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 # # **मोहम्मद साबिर अब्बासी बने भिश्ती समाज एकता मंच की संरक्षक समिति के अध्यक्ष****जयपुर।** भिश्ती समाज एकता मंच जयपुर...
25/08/2026

# # **मोहम्मद साबिर अब्बासी बने भिश्ती समाज एकता मंच की संरक्षक समिति के अध्यक्ष**

**जयपुर।** भिश्ती समाज एकता मंच जयपुर की संरक्षक समिति में **जनाब मोहम्मद साबिर अब्बासी** को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति पर समाज के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

**जनाब मोहम्मद साबिर अब्बासी भिश्ती समाज एकता मंच के फाउंडर मेंबर हैं तथा मंच के गठन में उनकी महत्वपूर्ण एवं अहम भूमिका रही है।** संगठन की स्थापना के प्रारंभिक दौर से ही उन्होंने समाज को एकजुट करने, संगठन को मजबूत बनाने तथा समाजहित के विभिन्न कार्यों में सक्रिय योगदान दिया है।

उनकी **संगठनात्मक क्षमता, समाज के प्रति समर्पण, सक्रियता एवं अनुभव** को देखते हुए उन्हें भिश्ती समाज एकता मंच की संरक्षक समिति के अध्यक्ष पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। समाज के लोगों को एक मंच पर लाने और आपसी भाईचारे एवं एकता को मजबूत करने में उनका योगदान सराहनीय रहा है।

नवनियुक्त अध्यक्ष **मोहम्मद साबिर अब्बासी** ने कहा कि वे समाज की **एकता, शिक्षा, सामाजिक विकास, युवाओं के बेहतर भविष्य एवं संगठन को मजबूत करने** के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि भिश्ती समाज एकता मंच का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग और व्यक्ति को साथ लेकर चलना तथा आने वाली पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए सकारात्मक एवं रचनात्मक प्रयास करना है।

उन्होंने कहा कि **पद से अधिक महत्वपूर्ण समाज की एकता और सेवा है** तथा सभी वरिष्ठजनों, पदाधिकारियों, युवाओं एवं समाजबंधुओं के सहयोग से मंच को और अधिक मजबूत एवं प्रभावशाली बनाया जाएगा।

इस अवसर पर भिश्ती समाज एकता मंच के अध्यक्ष **जनाब हकीम खान अब्बासी** सहित सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने **मोहम्मद साबिर अब्बासी** को संरक्षक समिति का अध्यक्ष नियुक्त होने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि उनके अनुभव एवं मार्गदर्शन से संगठन को नई मजबूती मिलेगी।

📜 अब्बासी नाम को लेकर एक जरूरी जानकारी — सरकारी दस्तावेजों के साथसमाज में आज भी कुछ लोगों को यह जानकारी नहीं है कि “अब्ब...
17/08/2026

📜 अब्बासी नाम को लेकर एक जरूरी जानकारी — सरकारी दस्तावेजों के साथ

समाज में आज भी कुछ लोगों को यह जानकारी नहीं है कि “अब्बासी” नाम का सरकारी रिकॉर्ड में क्या उल्लेख है। कई लोग इसे केवल एक सरनेम मानते हैं और यह समझते हैं कि सरकारी स्तर पर “अब्बासी” नाम का कोई उल्लेख या आधार नहीं है।

लेकिन सरकारी दस्तावेज कुछ और ही बताते हैं।

भारत सरकार की National Commission for Backward Classes (NCBC) द्वारा राजस्थान के लिए जारी Central List of OBCs में Entry No. 53 के अंतर्गत स्पष्ट रूप से यह नाम दर्ज है—

Sakka-Bhishti, Saqqa-Bhishti, Bhishti-Abbasi

इस प्रविष्टि के आधार के रूप में सरकारी रिकॉर्ड में—

Resolution No. 12011/68/98-BCC
दिनांक — 27 अक्टूबर 1999

दर्ज है।

यानी “Bhishti-Abbasi” केवल बोलचाल में इस्तेमाल होने वाला कोई नाम नहीं है, बल्कि भारत सरकार की आधिकारिक OBC सूची में दर्ज नाम है।

🔎 एक बात विशेष रूप से समझें

यहाँ 53 कोई Registration Number नहीं, बल्कि Central OBC List का Entry Number है।

और 12011/68/98-BCC उस सरकारी Resolution Number को दर्शाता है, जिसके आधार पर यह प्रविष्टि दर्ज है।

राजस्थान सरकार के संबंधित सरकारी रिकॉर्ड में भी इस प्रविष्टि का उल्लेख मिलता है।

📌 सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज: Bhishti-Abbasi
📌 OBC List Entry: 53
📌 Resolution: 12011/68/98-BCC
📌 Resolution Date: 27 October 1999

समाज के लिए महासभा का संदेश

किसी भी पहचान या अधिकार के संबंध में सुनी-सुनाई बातों के बजाय सरकारी दस्तावेजों को आधार बनाना चाहिए।

यह जानकारी समाज के सामने रख रही है, ताकि हमारे समाज के लोग अपने सरकारी रिकॉर्ड, प्रमाण-पत्र और उपलब्ध अधिकारिक जानकारी के प्रति जागरूक रहें।

जानकारी सिर्फ अपने तक न रखें — समाज तक पहुँचाएं।

दस्तावेज देखिए • तथ्य समझिए • समाज को जागरूक कीजिए।

सत्य • जागरूकता • एकता
ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

सरदार शेरबाज़ खान अब्बासी, जिन्हें बाज़ खान के नाम से भी जाना जाता है, ब्रिटिश राज के दौरान उत्तरी पंजाब के धुंध अब्बासी...
13/08/2026

सरदार शेरबाज़ खान अब्बासी, जिन्हें बाज़ खान के नाम से भी जाना जाता है, ब्रिटिश राज के दौरान उत्तरी पंजाब के धुंध अब्बासी कबीले के नेता थे । वे फतेह नूर खान के पुत्र थे - कथित तौर पर कबीले के एक प्रभावशाली सदस्य।

शेरबाज़ खान ने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध विद्रोह के दौरान जुलाई 1857 में मुर्री की ब्रिटिश बस्ती पर 300 सैनिकों के साथ हमला करने की योजना बनाई थी, लेकिन उसकी योजना अंग्रेजों को पता चल गई और उसकी योजना विफल हो गई, और उसे अंग्रेजों ने पकड़ लिया। बाद में उस पर मुकदमा चलाया गया, उसे सजा सुनाई गई और तोपों के सामने लटकाकर उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए ।

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