इतिहास को जानो /By Ajay Verma

इतिहास को जानो /By Ajay Verma History is written by the winners

पर्यटक बनकर जाओगे तो सिर्फ पत्थर दिखेंगे, वारिस बनकर देखोगे तो हर पत्थर में बलिदान और गौरव दिखेगा। यह हमारे गौरवशाली इति...
30/12/2025

पर्यटक बनकर जाओगे तो सिर्फ पत्थर दिखेंगे, वारिस बनकर देखोगे तो हर पत्थर में बलिदान और गौरव दिखेगा। यह हमारे गौरवशाली इतिहास की नींव है, इसे सम्मान और संरक्षण देना हम सबकी जिम्मेदारी है।

चंबल की महिला डाकू मुन्नी बाई 1982 में ग्वालियर में सरेंडर करते हुई
27/10/2025

चंबल की महिला डाकू मुन्नी बाई 1982 में ग्वालियर में सरेंडर करते हुई

इन्द्रसाल सिंह जी हाड़ा द्वारा बनवाया गया इंद्रगढ़ दुर्ग, कभी इन महलों में हाड़ा वीरों व वीरांगनाओं का जमघट हुआ करता था पर ...
19/01/2025

इन्द्रसाल सिंह जी हाड़ा द्वारा बनवाया गया इंद्रगढ़ दुर्ग, कभी इन महलों में हाड़ा वीरों व वीरांगनाओं का जमघट हुआ करता था पर आज वीरान व जर्जर हैं (जिला बूंदी - राजस्थान)

रानी दुर्गावती एक भारतीय वीरांगना थीं, जिन्होंने 16वीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य के विस्तार का विरोध किया। वह गढ़ा राज्...
09/01/2025

रानी दुर्गावती एक भारतीय वीरांगना थीं, जिन्होंने 16वीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य के विस्तार का विरोध किया। वह गढ़ा राज्य की शासक थीं, जो वर्तमान मध्य प्रदेश के जबलपुर और शहडोल जिलों में स्थित था।

रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर 1524 को कालिंजर के किले में हुआ था। उनके पिता कीर्तिसिंह चंदेल, महोबा के राजपूत राजा थे। उनकी मां का नाम जयवंती देवी था। रानी दुर्गावती बचपन से ही साहसी और पराक्रमी थीं। उन्होंने घोड़े की सवारी, तलवारबाजी और युद्ध कौशल का प्रशिक्षण लिया।

1542 में, रानी दुर्गावती का विवाह गढ़ा राज्य के राजा दलपत शाह से हुआ। दलपत शाह की मृत्यु के बाद, रानी दुर्गावती गढ़ा राज्य की शासक बनीं।

रानी दुर्गावती एक कुशल शासक थीं। उन्होंने अपने राज्य को मजबूत बनाने के लिए कई सुधार किए। उन्होंने अपने राज्य में शिक्षा और संस्कृति को बढ़ावा दिया। उन्होंने अपने राज्य में महिलाओं के अधिकारों के लिए भी काम किया।

मुगल बादशाह अकबर ने रानी दुर्गावती के राज्य पर आक्रमण किया। रानी दुर्गावती ने अकबर की सेना का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने कई युद्धों में अकबर की सेना को पराजित किया।

अंत में, 24 जून 1564 को, रानी दुर्गावती ने अकबर की सेना के सामने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया। उन्होंने अपनी तलवार से खुद को मार डाला।

रानी दुर्गावती की वीरता और बलिदान को आज भी याद किया जाता है। उन्हें भारत की महानतम वीरांगनाओं में से एक माना जाता है।
#इतिहासनामा #इतिहासप्रेमी #इतिहास

Post bye Ajay verma

एक  वार  ब्राह्मण के  घर  की  स्त्री  स्नान  कर  रही  थी. तभी  संयोग  से  वहां  से  ब्राह्मण  कुल  शिरोमणि  वाजीराव  पेश...
06/01/2025

एक वार ब्राह्मण के घर की स्त्री स्नान कर रही थी. तभी संयोग से वहां से ब्राह्मण कुल शिरोमणि वाजीराव पेशवा की सवारी निकल रही थी. हाथी पर बेठे महाराज वाजीराव पेशवा को घर के अंदर आँगन मै स्नान कर रही स्त्री का चेहरा गर्दन तक दिख गया संयोग से ब्राह्मण स्त्री की नजर भी पेशवा जी से टकरा गयी . महाराज वाजीराव पेशवा जी तत्काल हाथी से नीचे उतर पैदल चलने लगे.. साथ चल रहे उनके अंग रक्षक ने हिम्मत जुटा कारण पूछा तो पेशवा जी वोले अनजाने मैने एक ब्राह्मण स्त्री की हत्या कर दी.. आज के वाद हाथी की सवारी नहीं करुँगा घोड़े की सवारी करुँगाऔर वास्तव मै थोड़ी देर वाद खवर मिली की उस ब्राह्मण स्त्री ने लज्जावस प्राण त्याग दिए... मेरे भैया बहिनों ऐसा रहा ब्राह्मणों का मर्यादित गरिमामय जीवन इतिहास..
अतः आप लोग भले ही आधुनिक रहें लेकिन पूर्वजों की अर्जित की हुई महानता को याद रखें. ब्राह्मण ऐसे ही पूज्य नहीं हुए हमारे पूर्वजों का त्याग तपस्या. त्रिकाल संध्या सहित जीवन सदैव पवित्रता पूर्ण मर्यादित गरिमामय रहा सदैव ब्राह्मण धर्म का पालन करें।



Post by Ajay verma

सोने की खोज हुए 4000 साल ही हुए हैं तो फिर 7000 साल पहले सोने की लंका कहाँ से आई?यह सवाल आपने बहुत लोगों से सुना होगा.हम...
18/12/2024

सोने की खोज हुए 4000 साल ही हुए हैं तो फिर 7000 साल पहले सोने की लंका कहाँ से आई?यह सवाल आपने बहुत लोगों से सुना होगा.हम इसे ऐसे समझते हैं जैसे कि जितने भी मापन विधि हमने बनाये है चीजों को मापने एवं आकलन करने के लिए वे सभी उन्ही बस्तुओं का सत्यापन कर रही है जो आज के समय मे उनकी उपयोगिता को जान एवं प्राप्त कर लिया है। 40 हज़ार वर्ष पूर्व पालेओलथिक गुफा में जो कि खजकिस्तान एवं मंगोलिया के मध्य रशिया में है वहां सोने के मानव निर्मित अंश प्राप्त हुए है, अब समझने वाली बात यह यह है कि जितने भी धातु धरती पे खोजे गए है 300-500 एवं हज़ार वर्ष पहले वे सभी धरती में पृथ्वी के बनने के समय से ही मौजूद थे, हमने बस उसकी उयोगिता को जाना है, उपयोग में लाया है खोज करने का अर्थ यह न ले कि इंसान ने उसको बनाया है तथा उसके उपयोगिता जानने से पहले ही वह धातु पृथ्वी पर मौजूद थी.उदाहरण के लिए गैलेलियो ने 15वी सताब्दी में नव ग्रहों के बारे में यूरोप को अवगत कराया , लेकिन नव ग्रह उनके जानने से पहले भी थे।और भारतीय खगोलशास्त्र वाले इन ग्रहों से पहले ही परिचित थे.. अर्थात यह समझें बिज्ञान नया नहीं है यह उसका पुनर्जागरण काल हैं....हर सभ्यताओं की शुरुआत में इसको उपयोगिता में लाया जाता है और अंत में अनुपयोगी हो जाती है जब सभ्यताओं का अंत हो जाता है..
#तिब्बत
Post by Ajay verma

क्या दिन रहे होंगे वे ।  दुर्ग के बाहर सैनिक टाइगर के साथ दुर्ग के द्वार पर खड़े है।💯🔥Post by Ajay verma
08/12/2024

क्या दिन रहे होंगे वे । दुर्ग के बाहर सैनिक टाइगर के साथ दुर्ग के द्वार पर खड़े है।💯🔥
Post by Ajay verma

यह पुस्तकालय  #साक्य  #मठ,  #तिब्बत में पाया गया था,जिसमें 84,000 गुप्त हस्तलिखित हैं,जिसमें 1000 से अधिक वर्षों तक मानव...
04/12/2024

यह पुस्तकालय #साक्य #मठ, #तिब्बत में पाया गया था,
जिसमें 84,000 गुप्त हस्तलिखित हैं,
जिसमें 1000 से अधिक वर्षों तक मानव जाति का इतिहास भी शामिल है।
यह एक विशाल दीवार के पीछे खोजा गया था। यह 60 मीटर लंबा और 10 मीटर ऊँचा है।... ✍️
Post by Ajay verma

उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर के एक गांव में खेत की जुताई के दौरान मिली तलवारें, जो 18वीं सदी की बताई जा रही हैं
15/11/2024

उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर के एक गांव में खेत की जुताई के दौरान मिली तलवारें, जो 18वीं सदी की बताई जा रही हैं

Mosam ❤️
07/11/2024

Mosam ❤️

जब पानी को स्टोर करके रखना शुरू नहीं हुआ था तब सेना में एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्यक्ति हुआ करता था - "भिश्ती"।भिश्ती याने...
05/11/2024

जब पानी को स्टोर करके रखना शुरू नहीं हुआ था तब सेना में एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्यक्ति हुआ करता था - "भिश्ती"।
भिश्ती याने पानी ले जाने वाला।

भिश्ती एक पेशा ही नहीं, कालांतर में एक जाति हो गई थी। ये मुस्लिम जाति थी क्योंकि भिश्ती का इतिहास शुरू होता है कर्बला की लड़ाई से, जिसमें सबसे पहले भिश्ती "हज़रत अब्बास" ने "इमाम हुसैन" के लिए पानी ले जाते हुए अपनी जान दे दी थी। बग़दाद सल्तनत के पतन के बाद बहुत से भिश्ती परिवार भारत आ गए। कुछ लोग दूसरे काम करने लगे और कुछ मुग़ल सेना में भिश्ती का काम ही करने लगे। आगे चल कर अँग्रेजी सेना में भी ये यही काम करते थे। आपको याद हो तो फ़िल्म "1942 अ लव स्टोरी" में अंत में जैकी श्रोफ एक भिश्ती से उसकी मशक लेकर सड़क पर पानी डालते हैं। भिश्ती जिसमें पानी भर कर अपने कंधे पर लेकर चलते थे उसे मशक कहते थे। इस मशक में करीब 30-35 लीटर पानी होता था।
सेना के अलावा ये भिश्ती मुसाफिरों को पानी पिलाने का काम भी करते थे।

समय के साथ ये पेशा ख़त्म हो गया। अब ये जनजाति दूसरों के साथ घुल-मिल गई हैं। ये अपने नाम के साथ अमूमन अब्बासी लगाते हैं।
ये तस्वीर 1880 की असल तस्वीर है जिसमें तीन भिश्ती नज़र आ रहे हैं।

Post by Ajay verma

दिल्ली अभी भी दूर हैलाहौर के लक्ष्मी चौक पर इतिहास के पन्नों में दफन होता हुआ एक मील का पत्थर।
03/11/2024

दिल्ली अभी भी दूर है
लाहौर के लक्ष्मी चौक पर
इतिहास के पन्नों में दफन होता हुआ
एक मील का पत्थर।

Address

Jaipur

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when इतिहास को जानो /By Ajay Verma posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category