसल, यहाँ 1000 तारे हैं और इनके इर्द-गिर्द ग्रह-उपग्रहों के पनपने की संभावना जताई जा रही है। आसमान का यह इलाका चमकदार मण्डलों से भरा पड़ा है। मानचित्र की मदद से इन्हें ढूढ़ने का प्रयास किया जा सकता है।

सूर्य 22 दिसम्बर को उत्तरायण होगा। इस दिन उत्तरी गोलार्ध में दोपहर 12 बजे दक्षिणी क्षितिज से सूर्य की ऊँचाई निम्नतम होगी। फलतः सबसे छोटा दिन व सबसे लम्बी रात। दक्षिणी गोलार्ध में इसका उल्टा होगा। दिसम्बर में सूर्य वृश्चिक से निकल धनु राशि में प्रवेश करता है। सूर्योदय व सूर्यास्त का समय निम्न प्रकार है।

उदय अस्त
03 दिसम्बर 6:59 5:32
15 दिसम्बर 7:06 5:35
30 दिसम्बर 7:14 5:42

प्रस्तुत मानचित्र 1 दिसम्बर को रात्रि 10:30 बजे, 15 दिसम्बर रात्रि 09:30 बजे व 30 दिसम्बर को रात्रि 08:30 बजे की जयपुर शहर से आकाशीय स्थिति दर्शाता है।

A beautiful partial solar eclipse will be visible on the afternoon of October 25, 2022, a little before sunset. The ecli...
11/10/2022

A beautiful partial solar eclipse will be visible on the afternoon of October 25, 2022, a little before sunset. The eclipsed sun will set at 5:50 pm, just after its maximum phase.

Which upcoming lunar and solar eclipses are visible in Jaipur, Rajasthan, India and what do they look like?

जयपुर शहर से माह अक्टूबर - 2022 की आकाशीय स्थिति ऊपर आसमान में अनवरत कुछ ना कुछ बदलाव चलता रहता है। ईसमें विशेष योगदान ह...
30/09/2022

जयपुर शहर से माह अक्टूबर - 2022 की आकाशीय स्थिति

ऊपर आसमान में अनवरत कुछ ना कुछ बदलाव चलता रहता है। ईसमें विशेष योगदान है हमारे सौरमण्डल के सदस्यों का। हमारी कोरी, स्वस्थ आँखें झिलमिलाते-टिमटिमाते तारों के बीच पाँच प्रमुख ग्रहों को पहचान लेती हैं। इस माह शुक्र को छोढ़ बाकी चार ग्रहों को देखने-पहचानने का अवसर है। तारों के बीच ग्रहों की अपनी एक अलग ही छाप है। एक छोटी दूरवीन या बानोक्युलर से आप देखें -दिखायें और इस कोशिश को आगे बढ़ायें।

सूर्य का नजदीकी चंचल बुध सुबह-सवेरे पूर्वी क्षितिज पर है। बुध 2 से सीधी चाल में, 8 को क्षितिज से अधिकतम ऊँचाई पर और 24 अक्टूबर से सूर्य की प्रभा में होगा। माह के प्रथमार्द्ध में छोटे बुध को सूर्योदय से पहले पूर्वी क्षितिज के लगभग 15 डिग्री ऊपर पहचानने की कोशिश कीजिए, शायद सफलता मिल जायेगी।

सबसे चमकदार ग्रह शुक्र पूरे माह सूर्य की प्रभा में है। यह नजर नहीं आयेगा।
महारथी मंगल आधी रात से भी पहले पूर्वी क्षितिज पर गुलाबी रंगत में है। 30 अक्टूबर से लाल मंगल वक्र गति में होगा। भोर तक यह पश्चिमी क्षितिज पर पहुँच जायेगा। वृषभ से मिथुन तक गतिमान मंगल की लालिमा धीरे-धीरे बढ़ रही है। आप इसे माह के शुरू और अन्त में ढूढ़िये, आपको चमक में अन्तर नजर आ जायेगा।

संध्याकाश में शासन चल रहा है ग्रहराज बृहस्पति का। अंधेरा घिरते ही देवगुरु पूर्वी क्षतिज पर दिख जायेगा। वक्री बृहस्पति पुरी रात, पुरे माह सफेद उज्ज्वल आभा में सभी को आकर्षित कर रहा है। एक छोटी दूरबीन से इसके चार चन्द्रमा भी दिख जाते हैं। अभी ठीक समय है इसे पकड़ने का।

सबसे सुन्दर ग्रह, वलयधारी शनि, 23 अक्टूबर से सीधी चाल में लौट रहा है। तारों की झिलमिलाहट शुरु होते ही इसे पूर्वी क्षितिज पर लगभग 25 डिग्री उपर पकड़ जा सकता है। यह मकर राशि के धुंधले तारों के बीच एक सफेद पीले चमकदार तारे जैसा नजर आ रहा है।

चन्द्रमा 5 को शनि, 8 को बृहस्पति व 15 अक्टूबर को मंगल ग्रह के आसपास रहेगा। इस विधि से भी ग्रहों को पहचानकर उन पर महीनों नजर रखी जा सकती है।

सर्दियों के अंधेरी लम्बी रातों में रात्रि आसमान का रूतबा देखने लायक होता है। शहर से दूर किसी छोटे गाँव से तारों की छाँव में रात बीतते देर नहीं लगती। संध्याकाश में पूर्वी क्षितिज पर कुछ एेसे तारामण्डल हैं, जिन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है। बस थोड़ा इशारा जरुरी है। लाल रंगत में रोहिणी नक्षत्र वृषभ राशि का सबसे चमकदार तारा है। यहाँ झिलमिलाते तारे अंग्रजी अक्षर 'वी' की आकृति बनाते हैं। यह है - बैल का चेहरा। वृषभ राशि में पश्चिम की और तारों का एक गुच्छा सा दिखता है - कृत्तिका नक्षत्र। कोरी आँखों से यहाँ 6-7 तारे नजर आते हैं - एकदम सटे-सटे। आम बोलचाल में इन्हे सतबहिनें (Seven Sisters) भी कहा जाता है। दरअसल यह 1000 तारों का एक युवा समूह है और साथ ही साथ यहाँ ग्रह-उपग्रह के पनपने की सम्भावना भी जताई जाती है। काश्यपी व सारथी तारामण्डल के बीच ययाति (Perseus) तारमण्डल है। ययाति तारामण्डल में अनेकों तारापुंज बिखरे पड़े हैं। इसमें एक प्रसिद्ध दोहरा तारापुंज है - एन.जी.सी-869 एवं एन.जी.सी-884, जिसे 'एच एंड काइ परसि' (H & Chi Persei) भी कहते हैं। मानचित्र में एेसे भी कई प्रकाश पुंजों को वर्गाकृति दर्शाया गया है। कोरी आँखों से मुश्किल नजर आने वाले इन पुंजों को आसमान स्वच्छ होने पर एक छिटी दूरबीन या बाइनोक्युलर से देखने का प्रयास कीजिए।

मध्याकाश में मौजुद है - महाश्व तारामण्डल। महाश्व व काश्यपि की मदद से आप प्रसिद्ध मंदाकिनी देवयानी (Andromeda Galaxy) का दर्शन कर सकते हैं। दरअसल, हंसमण्डल, ययाति व सारथी तारामण्डलों के आस-पास अनेकों तारापुंज भरे पड़े हैं। दक्षिणी आसमान में चमकदार मीनास्य दमक रहा है। यह कुम्भ राशि के नीचे, यानि दक्षिण में है। पश्चिम से पुर्व में मकर, कुम्भ, मीन व मेष राशि के तारे नजर आ रहे हैं। इन राशियों में एक भी चमकदार तारा नहीं है। 'ग्रीष्म त्रिकोण' के तारे पश्चिमी क्षितिज पर अभी भी नजर आ रहे हैं।

सूर्य अक्टूबर में कन्या से निकल तुला राशि में प्रवेश करता है। सूर्योंदय व सूर्यास्त का समय निम्न प्रकार है।

उदय अस्त
01 अक्टूबर 06:19 06:12
16 अक्टूबर 06:25 05:58
31 अक्टूबर 06:35 05:43

प्रस्तुत मानचित्र 1 अक्टूबर को रात्रि 10:30 बजे, 15 अक्टूबर को रात्रि 09:30 बजे व 30 अक्टूबर को रात्रि 08:30 बजे की जयपुर शहर से आकाशीय स्थिति दर्शाता है।

आंशिक सूर्यग्रहण - 25 अक्टूबर, मंगलवार अमावस्या के दिन आंशिक सूर्यग्रहण का खगोलीय संयोग बन रहा है। कुछ क्षेत्र को छोड़कर लगभग पूरे भारत भूमि से यह ग्रहण नजर आयेगा। जयपुर में ग्रहण दोपहर बाद 04 बजकर 32 मिनट से शुरु होगा और 05 बजकर 32 पर अधिकतम 40 प्रतिशत सूर्य कटा हुया दिखाई देगा। 5 बजकर 50 मिनट पर ग्रहण लगा सूर्य पश्चिम में अस्त हो जायेगा। पृथ्वी व सूर्य के बीच चन्द्रमा के आ जाने से सूर्यग्रहण घटित होता है। ग्रहण समाप्ति 6 बजकर 32 मिनट पर है।

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