Devatma Science Museum

Devatma Science Museum Devatma Devatma Science Museum Represents the philosophy of Devatma-ONTOLOGY, EPISTEMOLOGY, ETHICS & RELIGION which motivates the Altruistic conduct, pathways of altruistic conduct and scientic philosophy on life after death.

First time in the History, Devatma Science Museum explains how to be good in relation to self, society and world in the light of science.

Operating as usual

आज 3 अप्रैल का दिन हैं l आज ही के दिन परन्तु आज से 92 साल पहले देवात्मा हमेशा के लिए इस संसार से स्थूल शरीर को त्याग कर ...
03/04/2021

आज 3 अप्रैल का दिन हैं l आज ही के दिन परन्तु आज से 92 साल पहले देवात्मा हमेशा के लिए इस संसार से स्थूल शरीर को त्याग कर देव लोक में सूक्ष्म शरीर के साथ चले गए थे l आप का अद्वितीय देव जीवन मानवता की सारी नीच चिंताए समाप्त कर सकता हैं l 20 December 1850 से शुरू हुई यात्रा 3 April 1929 तक चली l इसी समय के दौरान आपका देव जीवन देव रूप में विकसित होकर परम श्रेष्ट, परम सुन्दर और सर्वोच्च जीवन बन गया था l एक ऐसा भव्य जीवन, जो मानवता को मिथ्या और पाप के भरे जीवन से, नीच जीवन की दलदल में गर्क रहे जीवन से निकालकर सत्य और शुभ का राज्य लाने के काबिल हैं l पूर्ण धर्मावतार के लिए एक उचित समय की आवश्यकता और अनुकूलता थी l जिसकी भविष्यवाणी और विख्यात बुद्धिजीवियों की आशाएं पहले से ही की जा रही थी l भले ही वो West में प्रोफेसर जे आर्थर थॉमसन, जे. ऍम. मूर, प्रोफेसर जूलियन हक्सले, डॉक्टर पाल डिस्कोर्स साहिब, प्रोफेसर डब्ल्यू जेम्स साहिब हो या फिर East में डॉ रबीन्द्रनाथ टैगोर हो l
यह भारत देश का सौभाग्य था यहाँ पर पूर्ण धर्मावतार की घोषणाएं गूंज उठी l यहाँ अद्वितीय जीवन व्रत ग्रहण किया गया और देव समाज की स्थापना हुई l जहां सभी जगतों में पूर्ण मेल व शांति स्थापन करने के लिए The light of the Universe—Devatma ने एक अद्वितीय गीत गाया :—

“सत्य शिव सुन्दर ही मेरा परम लक्ष्य होवे;
जग के उपकार में ही जीवन यह जावे l”

जिसके आविर्भाव से एक नए युग के आरम्भ के संकेत मिले l एक ऐसा युग जहाँ कोई भी, किसी प्रकार का, किसी के साथ भी कोई शोषण न हो l चारो तरफ शांति ही शांति, एकता और पूर्ण मेल हो l इस देव जीवन से पैदा हुए देव प्रभावों की शक्ति का पूर्ण विकास हो चुका था जो हर प्रकार की मानवीय नीच शक्ति को नष्ट कर सकती थी l

पूर्ण कल्याणकारी, पूर्ण मेल स्थापन करने वाली, मानवता को नीच जीवन से बचाने वाली, पूर्ण गठन प्राप्त दिव्य आत्मा आख़िरकार आजीवनभर अकेली रही, अपमानित रही, त्यागी गई, प्रताड़ित रही l बीसवीं सदी की ही नहीं परन्तु सब युगों की सबसे दर्दनाक कहानी को, The Highest Meaning of life ने देवात्मा के देव जीवन की दास्ताँ-ए -दर्द, को कुछ इस प्रकार ब्यान किया हैं l इनके headings कुछ इस प्रकार हैं l

Survival of the Sublime Species
(The Poetry of suffering, agony, torture and sacrifice)
They Crucified Him at Every Moment
The Promise of Paradise
The Poetry of the Beyond
Whole Challenge of Life
Dark Pitch of Roundabouts
Life is on the Razor’s Edge but Still
The Real Ecstasy
Blank Walls All Around
Ah! My miserable Condition
A Solitary Bird: Anonymous, Ignorant, and Forever Tortured?
After the Dark Night Is Dawn
Alone! Long Waiting and Wailing!
The Cry of Shrill Words
Answer Me: Oh Heaven, Oh Earth
Pain Within Pain
No Hope of My Survival
Tragedy Deepens to its Darkest Dye
A Priceless Nectarine

आख़िरकार 3 अप्रैल 1929 के दिन ने, देवात्मा को, उनके अद्वितीय दुखों और कष्टों से, अज़ाबों से, अत्यंत दर्द से भरी जिंदगी को हमेशा हमेशा के लिए मुक्त कर दिया l लेकिन देवात्मा जो देव जीवन को प्राप्त हो चुके थे, उसकी भव्यता शब्दो में ब्यान नहीं हो सकती l परन्तु देवात्मा आज भी अज्ञात हैं l लेकिन हमेशा न रहेंगे l

आज 3 अप्रैल का दिन हैं l आज ही के दिन परन्तु आज से 92 साल पहले देवात्मा हमेशा के लिए इस संसार से स्थूल शरीर को त्याग कर देव लोक में सूक्ष्म शरीर के साथ चले गए थे l आप का अद्वितीय देव जीवन मानवता की सारी नीच चिंताए समाप्त कर सकता हैं l 20 December 1850 से शुरू हुई यात्रा 3 April 1929 तक चली l इसी समय के दौरान आपका देव जीवन देव रूप में विकसित होकर परम श्रेष्ट, परम सुन्दर और सर्वोच्च जीवन बन गया था l एक ऐसा भव्य जीवन, जो मानवता को मिथ्या और पाप के भरे जीवन से, नीच जीवन की दलदल में गर्क रहे जीवन से निकालकर सत्य और शुभ का राज्य लाने के काबिल हैं l पूर्ण धर्मावतार के लिए एक उचित समय की आवश्यकता और अनुकूलता थी l जिसकी भविष्यवाणी और विख्यात बुद्धिजीवियों की आशाएं पहले से ही की जा रही थी l भले ही वो West में प्रोफेसर जे आर्थर थॉमसन, जे. ऍम. मूर, प्रोफेसर जूलियन हक्सले, डॉक्टर पाल डिस्कोर्स साहिब, प्रोफेसर डब्ल्यू जेम्स साहिब हो या फिर East में डॉ रबीन्द्रनाथ टैगोर हो l
यह भारत देश का सौभाग्य था यहाँ पर पूर्ण धर्मावतार की घोषणाएं गूंज उठी l यहाँ अद्वितीय जीवन व्रत ग्रहण किया गया और देव समाज की स्थापना हुई l जहां सभी जगतों में पूर्ण मेल व शांति स्थापन करने के लिए The light of the Universe—Devatma ने एक अद्वितीय गीत गाया :—

“सत्य शिव सुन्दर ही मेरा परम लक्ष्य होवे;
जग के उपकार में ही जीवन यह जावे l”

जिसके आविर्भाव से एक नए युग के आरम्भ के संकेत मिले l एक ऐसा युग जहाँ कोई भी, किसी प्रकार का, किसी के साथ भी कोई शोषण न हो l चारो तरफ शांति ही शांति, एकता और पूर्ण मेल हो l इस देव जीवन से पैदा हुए देव प्रभावों की शक्ति का पूर्ण विकास हो चुका था जो हर प्रकार की मानवीय नीच शक्ति को नष्ट कर सकती थी l

पूर्ण कल्याणकारी, पूर्ण मेल स्थापन करने वाली, मानवता को नीच जीवन से बचाने वाली, पूर्ण गठन प्राप्त दिव्य आत्मा आख़िरकार आजीवनभर अकेली रही, अपमानित रही, त्यागी गई, प्रताड़ित रही l बीसवीं सदी की ही नहीं परन्तु सब युगों की सबसे दर्दनाक कहानी को, The Highest Meaning of life ने देवात्मा के देव जीवन की दास्ताँ-ए -दर्द, को कुछ इस प्रकार ब्यान किया हैं l इनके headings कुछ इस प्रकार हैं l

Survival of the Sublime Species
(The Poetry of suffering, agony, torture and sacrifice)
They Crucified Him at Every Moment
The Promise of Paradise
The Poetry of the Beyond
Whole Challenge of Life
Dark Pitch of Roundabouts
Life is on the Razor’s Edge but Still
The Real Ecstasy
Blank Walls All Around
Ah! My miserable Condition
A Solitary Bird: Anonymous, Ignorant, and Forever Tortured?
After the Dark Night Is Dawn
Alone! Long Waiting and Wailing!
The Cry of Shrill Words
Answer Me: Oh Heaven, Oh Earth
Pain Within Pain
No Hope of My Survival
Tragedy Deepens to its Darkest Dye
A Priceless Nectarine

आख़िरकार 3 अप्रैल 1929 के दिन ने, देवात्मा को, उनके अद्वितीय दुखों और कष्टों से, अज़ाबों से, अत्यंत दर्द से भरी जिंदगी को हमेशा हमेशा के लिए मुक्त कर दिया l लेकिन देवात्मा जो देव जीवन को प्राप्त हो चुके थे, उसकी भव्यता शब्दो में ब्यान नहीं हो सकती l परन्तु देवात्मा आज भी अज्ञात हैं l लेकिन हमेशा न रहेंगे l

जिसने अपनी आत्मा की निर्माणकारी शक्ति को बचा लिया, उसने सब कुछ बचा लिया l लेकिन जिसका आत्मा ही न बचा, तो समझ लेना उसका क...
07/03/2021

जिसने अपनी आत्मा की निर्माणकारी शक्ति को बचा लिया, उसने सब कुछ बचा लिया l लेकिन जिसका आत्मा ही न बचा, तो समझ लेना उसका कुछ भी नहीं बचा l हमारे पास अगर कुछ भी खोने को हैं, तो वो हैं हमारी आत्मा के उच्च अंग और उसकी निर्माणकारी शक्ति l

जिसने अपनी आत्मा की निर्माणकारी शक्ति को बचा लिया, उसने सब कुछ बचा लिया l लेकिन जिसका आत्मा ही न बचा, तो समझ लेना उसका कुछ भी नहीं बचा l हमारे पास अगर कुछ भी खोने को हैं, तो वो हैं हमारी आत्मा के उच्च अंग और उसकी निर्माणकारी शक्ति l

“चार शब्द याद रखने चाहिए l देवगुरु (देवात्मा), देव धर्म, देव शास्त्र और देव समाज इस शब्दों से विविध सत्यों का प्रकाश होत...
05/03/2021

“चार शब्द याद रखने चाहिए l
देवगुरु (देवात्मा), देव धर्म, देव शास्त्र और देव समाज
इस शब्दों से विविध सत्यों का प्रकाश होता हैं, और इनका परस्पर सम्बन्ध हैं l देवगुरु से देवधर्म का प्रकाश हुआ हैं l देव धर्म के प्रकाश से देव शास्त्र का जन्म हुआ हैं l और देव शास्त्र को लेकर देव समाज हैं l”—spiritual Master Devatma

सींचा जिस देव समाज को अपने खून-ए -जिगर से
देवजीवन की महिमा गाना, सिर्फ देवप्रभावों को पाना
कौन है देवात्मा व शिखर उसका, हैं क्या मनुष्यात्मा
यही हैं देव समाज मेरी, बस यही हैं देव समाज मेरी

भरकर ह्रदय देवगुरु का, देव-शास्त्र की महिमा गाये
‘तेरे साथ हैं विशेष सम्बन्ध, हे महान देव-शास्त्र मेरे
हो इस संसार में सबसे निकट, हे श्रेष्ठ देव-शास्त्र मेरे
हो भाग मेरे परम श्रेष्ठ रूप का, देवजीवन दर्शाया तेरे
तुल्य कोई और वस्तु नहीं, हे अमूल्य देवशास्त्र प्रिय
न कोई प्रतिनिधि इलावा तेरे, हैं उमीदें देवशास्त्र मेरे
तुझसे देवज्योति फैलकर यह बोध पैदा हो पायेगा
हो चुकी हैं शुरुआत, अब यहां देवराज आएगा

“चार शब्द याद रखने चाहिए l
देवगुरु (देवात्मा), देव धर्म, देव शास्त्र और देव समाज
इस शब्दों से विविध सत्यों का प्रकाश होता हैं, और इनका परस्पर सम्बन्ध हैं l देवगुरु से देवधर्म का प्रकाश हुआ हैं l देव धर्म के प्रकाश से देव शास्त्र का जन्म हुआ हैं l और देव शास्त्र को लेकर देव समाज हैं l”—spiritual Master Devatma

सींचा जिस देव समाज को अपने खून-ए -जिगर से
देवजीवन की महिमा गाना, सिर्फ देवप्रभावों को पाना
कौन है देवात्मा व शिखर उसका, हैं क्या मनुष्यात्मा
यही हैं देव समाज मेरी, बस यही हैं देव समाज मेरी

भरकर ह्रदय देवगुरु का, देव-शास्त्र की महिमा गाये
‘तेरे साथ हैं विशेष सम्बन्ध, हे महान देव-शास्त्र मेरे
हो इस संसार में सबसे निकट, हे श्रेष्ठ देव-शास्त्र मेरे
हो भाग मेरे परम श्रेष्ठ रूप का, देवजीवन दर्शाया तेरे
तुल्य कोई और वस्तु नहीं, हे अमूल्य देवशास्त्र प्रिय
न कोई प्रतिनिधि इलावा तेरे, हैं उमीदें देवशास्त्र मेरे
तुझसे देवज्योति फैलकर यह बोध पैदा हो पायेगा
हो चुकी हैं शुरुआत, अब यहां देवराज आएगा

“हम जिस नेचर के विकासकारी विभाग की और से मिथ्या और पाप को दूर करने और सच्चाई और भलाई का राज्य लाने के लिए जंग कर रहे हैं...
02/03/2021
ये कैसा बलिदान !

“हम जिस नेचर के विकासकारी विभाग की और से मिथ्या और पाप को दूर करने और सच्चाई और भलाई का राज्य लाने के लिए जंग कर रहे हैं, उसमें हमारी शारीरिक और अन्य आवश्यकताओं का भार नेचर के ऊपर है। इसके भिन्न हमारे सामने यह भी रहा है कि बिलफर्ज यदि सच्चाई और भलाई की जय न भी हो और नेचर हमारा साथ न भी दे, तो भी हम यह कहते हैं कि हम तो हैं, हमें अपने लिए सदा सच्चा रहना चाहिए। गो यूं यह सच नहीं है कि नेचर ऐसे जन का साथ नहीं देती, वह देती है और अवश्य साथ देती है।”—Spiritual Master Devatma

https://youtu.be/Td-YvWqP3xw

Devatma School of thought is based on Naturalistic Philosophy, Scientific concept of Evolution, Scientific Method, Optimism, Altruism, Reverence, Gratitude, ...

“श्रद्धा इसे कहते हैं, कि दूसरे की महिमा नजर आवे और उस का प्रचार करें l क्या देवात्मा में कोई ऐसी चीज़ हैं, जिसकी वाहवा क...
27/02/2021

“श्रद्धा इसे कहते हैं, कि दूसरे की महिमा नजर आवे और उस का प्रचार करें l क्या देवात्मा में कोई ऐसी चीज़ हैं, जिसकी वाहवा करने को दिल करता हैं l उनके संबंध में जो पुस्तकें हैं, उनका पाठ करने से क्या उनकी महिमा की कोई छवि सामने आती हैं ? उनके मुकाबिल में अपना आप तुच्छ दिखाई देता हैं ? यह रौशनी में ही नज़र आ सकता हैं कि देवात्मा के बगैर मेरा क्या हाल होता ?”—Spiritual Guru Devatma

“श्रद्धा इसे कहते हैं, कि दूसरे की महिमा नजर आवे और उस का प्रचार करें l क्या देवात्मा में कोई ऐसी चीज़ हैं, जिसकी वाहवा करने को दिल करता हैं l उनके संबंध में जो पुस्तकें हैं, उनका पाठ करने से क्या उनकी महिमा की कोई छवि सामने आती हैं ? उनके मुकाबिल में अपना आप तुच्छ दिखाई देता हैं ? यह रौशनी में ही नज़र आ सकता हैं कि देवात्मा के बगैर मेरा क्या हाल होता ?”—Spiritual Guru Devatma

“आवश्यकता है कि जो काम करने वाले आदमी हैं, वह सफाई पसंद हो l सफाई शरीर और आत्मा दोनों के लिए मुफीद हैं l आँखों से, दिमाग...
22/02/2021

“आवश्यकता है कि जो काम करने वाले आदमी हैं, वह सफाई पसंद हो l सफाई शरीर और आत्मा दोनों के लिए मुफीद हैं l आँखों से, दिमाग से, दिल से, पवित्रता की सख्त जरूरत हैं l जो जिस दर्जे शरीर के विचार से, जगह के विचार से, चोजों के विचार से मैला हैं, उतना ही अपना नुक्सान करता हैं l पहनने के कपडे चाहे वह बहुत घटिया दर्ज़े के हों, लेकिन वह साफ़ हो l रेशम के कपड़ो की जरुरत नहीं l वह नुकसानदेह हैं क्योंकि रेशम जीवों को मारकर बनता हैं l”—Spiritual Master Devatma

“आवश्यकता है कि जो काम करने वाले आदमी हैं, वह सफाई पसंद हो l सफाई शरीर और आत्मा दोनों के लिए मुफीद हैं l आँखों से, दिमाग से, दिल से, पवित्रता की सख्त जरूरत हैं l जो जिस दर्जे शरीर के विचार से, जगह के विचार से, चोजों के विचार से मैला हैं, उतना ही अपना नुक्सान करता हैं l पहनने के कपडे चाहे वह बहुत घटिया दर्ज़े के हों, लेकिन वह साफ़ हो l रेशम के कपड़ो की जरुरत नहीं l वह नुकसानदेह हैं क्योंकि रेशम जीवों को मारकर बनता हैं l”—Spiritual Master Devatma

“Where is the richest land in the world?~Oil-rich Gulf states~~Diamond mines in Africa.~No it is the cemetery. Yes, it i...
19/02/2021

“Where is the richest land in the world?
~Oil-rich Gulf states~
~Diamond mines in Africa.~

No it is the cemetery. Yes, it is the richest land in the world, because millions of people have departed/died and they carried many valuable ideas that did not come to light nor benefit others. It is all in the cemetery where they are buried.

Todd Henry said in his book *Die empty*: Do not go to your grave and carry inside you the best that you have.

Always choose to die empty.

The TRUE meaning of this expression, is to die empty of all the goodness that is within you. Deliver it to the world, before you leave.
If you have an idea perform it.
If you have knowledge give it out.
If you have a goal achieve it.
Love, share and distribute, do not keep it inside.

Let’s begin to give. Remove and spread every atom of goodness inside us.

Start the race.

Let us Die Empty & stay blessed always.”

“Where is the richest land in the world?
~Oil-rich Gulf states~
~Diamond mines in Africa.~

No it is the cemetery. Yes, it is the richest land in the world, because millions of people have departed/died and they carried many valuable ideas that did not come to light nor benefit others. It is all in the cemetery where they are buried.

Todd Henry said in his book *Die empty*: Do not go to your grave and carry inside you the best that you have.

Always choose to die empty.

The TRUE meaning of this expression, is to die empty of all the goodness that is within you. Deliver it to the world, before you leave.
If you have an idea perform it.
If you have knowledge give it out.
If you have a goal achieve it.
Love, share and distribute, do not keep it inside.

Let’s begin to give. Remove and spread every atom of goodness inside us.

Start the race.

Let us Die Empty & stay blessed always.”

https://youtu.be/oFtyCFDxG9I“मेरी प्यारी बेटी,रात का समय है। क्रिसमस की रात। मेरे इस छोटे से घर की सभी निहत्थी सेना सो च...
05/02/2021

https://youtu.be/oFtyCFDxG9I

“मेरी प्यारी बेटी,
रात का समय है। क्रिसमस की रात। मेरे इस छोटे से घर की सभी निहत्थी सेना सो चुकी हैं। तुम्हारे भाई-बहन भी नीद की गोद में हैं। तुम्हारी मां भी सो चुकी है। मैं अधजगा हूं, कमरे में धीमी सी रौशनी है। तुम मुझसे कितनी दूर हो पर यकीन मानो तुम्हारा चेहरा यदि किसी दिन मेरी आंखों के सामने न रहे, उस दिन मैं चाहूंगा कि मैं अंधा हो जाऊं। तुम्हारी फोटो वहां उस मेज पर है और यहां मेरे दिल में भी, पर तुम कहां हो? वहां सपने जैसे भव्य शहर पेरिस में! चैम्प्स एलिसस के शानदार मंच पर नृत्य कर रही हो। इस रात के सन्नाटे में मैं तुम्हारे कदमों की आहट सुन सकता हूं। शरद ऋतु के आकाश में टिमटिमाते तारों की चमक मैं तुम्हारी आंखों में देख सकता हूं। ऐसा मनोहर और इतना सुन्दर नृत्य। सितारा बनो और चमकती रहो। परन्तु यदि दर्शकों का उत्साह और उनकी प्रशंसा तुम्हें मदहोश करती है या उनसे उपहार में मिले फूलों की सुगंध तुम्हारे सिर चढ़ती है तो चुपके से एक कोने में बैठकर मेरा खत पढ़ते हुए अपने दिल की आवाज सुनना।
मैं तुम्हारा पिता, प्यारी बेटी जेरल्डिन!
मैं चार्ली, चार्ली चेपलिन!
क्या तुम जानती हो जब तुम नन्ही बच्ची थी तो रात-रातभर मैं तुम्हारे सिरहाने बैठकर तुम्हें स्लीपिंग ब्यूटी की कहानी सुनाया करता था। मैं तुम्हारे सपनों का साक्षी हूं। मैंने तुम्हारा भविष्य देखा है, मंच पर नाचती एक लड़की मानो आसमान में उड़ती परी। लोगों की करतल ध्वनि के बीच उनकी प्रशंसा के ये शब्द सुने हैं, इस लड़की को देखो! वह एक बूढ़े विदूषक की बेटी है, याद है उसका नाम चार्ली था।
...हां! मैं चार्ली हूं! बूढ़ा विदूषक! अब तुम्हारी बारी है! मैं फटी पेंट में नाचा करता था और मेरी राजकुमारी! तुम रेशम की खूबसूरत ड्रेस में नाचती हो। ये नृत्य और ये शाबाशी तुम्हें सातवें आसमान पर ले जाने के लिए सक्षम है। उड़ो और उड़ो, पर ध्यान रखना कि तुम्हारे पांव सदा धरती पर टिके रहें। तुम्हें लोगों की जिन्दगी को करीब से देखना चाहिए। गलियों-बाजारों में नाच दिखाते नर्तकों को देखो जो कड़कड़ाती सर्दी और भूख से तड़प रहे हैं। मैं भी उन जैसा था, प्यारी बेटी जेरल्डिन! उन जादुई रातों में जब मैं तुम्हें लोरी गा-गाकर सुलाया करता था और तुम नीद में डूब जाती थी, उस वक्त मैं जागता रहता था। मैं तुम्हारे चेहरे को निहारता, तुम्हारे हृदय की धड़कनों को सुनता और सोचता, चार्ली! क्या यह बच्ची तुम्हें कभी जान सकेगी? तुम मुझे नहीं जानती, प्यारी बेटी जेरल्डिन! मैंने तुम्हें अनगिनत कहानियां सुनाई हैं, पर उसकी कहानी कभी नहीं सुनाई। वह कहानी भी रोचक है। यह उस भूखे विदूषक की कहानी है, जो लन्दन की गंदी बस्तियों में नाच-गाकर अपनी रोजी कमाता था। यह मेरी कहानी है। मैं जानता हूं पेट की भूख किसे कहते हैं! मैं जानता हूं कि सिर पर छत न होने का क्या दंश होता है। मैंने देखा है, मदद के लिए उछाले गये सिक्कों से उसके आत्म सम्मान को छलनी होते हुए पर फिर भी मैं जिंदा हूं, इसीलिए फिलहाल इस बात को यही छोड़ते हैं।
...तुम्हारे बारे में ही बात करना उचित होगा, प्यारी बेटी! तुम्हारे नाम के बाद मेरा नाम आता है चेपलिन! इस नाम के साथ मैने चालीस वर्षों से भी अधिक समय तक लोगों का मनोरंजन किया, पर हंसने से अधिक मैं रोया हूं। जिस दुनिया में तुम रहती हो वहां नाच-गाने के अतिरिक्त कुछ नहीं है। आधी रात के बाद जब तुम थियेटर से बाहर आओगी तो तुम अपने समृद्ध और सम्पन्न चाहने वालों को तो भूल सकती हो, पर जिस टैक्सी में बैठकर तुम अपने घर तक आओ, उस टैक्सी ड्राइवर से यह पूछना मत भूलना कि उसकी पत्नी कैसी है? यदि वह उम्मीद से है तो क्या अजन्मे बच्चे के नन्हे कपड़ों के लिए उसके पास पैसे हैं? उसकी जेब में कुछ पैसे डालना न भूलना। मैंने तुम्हारे खर्च के लिए पैसे बैंक में जमा करवा दिए हैं, सोच समझकर खर्च करना।
...कभी कभार बसों में जाना, सब-वे (सुरंगमार्ग) से गुजरना, कभी पैदल चलकर शहर में घूमना। लोगों को ध्यान से देखना, विधवाओं और अनाथों को दया-दृष्टि से देखना। कम से कम दिन में एक बार खुद से यह अवश्य कहना कि, मैं भी उन जैसी हूं। हां! तुम उनमें से ही एक हो बेटी!

...कला किसी कलाकार को पंख देने से पहले उसके पांवों को लहुलुहान जरूर करती है। यदि किसी दिन तुम्हें लगने लगे कि तुम अपने दर्शकों से बड़ी हो तो उसी दिन मंच छोड़कर भाग जाना, टैक्सी पकड़ना और पेरिस के किसी भी कोने में चली जाना। मैं जानता हूं कि वहां तुम्हें अपने जैसी कितनी नर्तक मिलेंगी। तुमसे भी अधिक सुन्दर और प्रतिभावान ! फर्क सिर्फ इतना है कि उनके पास थियेटर की चकाचौंध और चमकीली रोशनी नहीं है। उनकी सर्चलाईट चन्द्रमा है! अगर तुम्हें लगे कि इनमें से कोई तुमसे अच्छा नृत्य करती है तो तुम नृत्य छोड़ देना। हमेशा कोई न कोई बेहतर होता है, इसे स्वीकार करना। आगे बढ़ते रहना और निरंतर सीखते रहना ही तो कला है।
...मैं मर जाउंगा, तुम जीवित रहोगी। मैं चाहता हूं तुम्हें कभी गरीबी का एहसास न हो। इस खत के साथ मैं तुम्हें चेकबुक भी भेज रहा हूं ताकि तुम अपनी मर्जी से खर्च कर सको। पर दो सिक्के खर्च करने के बाद सोचना कि तुम्हारे हाथ में पकड़ा तीसरा सिक्का तुम्हारा नहीं है, यह उस अज्ञात व्यक्ति का है जिसे इसकी बेहद जरूरत है। ऐसे इंसान को तुम आसानी से ढूंढ सकती हो, बस पहचानने के लिए एक नजर की जरूरत है। मैं पैसे की इसलिए बात कर रहा हूं क्योंकि मैं इस राक्षस की ताकत को जानता हूं।
...हो सकता है किसी रोज कोई राजकुमार तुम्हारा दीवाना हो जाए। अपने खूबसूरत दिल का सौदा सिर्फ बाहरी चमक-दमक पर न कर बैठना। याद रखना कि सबसे बड़ा हीरा तो सूरज है जो सबके लिए चमकता है। हां! जब ऐसा समय आये कि तुम किसी से प्यार करने लगो तो उसे अपने पूरे दिल से प्यार करना। मैंने तुम्हारी मां को इस विषय में तुम्हें लिखने को कहा था। वह प्यार के सम्बन्ध में मुझसे अधिक जानती है।
...मैं जानता हूं कि तुम्हारा काम कठिन है। तुम्हारा बदन रेशमी कपड़ों से ढका है पर कला खुलने के बाद ही सामने आती है। मैं बूढ़ा हो गया हूं। हो सकता है मेरे शब्द तुम्हें हास्यास्पद जान पड़ें पर मेरे विचार में तुम्हारे अनावृत शरीर का अधिकारी वही हो सकता है जो तुम्हारी अनावृत आत्मा की सच्चाई का सम्मान करने का सामर्थ्य रखता हो।
...मैं ये भी जानता हूं कि एक पिता और उसकी सन्तान के बीच सदैव अंतहीन तनाव बना रहता है पर विश्वास करना मुझे अत्यधिक आज्ञाकारी बच्चे पसंद नहीं। मैं सचमुच चाहता हूं कि इस क्रिसमस की रात कोई करिश्मा हो ताकि जो मैं कहना चाहता हूं वह सब तुम अच्छी तरह समझ जाओ।
...चार्ली अब बूढ़ा हो चुका है, प्यारी बेटी! ! देर सबेर मातम के काले कपड़ों में, तुम्हें मेरी कब्र पर आना ही पड़ेगा। मैं तुम्हें विचलित नहीं करना चाहता l पर समय-समय पर खुद को आईने में देखना, उसमें तुम्हें मेरा ही अक्स नजर आयेगा। तुम्हारी धमनियों में मेरा रक्त प्रवाहित है। जब मेरी धमनियों में बहने वाला रक्त जम जाएगा तब तुम्हारी धमनियों में बहने वाला रक्त तुम्हें मेरी याद कराएगा। याद रखना, तुम्हारा पिता कोई फरिश्ता नहीं, कोई जीनियस नहीं, वह तो जिन्दगी भर एक इंसान बनने की ही कोशिश करता रहा। तुम भी यही कोशिश करना।

ढेर सारे प्यार के साथ”
Charlie Chaplin

https://youtu.be/oFtyCFDxG9I

“मेरी प्यारी बेटी,
रात का समय है। क्रिसमस की रात। मेरे इस छोटे से घर की सभी निहत्थी सेना सो चुकी हैं। तुम्हारे भाई-बहन भी नीद की गोद में हैं। तुम्हारी मां भी सो चुकी है। मैं अधजगा हूं, कमरे में धीमी सी रौशनी है। तुम मुझसे कितनी दूर हो पर यकीन मानो तुम्हारा चेहरा यदि किसी दिन मेरी आंखों के सामने न रहे, उस दिन मैं चाहूंगा कि मैं अंधा हो जाऊं। तुम्हारी फोटो वहां उस मेज पर है और यहां मेरे दिल में भी, पर तुम कहां हो? वहां सपने जैसे भव्य शहर पेरिस में! चैम्प्स एलिसस के शानदार मंच पर नृत्य कर रही हो। इस रात के सन्नाटे में मैं तुम्हारे कदमों की आहट सुन सकता हूं। शरद ऋतु के आकाश में टिमटिमाते तारों की चमक मैं तुम्हारी आंखों में देख सकता हूं। ऐसा मनोहर और इतना सुन्दर नृत्य। सितारा बनो और चमकती रहो। परन्तु यदि दर्शकों का उत्साह और उनकी प्रशंसा तुम्हें मदहोश करती है या उनसे उपहार में मिले फूलों की सुगंध तुम्हारे सिर चढ़ती है तो चुपके से एक कोने में बैठकर मेरा खत पढ़ते हुए अपने दिल की आवाज सुनना।
मैं तुम्हारा पिता, प्यारी बेटी जेरल्डिन!
मैं चार्ली, चार्ली चेपलिन!
क्या तुम जानती हो जब तुम नन्ही बच्ची थी तो रात-रातभर मैं तुम्हारे सिरहाने बैठकर तुम्हें स्लीपिंग ब्यूटी की कहानी सुनाया करता था। मैं तुम्हारे सपनों का साक्षी हूं। मैंने तुम्हारा भविष्य देखा है, मंच पर नाचती एक लड़की मानो आसमान में उड़ती परी। लोगों की करतल ध्वनि के बीच उनकी प्रशंसा के ये शब्द सुने हैं, इस लड़की को देखो! वह एक बूढ़े विदूषक की बेटी है, याद है उसका नाम चार्ली था।
...हां! मैं चार्ली हूं! बूढ़ा विदूषक! अब तुम्हारी बारी है! मैं फटी पेंट में नाचा करता था और मेरी राजकुमारी! तुम रेशम की खूबसूरत ड्रेस में नाचती हो। ये नृत्य और ये शाबाशी तुम्हें सातवें आसमान पर ले जाने के लिए सक्षम है। उड़ो और उड़ो, पर ध्यान रखना कि तुम्हारे पांव सदा धरती पर टिके रहें। तुम्हें लोगों की जिन्दगी को करीब से देखना चाहिए। गलियों-बाजारों में नाच दिखाते नर्तकों को देखो जो कड़कड़ाती सर्दी और भूख से तड़प रहे हैं। मैं भी उन जैसा था, प्यारी बेटी जेरल्डिन! उन जादुई रातों में जब मैं तुम्हें लोरी गा-गाकर सुलाया करता था और तुम नीद में डूब जाती थी, उस वक्त मैं जागता रहता था। मैं तुम्हारे चेहरे को निहारता, तुम्हारे हृदय की धड़कनों को सुनता और सोचता, चार्ली! क्या यह बच्ची तुम्हें कभी जान सकेगी? तुम मुझे नहीं जानती, प्यारी बेटी जेरल्डिन! मैंने तुम्हें अनगिनत कहानियां सुनाई हैं, पर उसकी कहानी कभी नहीं सुनाई। वह कहानी भी रोचक है। यह उस भूखे विदूषक की कहानी है, जो लन्दन की गंदी बस्तियों में नाच-गाकर अपनी रोजी कमाता था। यह मेरी कहानी है। मैं जानता हूं पेट की भूख किसे कहते हैं! मैं जानता हूं कि सिर पर छत न होने का क्या दंश होता है। मैंने देखा है, मदद के लिए उछाले गये सिक्कों से उसके आत्म सम्मान को छलनी होते हुए पर फिर भी मैं जिंदा हूं, इसीलिए फिलहाल इस बात को यही छोड़ते हैं।
...तुम्हारे बारे में ही बात करना उचित होगा, प्यारी बेटी! तुम्हारे नाम के बाद मेरा नाम आता है चेपलिन! इस नाम के साथ मैने चालीस वर्षों से भी अधिक समय तक लोगों का मनोरंजन किया, पर हंसने से अधिक मैं रोया हूं। जिस दुनिया में तुम रहती हो वहां नाच-गाने के अतिरिक्त कुछ नहीं है। आधी रात के बाद जब तुम थियेटर से बाहर आओगी तो तुम अपने समृद्ध और सम्पन्न चाहने वालों को तो भूल सकती हो, पर जिस टैक्सी में बैठकर तुम अपने घर तक आओ, उस टैक्सी ड्राइवर से यह पूछना मत भूलना कि उसकी पत्नी कैसी है? यदि वह उम्मीद से है तो क्या अजन्मे बच्चे के नन्हे कपड़ों के लिए उसके पास पैसे हैं? उसकी जेब में कुछ पैसे डालना न भूलना। मैंने तुम्हारे खर्च के लिए पैसे बैंक में जमा करवा दिए हैं, सोच समझकर खर्च करना।
...कभी कभार बसों में जाना, सब-वे (सुरंगमार्ग) से गुजरना, कभी पैदल चलकर शहर में घूमना। लोगों को ध्यान से देखना, विधवाओं और अनाथों को दया-दृष्टि से देखना। कम से कम दिन में एक बार खुद से यह अवश्य कहना कि, मैं भी उन जैसी हूं। हां! तुम उनमें से ही एक हो बेटी!

...कला किसी कलाकार को पंख देने से पहले उसके पांवों को लहुलुहान जरूर करती है। यदि किसी दिन तुम्हें लगने लगे कि तुम अपने दर्शकों से बड़ी हो तो उसी दिन मंच छोड़कर भाग जाना, टैक्सी पकड़ना और पेरिस के किसी भी कोने में चली जाना। मैं जानता हूं कि वहां तुम्हें अपने जैसी कितनी नर्तक मिलेंगी। तुमसे भी अधिक सुन्दर और प्रतिभावान ! फर्क सिर्फ इतना है कि उनके पास थियेटर की चकाचौंध और चमकीली रोशनी नहीं है। उनकी सर्चलाईट चन्द्रमा है! अगर तुम्हें लगे कि इनमें से कोई तुमसे अच्छा नृत्य करती है तो तुम नृत्य छोड़ देना। हमेशा कोई न कोई बेहतर होता है, इसे स्वीकार करना। आगे बढ़ते रहना और निरंतर सीखते रहना ही तो कला है।
...मैं मर जाउंगा, तुम जीवित रहोगी। मैं चाहता हूं तुम्हें कभी गरीबी का एहसास न हो। इस खत के साथ मैं तुम्हें चेकबुक भी भेज रहा हूं ताकि तुम अपनी मर्जी से खर्च कर सको। पर दो सिक्के खर्च करने के बाद सोचना कि तुम्हारे हाथ में पकड़ा तीसरा सिक्का तुम्हारा नहीं है, यह उस अज्ञात व्यक्ति का है जिसे इसकी बेहद जरूरत है। ऐसे इंसान को तुम आसानी से ढूंढ सकती हो, बस पहचानने के लिए एक नजर की जरूरत है। मैं पैसे की इसलिए बात कर रहा हूं क्योंकि मैं इस राक्षस की ताकत को जानता हूं।
...हो सकता है किसी रोज कोई राजकुमार तुम्हारा दीवाना हो जाए। अपने खूबसूरत दिल का सौदा सिर्फ बाहरी चमक-दमक पर न कर बैठना। याद रखना कि सबसे बड़ा हीरा तो सूरज है जो सबके लिए चमकता है। हां! जब ऐसा समय आये कि तुम किसी से प्यार करने लगो तो उसे अपने पूरे दिल से प्यार करना। मैंने तुम्हारी मां को इस विषय में तुम्हें लिखने को कहा था। वह प्यार के सम्बन्ध में मुझसे अधिक जानती है।
...मैं जानता हूं कि तुम्हारा काम कठिन है। तुम्हारा बदन रेशमी कपड़ों से ढका है पर कला खुलने के बाद ही सामने आती है। मैं बूढ़ा हो गया हूं। हो सकता है मेरे शब्द तुम्हें हास्यास्पद जान पड़ें पर मेरे विचार में तुम्हारे अनावृत शरीर का अधिकारी वही हो सकता है जो तुम्हारी अनावृत आत्मा की सच्चाई का सम्मान करने का सामर्थ्य रखता हो।
...मैं ये भी जानता हूं कि एक पिता और उसकी सन्तान के बीच सदैव अंतहीन तनाव बना रहता है पर विश्वास करना मुझे अत्यधिक आज्ञाकारी बच्चे पसंद नहीं। मैं सचमुच चाहता हूं कि इस क्रिसमस की रात कोई करिश्मा हो ताकि जो मैं कहना चाहता हूं वह सब तुम अच्छी तरह समझ जाओ।
...चार्ली अब बूढ़ा हो चुका है, प्यारी बेटी! ! देर सबेर मातम के काले कपड़ों में, तुम्हें मेरी कब्र पर आना ही पड़ेगा। मैं तुम्हें विचलित नहीं करना चाहता l पर समय-समय पर खुद को आईने में देखना, उसमें तुम्हें मेरा ही अक्स नजर आयेगा। तुम्हारी धमनियों में मेरा रक्त प्रवाहित है। जब मेरी धमनियों में बहने वाला रक्त जम जाएगा तब तुम्हारी धमनियों में बहने वाला रक्त तुम्हें मेरी याद कराएगा। याद रखना, तुम्हारा पिता कोई फरिश्ता नहीं, कोई जीनियस नहीं, वह तो जिन्दगी भर एक इंसान बनने की ही कोशिश करता रहा। तुम भी यही कोशिश करना।

ढेर सारे प्यार के साथ”
Charlie Chaplin

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Chase the Dreams which make your life meaningful.
~My humble request to all, kindly read in full. From …ALTRUISM …Secular Moral Spectrum A Student---What is the kind of atmosphere that the Dev Samaj provides? Teacher ---I give you a few facts and you can draw the conclusions for yourselves. In the first place, the Dev Samaj does not admit any man even as the lowest grade member, who has not given up eight specified gross sins about which he takes the following pledges: 1.I shall not myself take or give or cause to be given to others intoxicants, such as wine, o***m, bhang, to***co, charas, chandu, co***ne etc., except on medical grounds. 2.I shall not myself eat or give or cause to be given to others for eating, flesh or eggs or anything made therefrom. 3.I shall neither gamble nor be helpful to the others in such an act. 4.I shall neither steal anything nor help others in committing theft. 5.I shall not take bribes in performance of my legitimate duties. 6.I shall not withhold any money or any other thing entrusted to me as deposit; I shall not suppress payment of any donation promised by me towards a beneficent cause, nor withhold any debt borrowed by me from anybody, when I am able to pay or return it; I shall not suppress payment of the price of anything purchased by me. 7.I shall neither commit adultery, nor help others in doing so, nor remarry in the life time of my wife or husband. 8.I shall not knowingly kill any sentient being without a just cause for doing so, i.e. , when one is obliged to use the right of defense for himself or his relations or property etc. The freedom from these gross sins is the minimum moral life which the Dev Samaj is achieving in the lives of fit souls who come under its influence.