विजय कुमार टाँक जवाहरा

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विजय कुमार टाँक जवाहरा Educational purposes only. Page is for History related Books, Political Science Books and Daily Newspaper purpose.

20/12/2025

समाज जितना सत्य से दूर होता जाएगा। सच बोलने वालों से उतना ही नफ़रत करता जाएगा।

जॉर्ज ऑरवेल

4500 वर्ष प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता की सीढ़ियां जो अब तक जस की तस हैं - धोलावीरा (भचाऊ - कच्छ, गुजरात)
10/12/2024

4500 वर्ष प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता की सीढ़ियां जो अब तक जस की तस हैं - धोलावीरा (भचाऊ - कच्छ, गुजरात)

अशोक के समय का व्हाट्सएप ( तब डबल टिक नहीं चलता था)
04/12/2024

अशोक के समय का व्हाट्सएप

( तब डबल टिक नहीं चलता था)

दिल्ली सन 1902 में कश्मीरी गेट ऐसा था
26/11/2024

दिल्ली सन 1902 में कश्मीरी गेट ऐसा था

यह हृदय विदारक दृश्य सन 1877 के  अकाल का है , जिसमें 3000 लोग मद्रास में अनाज मिलने का इंतजार कर रहे हैं ✍️
23/11/2024

यह हृदय विदारक दृश्य सन 1877 के अकाल का है , जिसमें 3000 लोग मद्रास में अनाज मिलने का इंतजार कर रहे हैं ✍️

मोहनजोदड़ो में 4500 वर्ष पुरानी सभ्यता का कुआं (वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित)
23/11/2024

मोहनजोदड़ो में 4500 वर्ष पुरानी सभ्यता का कुआं (वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित)

जानकारी का अभाव मनुष्य को दिग्भ्रमित करने के लिए पूरी तरह बाध्य करता है,अरबों वर्षों के निरंतर क्रमिक विकास से इस धरती प...
13/11/2024

जानकारी का अभाव मनुष्य को दिग्भ्रमित करने के लिए पूरी तरह बाध्य करता है,अरबों वर्षों के निरंतर क्रमिक विकास से इस धरती पर जीवों का क्रमिक विकास हुआ है,बुद्धि का विकास हुए अभी ढाई हजार साल से ज्यादा नहीं हुए हैं,और विज्ञान का विकास हुए हजार साल भी नहीं हुए,लेकिन पिछले मात्र 700 वर्षों में ही विज्ञान और वैज्ञानिकों नें धरती आकाश के तमाम रहस्यों पर से पर्दा हटाने में तमाम सफलता प्राप्त की है,पर जो विज्ञान के बिना आज भी नंगे हैं,उन्होंने कल्पनाओं में धरती को फूँक मारकर उत्पन्न करवा दिया,और क्षण भर में जीव जंतु,कीड़े मकोड़े,पशु पक्षी,पेंड़ पौधे और मनुष्य को बनाकर रख दिया,कोरी गप्प कल्पनाओं में जितना कोरा गप्प निर्माण है,उतनी ही बिना सिरपैर की कोरी गप्प हकीकत भी है,मानना आसान है जानना बहुत कठिन है इसलिए मानने वालों की संख्या बहुत ज्यादा हो गयी,जानने वाले कम हुए,यही कारण है दुनिया मे वैज्ञानिक कम बाबा ज्यादा पैदा हो गए,सच जानने का मौका मिला है जरूर जानिए अन्यथा कल्पनाओं के विमान आज तक ढूंढे नहीं मिले भले ही डायनासोर के जीवाश्म मिल गए हों,यह अत्याधुनिक वैज्ञानिक इक्कीसवीं सदी है,मानने से पहले जानिए जरूर क्योंकि जानने का आपको मौका मिला है-
....." जनता "

(1) अल्बर्ट  #आइंस्टीन की पत्नी अक्सर उन्हें सलाह देती थीं कि वह काम पर जाते समय अधिक प्रोफेशनल तरीके से कपड़े पहनें। आइ...
13/11/2024

(1) अल्बर्ट #आइंस्टीन की पत्नी अक्सर उन्हें सलाह देती थीं कि वह काम पर जाते समय अधिक प्रोफेशनल तरीके से कपड़े पहनें। आइंस्टीन हमेशा कहते, "क्यों पहनूं? वहाँ सब मुझे जानते हैं।" लेकिन जब उन्हें पहली बार एक बड़े सम्मेलन में जाना था, तो उनकी पत्नी ने उनसे थोड़ा सज-धजकर जाने का अनुरोध किया। इस पर आइंस्टीन बोले, "क्यों पहनूं? वहाँ तो मुझे कोई नहीं जानता!"

(3) आइंस्टीन से अक्सर सापेक्षता के सिद्धांत को समझाने के लिए कहा जाता था। एक बार उन्होंने समझाया, "अपना हाथ एक गर्म चूल्हे पर एक मिनट के लिए रखो, तो वह एक घंटे जैसा महसूस होगा। एक खूबसूरत लड़की के साथ एक घंटे बैठो, तो वह एक मिनट जैसा लगेगा। यही है सापेक्षता!"

(4) जब अल्बर्ट आइंस्टीन प्रिंसटन विश्वविद्यालय में काम कर रहे थे, तो एक दिन घर जाते समय उन्हें अपना घर का पता भूल गया। टैक्सी ड्राइवर ने उन्हें पहचाना नहीं। आइंस्टीन ने ड्राइवर से पूछा कि क्या वह आइंस्टीन का घर जानता है। ड्राइवर ने कहा, "आइंस्टीन का पता कौन नहीं जानता? प्रिंसटन में हर कोई जानता है। क्या आप उनसे मिलना चाहते हैं?" आइंस्टीन ने उत्तर दिया, "मैं ही आइंस्टीन हूं। मैं अपना घर का पता भूल गया हूँ, क्या आप मुझे वहाँ पहुँचा सकते हैं?" ड्राइवर ने उन्हें उनके घर पहुँचा दिया और उनसे किराया भी नहीं लिया।

(5) एक बार आइंस्टीन प्रिंसटन से ट्रेन में यात्रा कर रहे थे। जब टिकट चेक करने वाला कंडक्टर उनके पास आया, तो आइंस्टीन ने अपनी जैकेट की जेब में हाथ डाला, लेकिन टिकट नहीं मिला। फिर उन्होंने अपनी पैंट की जेबें देखीं, लेकिन वहाँ भी नहीं था। इसके बाद उन्होंने अपने ब्रीफकेस में देखा, लेकिन टिकट नहीं मिला। फिर उन्होंने अपनी सीट के पास देखा, लेकिन फिर भी टिकट नहीं मिला।

कंडक्टर ने कहा, "डॉ. आइंस्टीन, हम जानते हैं कि आप कौन हैं। मुझे यकीन है कि आपने टिकट खरीदा है। चिंता मत कीजिए।" आइंस्टीन ने प्रशंसा में सिर हिला दिया। कंडक्टर आगे बढ़ गया। जब उसने दूसरी तरफ देखा, तो उसने देखा कि महान वैज्ञानिक नीचे झुककर सीट के नीचे टिकट खोज रहे थे।

कंडक्टर तुरंत लौट आया और कहा, "डॉ. आइंस्टीन, चिंता मत कीजिए। मैं जानता हूँ कि आप कौन हैं। आपको टिकट की आवश्यकता नहीं है। मुझे यकीन है कि आपने टिकट खरीदा है।" आइंस्टीन ने जवाब दिया, "युवा आदमी, मैं भी जानता हूँ कि मैं कौन हूँ। पर मैं ये नहीं जानता कि मैं कहाँ जा रहा हूँ।"

(6) जब आइंस्टीन की मुलाकात चार्ली चैपलिन से हुई:

#आइंस्टीन ने कहा,
"आपकी कला में जो मुझे सबसे अधिक प्रभावित करता है, वह उसकी सार्वभौमिकता है। आप एक शब्द नहीं कहते, फिर भी दुनिया आपको समझती है।"

इस पर चार्ली चैपलिन ने उत्तर दिया,
"यह सच है, लेकिन आपकी प्रसिद्धि तो इससे भी बड़ी है। दुनिया आपकी प्रशंसा करती है, जबकि कोई आपको समझता नहीं।"
संकलन : केवी सर
साभार :सोशल मीडिया

भारत में सबसे चौड़ी नदी ब्रह्मपुत्र है। इसकी औसत चौड़ाई 5.46 किलोमीटर है। लेकिन कुछ जगहों पर यह 10 किलोमीटर तक चौड़ी हो ...
31/10/2024

भारत में सबसे चौड़ी नदी ब्रह्मपुत्र है। इसकी औसत चौड़ाई 5.46 किलोमीटर है। लेकिन कुछ जगहों पर यह 10 किलोमीटर तक चौड़ी हो जाती है। ब्रह्मपुत्र नदी, भारत के साथ-साथ एशिया की भी सबसे चौड़ी नदी है। यह नदी हिमालय की कैलाश पर्वतमाला से निकलती है और तिब्बत से बहकर अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है। यह नदी असम और बांग्लादेश से होकर बहती है और बंगाल की खाड़ी में मिलती है।

ब्रह्मपुत्र नदी के बारे में कुछ और खास बातें:

ब्रह्मपुत्र नदी की लंबाई 2,900 किलोमीटर है.

ब्रह्मपुत्र नदी की गहराई 124 फ़ुट है और इसकी अधिकतम गहराई 380 फ़ुट है।

ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे ल्हासा, ढाका, गुवाहाटी, और डिब्रूगढ़ जैसे प्रमुख शहर हैं।

ब्रह्मपुत्र नदी की सहायक नदियां हैं - दिबांग, लोहित, सियांग, बूढ़ी दिहिंग, तिस्ता, और धनसारी..✍️

तीसरा हिमयुग-पृथ्वी पर तीसरा हिमयुग आज से लगभग 2 लाख वर्ष पूर्व आरंभ हुआ था। तीसरे हिम युग में पहले हिमयुग से अधिक और दू...
31/10/2024

तीसरा हिमयुग-
पृथ्वी पर तीसरा हिमयुग आज से लगभग 2 लाख वर्ष पूर्व आरंभ हुआ था। तीसरे हिम युग में पहले हिमयुग से अधिक और दूसरे से कम बर्फ कम समय तक पड़ी थी। आग को प्रयोग करने और खालों के वस्त्र बनाने के कारण, हिमयुग अपूर्ण मानव को अधिक नहीं सता पाया। रोंयेदार खालों के चोंगे पहनकर, वह ठण्ड में काम कर सकता था और अग्नि कुण्ड द्वारा सामूहिक रूप में आग का इस्तेमाल करता था।
कुछ पूर्ण मानव कालांतर में जो सफल संकरण अपूर्ण मानव की संतानों में हुए। उन संकरणों के फलस्वरूप 2 प्रकार के कुछ पूर्ण मानव विकसित हुए। आज से लगभग एक लाख वर्ष पूर्व संकरित, इनमें से कुछ पूर्ण मानव के अवशेष अफ्रीका, यूरोप और एशिया के अनेक स्थानों की खुदाई में सुरक्षित मिले हैं। उस समय तीसरा हिमयुग समाप्त हो गया था। उत्तरी गोलार्ध का जलवायु फिर से गरम हो गया था और गरम जलवायु के चौपाए पूरे यूरोप में रहने लगे थे। तीसरे और चौथे हिमयुग के बीच गरम जलवायु लगभग 1.25 लाख वर्षों तक रहा है। इस लंबे समय में कुछ पूर्ण मानव की संतान ने बहुत विकास किया था। उनकी एक नस्ल को विज्ञान में नियंडरथल (Neanderthal) मानव कहा जाता है। इसके 70 हजार वर्ष पुराने अवशेष उत्तरी अफ्रीका, यूरोप तथा उत्तरी एशिया में सुरक्षित पाए गए हैं।
उक्त पूर्ण से मानव ने,अपनी एक काम चलाऊ सभ्यता को जन्म दिया। इससे पूर्व मुर्दों को ऐसे ही छोड़कर कबीला चला जाता था। परंतु उन लोगों ने अपने मुर्दों को जमीन में गाड़ना आरंभ कर दिया। इसका मस्तिष्क कुछ और बढ़ गया था तथा अधिक जटिल हो गया था। इसके शरीर के बाल कुछ छोटे और कुछ कम होकर वर्तमान मानव की भांति, रोंये में बदल गए थे। मुंह के ऊपर भी बालों की संख्या कम हो गई थी। परंतु सिर पर अभी भी वनमानुष जैसे ही बाल थे, इसकी गर्दन भी छोटी और खोपड़ी अभी भी चपटी थी। माथा भी अभी छोटा था। ठुड्डी भी नाममात्र की ही थी, मस्तिष्क का आकार, एक हजार घन सेंटीमीटर से कुछ अधिक था। वह कड़े पत्थरों से सुंदर यंत्र बनाना सीख गया था। संगठित समूह के रूप में आहार एकत्रित करता था। मुर्दा कब्र में दबाते समय वह थोड़ा मांस आदि आहार,उसके साथ दफनाता था, उन कब्रों को वह बड़े पत्थरों से ढंकता था। इन पत्थर से ढकी कब्रों के कारण ही बड़ी संख्या में इनके अवशेष मिले हैं-
...." जनता "

चेन से बंधे लोग ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी हैं। खड़ा हुआ व्यक्ति ब्रिटिश अधिकारी। तस्वीर बीसवीं सदी के पहले दशक की है। दु...
30/10/2024

चेन से बंधे लोग ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी हैं। खड़ा हुआ व्यक्ति ब्रिटिश अधिकारी। तस्वीर बीसवीं सदी के पहले दशक की है।

दुनिया को सभ्यता सिखाने का दावा करने वाले यूरोप की क्रूरता के क़िस्से ऑस्ट्रेलिया से अफ़्रीका और भारत तक बिखरे हैं।

इन इलाक़ों की लूट से जगमगाता है यूरोप…

काली मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ प्रचुर मात्रा में होते हैं और इसे दुनिया भर में सबसे उपजाऊ मिट्टी में से एक माना जाता है...
28/10/2024

काली मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ प्रचुर मात्रा में होते हैं और इसे दुनिया भर में सबसे उपजाऊ मिट्टी में से एक माना जाता है, जो विभिन्न फसलों के लिए अनुकूल है। मुख्य रूप से भारत में पाई जाने वाली यह मिट्टी कपास, सोयाबीन और दालों की खेती के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है।

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