07/04/2026
Bhopal was a Sovereign and independent Kingdom from his establishment to merger With Indian Union.The State have only treaty with HIEC and British Crown in Indian empire.
भोपाल अपने स्थापना काल से लेकर भारतीय संघ में विलय तक एक संप्रभु और स्वतंत्र राज्य था। इस राज्य की भारतीय साम्राज्य में केवल ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश क्राउन के साथ ही संधियाँ थीं।
भोपाल रियासत बनाम भारतीय संघ
{ विलय प्रक्रिया विश्लेषणात्मक तथ्य}
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●भारत के इतिहास में यह बताया जाता है15 अगस्त 1947
को भारत आजाद हो गया था लेकिन भोपाल जो एक मुस्लिम रियासत थी वो 1 जून 1949 को आजाद हुआ यह तथ्य पूरी
तरह निराधार है। वास्तविक यह है कि भोपाल कभी गुलाम हुआ ही नही था ब्रिटिश इण्डियन एम्पायर के भीतर भोपाल की स्थिति उसकी सन्धि की शर्तों पर निर्भर थी। भोपाल रियासत को प्रिंसिपल स्टेट का दर्जा प्राप्त था वो भी 19 तोपों की सलामी के अधिकार के साथ। प्रिंसली स्टेट का दर्जा तोपो की सलामी के साथ उन्ही रियासतो को दिया जाता था जिन्हें ब्रिटीश ताज द्वारा स्वतन्त्र राज्य की दर्जा प्राप्त होता था अतःभोपाल कभी गुलाम हुआ ही नही यह कहा जा सकता है भारतिय साम्राज्य की शासन की नीतियों के अनुसार।
●दूसरी बात यह कहना कि भोपाल 1 जून 1949 को आजाद हुआ था पूर्णतः गलत है जब 15 अगस्त 1947 को स्वतन्त्र अधिनियम पारित हुआ एव डोमिनियन ऑफ़ इंडिया अपने अस्तित्व मे आया भोपाल उससे पूर्व भी भारत का अभिन्न अंग बन गया था नवाब साहब हमीदुल्ला खान ने 14 अगस्त 1947 को भोपाल रियासत के इंस्ट्रूमेंट्स ऑफ ऐसेसन पर हस्ताक्षर कर दिये थे जिसका सीधा अर्थ था कि भोपाल रियासत भारत का अंग बन गई। 26 अगस्त 1947 को नवाब साहब ने यह घोषणा की रियासत-ऐ-भोपाल भारतिय संघ के साथ अपने नये भविष्य की ओर अग्रसर होगा यह घोषणा सार्वजनिक रूप
से की गई थी ।
●30 अप्रैल 1949 को भोपाल के नवाब साहब ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए जिसके बाद भोपाल रियासत का पूर्णतया भारत में विलय हो गया। उसके बाद 1 जून 1949 को सत्ता का हस्तांतरण हुआ 30 अप्रैल से 1 जून तक नवाब साहब हमीदुल्ला खान साहब औपचारिक रूप से संविधान के तहत राज्य के प्रमुख बने रहे। जब तक भारत सरकार ने राज्य की पूर्ण सत्ता अपने हाथों ने नही लेली
●यह एक संवैधानिक प्रक्रिया थी जो दो स्वतन्त्रत शक्तियों
भोपाल रियासत एव डोमिनियन ऑफ इंडिया के मध्य हुई
सन्धि की शर्तों पर हुई जिसके तहत भोपाल के शासक ने
अपने राज्य का जुड़ाव एव विलय भारत के संघ ने कर दिया था।
●भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्ला खान एक बेहतरीन राजा उम्दा खिलाड़ी एक अच्छे सेना नायक एवं प्रशासक थे उनके समय भोपाल अपने विकास के चर्मोत्कर्ष पर था शिक्षा, न्याय, स्वास्थ,को बढ़ावा देना औद्योगिक इकाइयों की स्थापना करना। क्रिकेट आदि खेलो को रियासत में बढ़ावा देना। आर्थीक सुधार करना बैंकिंग सेवा ,सिचाई व्यवस्था को बढ़ावा देना। सड़को परिवहन रेवले एव हवाई सेवा को राज्य में सुव्यवस्थित बनाना आदि अनेकों कार्य किये गए थे। नवाब साहब स्वयं द्वितीय विश्वयुद्ध में अपनी वीरता का परिचय दिया था और वो एक उम्मदा क्रिकेट के खिलाड़ी थे भारतिय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की स्थापना भोपाल के आखिरी नवाब के प्रयासों के ही देन है।भारत मे खेल को बढवा देने के लिये पटियाला महाराजा के साथ मिलकर।
●जिस वक़्त दूसरी जगहों में साम्प्रदायिक माहौल बेहद था उस समय नवाब हमीदुल्लाह खां के दौर हुकूमत में भोपाल एक अमन का मरकज़ बना था, दूसरी जगह से लुट कर पनाहगुज़ीन यहां आते थे, नवाबी दौर में साम्प्रदायिक दंगे यहाँ कभी नहीं हुए और आज़ादी के बाद सिंधी शरणार्थियों के लिए भी अपने दिल और महल के दरवाज़े खोले, नवाब हमीदुल्लाह खान जो एक इंटरनेशनल शख्सियत थे, दो मर्तबा चैम्बर्स ऑफ़ प्रिंसेस यानी तमाम राजाओं, महाराजों और नवाबों के संगठन के सदर रहे. गाँधी-इरविन समझौता करवाने में उनके रोल जिसके बाद स्वतंत्र सेनानियों की रिहाई हुई और राउंड टेबल कांफ्रेंस में उनकी मशहूर तक़रीर का भी ज़िक्र है.एक तरह महात्मा गाँधी-नेहरू-मौलाना आज़ाद सबसे उनके क़रीबी ताल्लुक़ात थे वहीँ दुनिया भर में मिस्र से तुर्की, अफ्रीका से यूरोप तक राष्ट्राध्यक्षों से रिश्ते थे। एक स्वंतत्र राजा के तौर पर।
●भोपाल एक स्वतन्त्र राज्य था एव उसके शासक को पूर्ण अधिकार था वो अपने राज्य के बारे में संपूर्ण निर्णय सोच
समझ कर ले। नवाब साहब ने भोपाल का विलय भारत मे बहुत पहले कर दिया था बाकी इसकी घोषणा बाद में की थी
●अतः इतिहास में यह तथ्य जो बताया गया है कि भोपाल के नवाब भारत मे शामिल होना नही चाहते थे वो पाकिस्तान के साथ जाना चाहते थे पूर्णतया गलत है यह तथ्य केवल इतिहास को तोड़ मरोड़ कर इसलिये फैलाया गया कि जिससे हिंदू मुस्लिम के मध्य नफरत एव दुर्भावना का विस्तार हो सके एव वामपंथीयो के विचारों का प्रचार प्रसार हो सके सत्य यह है को भोपाल एक अति समृद्धि एव विकसित रियासत थी जहाँ के शासकों ने सदा सर्वदा गंगा जमुनी तहजीब के तहत जनता को एकं समान निगाह से देखा एव उनके जीवन को खुशहाल बनाया जी एक शासक का कर्त्तव्य होता है।
●नीचे भोपाल रियासत का इंस्ट्रूमेंट ऑफ एसेसन जो नवाब साहब के द्वारा 14 अगस्त 1947 को साइन किया गया था
स्प्ष्ट प्रमाण है कि भोपाल 15 अगस्त 1947 से पूर्व भारत का अभिन्न अंग बन गया था। साथ में विलय पत्र भी संगृहीत है
जो 30 अप्रैल 1949 को रियासत के विलय दिन नवाब साहब
द्वारा साइन किया गया था।
Via Nripendra Raghav
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