30/09/2025
श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः!
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा ||
या देवी सर्वभतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
नवरात्रि की अष्टमी तिथि को मां महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। मां महागौरी का वाहन बैल और उनका शस्त्र त्रिशूल है। मान्यता है कि मां महागौरी की पूजा करने से मनवांछित फल मिलता है। मां का यह स्वरूप भक्तों को अभय, रूप व सौंदर्य प्रदान करता है।
भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए देवी ने कठोर तपस्या की थी जिससे इनका शरीर काला पड़ जाता है। देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान इन्हें स्वीकार करते हैं और शिव जी इनके शरीर को गंगा-जल से धोते हैं तब देवी विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान गौर वर्ण की हो जाती हैं तथा तभी से इनका नाम गौरी पड़ा। महागौरी रूप में देवी करूणामयी, स्नेहमयी, शांत और मृदुल दिखती हैं।🙏🚩🌹🚩🙏
🚩🙏 जय माता दी 🚩 🙏
महारानी माँ गौरी की कृपा सदैव आप सभी सनातनियों पर बनी रहे 🙏
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