16/06/2026
ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 82 मंत्र 1-2*
`कविर्मनीषी परिभूः स्वयम्भूर्याथातथ्यतो अर्थान्व्यदधाच्छाश्वतीभ्यः समाभ्यः`
*अर्थ*: वो परमात्मा *कविर्देव* यानी *कबीर परमेश्वर* है। जो स्वयं प्रकट होता है और यथार्थ ज्ञान देता है। सच्चे नाम की भक्ति से पिछले पाप कर्म कट जाते हैं।
*2. यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32*
`कविरंघारिरसि बम्भारिरसि`
*अर्थ*: वो *कविर्देव पापों का नाश करने वाला* है। सच्ची भक्ति विधि से वो साधक के संचित कर्मों को भी समाप्त कर देता है।
*संत रामपाल जी का तर्क*:
वो कहते हैं कि *शास्त्रविधि त्यागकर मनमाना आचरण यानी कर्मकांड* से मुक्ति नहीं होती *गीता 16:23*। लेकिन जब *तत्वदर्शी सन्त से नाम लेकर *पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब* की भक्ति करो तो वो *पाप कर्मों को नष्ट कर देते हैं*।