Devatma Science Museum

Devatma Science Museum Devatma Devatma Science Museum Represents the philosophy of Devatma-ONTOLOGY, EPISTEMOLOGY, ETHICS & RELIGION which motivates the Altruistic conduct, pathways of altruistic conduct and scientic philosophy on life after death.

First time in the History, Devatma Science Museum explains how to be good in relation to self, society and world in the light of science.

Operating as usual

“क्या मेरा मिशन नेचर के नियमानुसार नहीं ? क्या वह कभी मिट सकता है ? क्या वह उन्नति करने और फ़ैलने के बिना रह सकता है ? हे...
06/11/2020

“क्या मेरा मिशन नेचर के नियमानुसार नहीं ? क्या वह कभी मिट सकता है ? क्या वह उन्नति करने और फ़ैलने के बिना रह सकता है ? हे आकाश तू बोल ! हे पृथ्वी तू साक्षी दे !” इन धर्म-बल से परिपूर्ण शब्दों की लहर से धरती हिल गई, आकाश कांप उठा और मेरे इन प्रश्नों के उत्तर में गुप्त-स्वर में यह गूँज उत्पन्न हुई :—
“निश्चय तेरा मिशन नेचर के नियमानुसार है — धैर्य रख और विश्वास कर, कि यह उन्नति करने और फ़ैलने के बिना नहीं रहेगा — हम दोनों ही इस बात की सच्ची साक्षी देते हैं |”
Spiritual Master Devatma

पूरी दुनिया में जितने भी उपकरण उपलब्ध है, किस उपकरण को किसने बनाया और वह कहाँ का इंसान है? *विदेशियों द्वारा की गई खोज* ...
29/10/2020

पूरी दुनिया में जितने भी उपकरण उपलब्ध है, किस उपकरण को किसने बनाया और वह कहाँ का इंसान है?

*विदेशियों द्वारा की गई खोज*
*उपकरण का नाम - खोज कर्ता - देश*
01 इलेक्ट्रान - एम० जे० थॉमसन - इंगलैंड
02 प्रोट्रान - गोल्डस्टीन
03 प्रोटोन - ई. रदरफोर्ड - इंग्लैंड
04 न्युट्रान - जेम्स चैडविक - इंग्लैंड
05 साइक्लोट्रान - लारेन्स - अमेरिका
06 यूरेनियम - मार्टिन क्लाप्रोथ - जर्मनी
07 नाभिक - रदरफोर्ड
08 नाभिकीय रिएक्टर - एनरिको फर्मी
09 ओजोन - क्रिश्चियन शोनबीन - जर्मनी
10 साइकिल - जॉन के. मैकमिलन - स्कॉटलैण्ड
11 साइकिल टायर - जॉन डनलप - ब्रिटेन
12 मोटरसाइकिल - जी डैमलर - जर्मनी
13 स्कूटर - जी. ब्राडशा - ब्रिटेन
14 परमाणु संख्या - हेनरी मोसले - इंग्लैंड
15 परमाणु सिद्धान्त - जान डाल्टन - इंग्लैंड
16 परमाणु बम - ऑटो हान - इंगलैंड
17 परमाणु संरचना - नील बोहर व रदरफोर्ड -
18 रेडियो टेलीग्राफी-डेविड एडवर्ड ह्यूज - ब्रिटेन
19 रेडियो टेलीग्राफी - जी. मारकोनी - इटली
20 रेडियो धर्मिता - एंटोइन बैक्वेरल - फ्रांस
21 रेडियो सक्रियता - हेनरी बेकरल
22 रेडियम - मैरी क्यूरी और पोयरी - फ्रांस
23 डायनामाइट - अल्फ्रेड नोबेल
24 पी. एच. स्केल - एस. पी. सोरेन्सन
25 हाइड्रोजन - हैनरी केवेन्डिश - इंग्लैंड
26 नाइट्रोजन - डनियल रदर फोर्ड - इंगलैंड
27 प्लूटोनियम - जी. टी. सीबोर्ग - अमेरिका
28 मैग्नीशियम - एस. हम्फ्री डेवी - इंग्लैंड
29 फोटोग्राफी (धातु में) - एल. डेंग्यूरे, जे. निप्से
30 फोटोग्राफी (कागज) -डब्ल्यू. फॉक्स टालबोट
31 फोटोग्राफी (फ़िल्म ) -जॉन कार्बट - अमेरिका
32 ऑक्सीजन - कार्ल विल्हेम श्ली, जोजेफ प्रीस्टली - स्वीडन (यूनाइटेड किंगडम)
33 अक्रिय गैस ऑर्गन - रैमज़े और रैले
34 थोरियम - बर्जीलियस
35 टेलीविजन(मैकेनिकल) - जॉनलॉगी बेयर्ड - इंग्लैंड(ब्रिटेन
36 टेलीविजन(इलेक्ट्रानिक)- पी. टी. फार्न्सबर्थ- अमेरिका
37 बैरोमीटर - इवेंजलिस्ता टौरसेली - इटली
38 रेल इंजन- जार्ज स्टीफेंसन- युनाइटेड किंगडम
39 भाप इंजन (कंडेंसर) - जेम्स वॉट - स्कॉटलैंड
40 भाप इंजन (पिस्टन) - धाम न्यूकोमेन - ब्रिटेन
41 डीजल इंजन - रुडॉल्फ कार्ल डीजल - जर्मनी
42 लोकोमोटिव रेल - रिचर्ड ट्रेकिथिक - ब्रिटेन
43 जेट इंजन - सर फ्रैंक व्हिटले - इंगलैंड( ब्रिटेन
44 दूरबीन - गैलीलियो - इटली
45 बाईफ़ोकल लेंस - बेंजामिन फ्रैंकलिन - अमेरिका
46 इलेक्ट्रो मैग्नेट - विलियम स्टारजन - ब्रिटेन
47 एक्स किरण - विल्हेम के. रोन्टेजन - जर्मनी
48 कॉस्मिक किरणे - विक्टर हेस - ऑस्ट्रिया
49 लघु गणक - जॉन नेपियर
50 वायरलेस रेडियो - मारकोनी
51 टेलीफोन - अलेक्जेंडर ग्राहम बेल - अमेरिका
52 ग्रामोफोन - टामस एल्वा एडिसन - अमेरिका
53 बिजली बल्ब -टामस एल्वा एडिसन -अमेरिका
54 फ़िल्म (चलचित्र) - लुइस प्रिन्स - अमेरिका
55 फ़िल्म (बोलती) - जे. इंगल, जे. मुसेलो व एच. वोग्त - जर्मनी
56 फ़िल्म (संगीत ध्वनि) - डॉ० लि. उ. फारेस्ट - अमेरिका
57 सिनेमा - लाउस निकोलस और जीन लुमियर - फ्रांस
58 मोटर बैटरी - टामस एल्वा एडिसन - अमेरिका
59 बिजली की मशीन - माइकेल फैराडे - इंगलैंड
60 डायनेमो - माइकेल फैराडे - इंगलैंड
61 विधुत धारा - वोल्ट - इटली
62 विधुत चुम्बक - विलियम स्टरजियन - इंग्लैंड
63 विधुत अपघटन के नियम - माइकेल फैराडे - इंग्लैंड
64 विधुत चुम्बकीयप्रेरण -माइकेल फैराडे -इंगलैंड
65 विधुतीय चुम्बक तरंगे - हेनरिच हर्ट्ज - जर्मनी
66 विधुतीय चुम्बकत्व - एच. सी. आर्सटेड - डेनमार्क
67 विधुत संवहन का नियम -जार्ज ओहम- जर्मनी
68 विधुत चुम्बक आकर्षण का सिद्धांत - ए. एम्पीयर - फ्रांस
69 विधुत आकर्षण के नियम - कुलम्ब
70 गुरुत्वाकर्षण और गति का नियम - आइजक न्यूटन - इंगलैंड
71 वस्तुओं के गिरने का सिद्धांत - गैलिलियो - इटली
72 मोबाइल फोन - जॉन एफ. मिशेल एवं मार्टिन कूपर - अमेरिका
73 फेसबुक - मार्क जुकरबर्ग - हॉवर्ड
74 वाट्सएप - ब्रायन एक्टन, जेन कूम - अमेरिका
75 फाउंटेन पेन - लेविस ई. वाटरमैन - अमेरिका
76 बॉल पाइंट - जॉन जे. लाउड - अमेरिका
77 घड़ी - बारथोलोम्यू - इटली
78 घड़ी यांत्रिक - आई सिंग व लियांग सैन - चीन
79 घड़ी पेंडुलम - क्रिश्चियन ह्युगेन्स - नीदरलैंड
80 थर्मोस्कोप - गैलीलियो गैलीलेई - इटली
81 थर्मामीटर - डेनियल गैबरियल फारेनहाइट - जर्मनी
82 विधुत पंखा - हीलर स्कॉट ह्वीलर - अमेरिका
83 जहाज (भाप) - जे. सी. पेरियर - फ्रांस
84 जहाज(टरबाइन)-होन. सर सी. पारसंस- इंग्लैंड
85 हवाई जहाज - राइट ब्रदर्स - अमेरिका
86 समुद्री जहाज - डेविड बुशनेल - अमेरिका
87 वायुयान - ओरविल, विलबर राइट - अमेरिका
88 प्रोपलर (जलयान) - फ्रांसिस स्मिथ - ब्रिटेन
89 हेलीकॉप्टर (प्रारूपिक) - लाउन्वाय एवं बियेन्वेनु, इटनी ओहमिकेन - फ्रांस
90 हेलिकॉप्टर (मानव चलित) - ई आर मम्फोर्ड - ब्रिटेन
91 कार्बन पेपर - राल्फ वेजवुड - इंग्लैंड
92 कम्प्यूटर - चार्ल्स बैवेज - ब्रिटेन
93 कम्प्यूटर - ब्लेज़ पास्कल - फ्रांस
94 इले. कम्प्यूटर - हावर्ड आइकॉन
95 इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर - डॉ. एलान एम. तुरिंग - इंगलैंड
96 चीप (Memory Card)
97 प्रिंटर - जे. डब्लू. रावैल - अमेरिका
98 प्रिंटिंग प्रेस - जॉन गुटेनबर्ग - जर्मनी
99 वाशिंग मशीन - हर्ले मशीन कम्पनी - अमेरिका
100 एयर कंडीशनर - कारकर
101 रेफ्रीजरेटर - जे. परकिंस - इंगलैंड
102 रेफ्रिजरेटर - जेम्स हेरिसन व अलेक्जेंडर केटलिन - अमेरिका
103 सौरमंडल का केंद्र सूर्य - कोपर्निकस - पोलैंड
104 ग्रहों की खोज - केपलर - जर्मनी
105 ग्रह (नेप्च्यून) - जे. गेली - जर्मनी
106 ग्रह (प्लूटो) - सी. टॉमबॉम - अमेरिका
107 ग्रह (युरेनस) - विलियम हेर्सचेल - इंग्लैंड
108 सापेक्षता का सामान्य सिद्धान्त - एल्बर्ट आइंस्टीन - स्विट्जरलैंड
109 हीलियम - एस. डब्ल्यू. रैमसे - इंगलैंड
110 एंड्रोमिड आकाशगंगा-साइमन मेरियस -जर्मनी
111 एलार्म घड़ी - ----------------------- - ग्रीस देश
112 कलकुलेटर - ब्लेज़ पास्कल - फ्रांस
113 विधुत बैटरी - अलेसांड्रा वोल्टा - इटली
114 लिफ्ट - एलिशा ओटिस - इंगलैंड
115 ट्रेक्टर - रावर्ड फोरमिच - अमेरिका
116 माइक्रोमीटर - विलियम कोजिन - ब्रिटेन
117 मशीन गन - सर जेम्स पुक्ले - ब्रिटेन
118 माइक्रोस्कोप - जेड जानसेन - नीदरलैंड
119 माइक्रोफोन -अलेक्जेंडर ग्राहम बेल - अमेरिका
120 माइक्रोप्रोसेसर - एम. ई. हौफ - अमेरिका
121 प्रेशर कुकर - डेनिस पैपिन - इंगलैंड (फ्रांस)
122 पेपर - मुलबेरी - चीन
123 सिलाई मशीन - हैरे - अमेरिका
124 सिलाई मशीन - बार्थलेमी थिम्मोनियर- फ्रांस
125 रिवाल्वर - सेमुअल कोल्ट - अमेरिका
126 राइफल - जोसफ कोटटार - जर्मनी
127 रॉकेट - रॉबर्ट एच. गोडार्ड - अमेरिका
128 सेफ्टी पीन - वाल्टर हन्ट - अमेरिका
129 रेजर सेफ्टी - किंग सी. जिलेट - अमेरिका
130 रेजर विधुत - जैकब शिक - अमेरिका
131 सेफ्टी मैच - जान वाकर - ब्रिटेन
132 सेफ्टी लैम्प - हम्फ्रेडेवी - ब्रिटेन
133 टैंक - सर अर्नेस्ट स्विंटन - इंगलैंड (ब्रिटेन
134 टाइप राइटर - सी. शोल्स - अमेरिका
135 टाइप राइटर - पेलेग्रीन टेर्री - इटली
136 फोटो स्टेट - कार्लसन - अमेरिका
137 एल्यूमीनियम - हैंस क्रिश्चियन ओरसेड - डेनमार्क
138 अंधो की लिपि - लुई ब्रेल - फ्रांस
139 तड़ित चालक - बैंजामिन फ्रेंकलिन - अमेरिका
140 टेलीग्राफ यांत्रिक - एम. लम्मोंड - फ्रांस
141 टेलीग्राफ कोड - सैमुअल मोर्स - अमेरिका
142 मोटर कार - ऑस्टिन
143 मोटर कार(वाष्प)- निकोलस कुगनाट - फ्रांस
144 मोटर कार(आन्तरिक दहन) - सैमुअल ब्राउन - ब्रिटेन
145 मोटर कार (पेट्रोल) - कार्ल बेंज - जर्मनी
146 कॉर्ब्युरेटर - जी. डैमलर - जर्मनी
147 स्टेथोस्कोप - लाईनक
148 टेलिस्कोप - हेन्स लिपरशे - नीदरलैंड्स
149 क्लोरोफार्म - एफ. सोबरन
150 रिकार्ड (लांग प्लेइंग) - डॉ. पीटर गोल्डमार्क - अमेरिका
151 लेसर - चार्ल्स थियोडर मैमन - अमेरिका
152 बनसेन बर्नर - आर. विल्हेम वोन बनसेन- जर्मनी
153 सीमेंट - जोसेफ अरगडिन - इंगलैंड(ब्रिटेन
154 इलेक्ट्रिक लेम्प - थॉमस एल्वा एडिसन- अमेरिका
155 इलेक्ट्रिक मोटर(AC) - जिनोब ग्रेम - बेल्जियम
156 इलेक्ट्रिक मोटर(DC) - निकोला टेस्ला - अमेरिका
157 ग्लाइडर - सर जार्ज केले - इंगलैंड(ब्रिटेन
158 लाउडस्पीकर - हॉरेस शोर्ट - इंगलैंड,ब्रिटेन)
159 पैराशूट - ए. जे. गारनेरिन व जीन पियरे क्लानचार्ड - फ्रांस
160 स्लाइड रूल - विलियम ऑफ़ट्रेड - इंगलैंड
161 स्टेनलेस स्टील - हेरि ब्रियरले - इंग्लैंड
162 ट्रांसफार्मर - माइकल फैराडे - इंग्लैंड (ब्रिटेन
163 ट्रांजिस्टर - जॉन बरडीन, विलियम शाकले, व वाल्टर बर्टन - अमेरिका
164 क्लोरीन - कार्ल शीले - स्वीडन
165 ग्रहों की गति का सिद्धांत - जे. कैप्लर - जर्मनी
166 निकिल - ए. क्रोन्सटेड - स्वीडन
167 क्वांटम सिद्धांत - मैक्स प्लैक - जर्मनी
168 कताई मशीन - सैमुअल क्रॉम्पटन - ब्रिटेन
169 कारपेट स्वीपर - मेलविल बिसेल - अमेरिका
170 क्रोनोमीटर - जॉन हैरीसन - जर्मनी
171 गैल्वेनोमीटर - एंड्रे मेरी एम्पियर - फ्रांस
172 डेन्टल प्लेट - ऐन्थोनी प्लेट्सन - अमेरिका
173 डिस्क ब्रेक - एफ. लेचेस्टर - ब्रिटेन
174 गैस लाइटिंग - विलियम मरडॉक - ब्रिटेन
175 गैस फायर - फिलिप लेबन - फ्रांस
176 गाइरो कम्पास - सर अल्पर स्पेरी - अमेरिका
177 गीगर काउंटर - हैन्स गीगर - जर्मनी
178 स्काच टेप - रिचर्ड ड्र - अमेरिका
179 स्वतः चालक - चार्ल्स कैटरिंग - अमेरिका
180 स्काईस्क्रेपर - विलियम जेनी - अमेरिका
181 लॉगरिथ्म - जॉन नेपियर - स्कॉटलैंड
182 नियोन लैम्प - जार्ज क्लाड - फ्रांस
183 प्लास्टिक - अलेक्जेंडर पार्कस - ब्रिटेन
184 नायलॉन - डॉ० वालेस कैरायर्स - अमेरिका
185 स्टील - हेनरी बेसेमर - ब्रिटेन
186 सुपर कंडक्विटी -एच. के. ओनेस - नीदरलैंड
187 सेलूलाइड - अलेक्जेंडर पार्क - ब्रिटेन
188 हॉरपीडो - रॉबर्ट ह्वलईटहेट - ब्रिटेन
189 टेरिलीन - विनफील्ड व डिक्सन - ब्रिटेन
190 वेल्डिंग मशीन (विधुत) - एलिसा थॉमसन - अमेरिका
191 होवरक्राप्ट - सर क्रिस्टोफर कांकरेल - ब्रिटेन
192 पेनिसिलिन - एलेक्जेंडर फ्लेमिंग - इंग्लैंड
193 प्रकाश का वेग - फिजियाऊ - इंगलैंड
194 प्रकाश विधुत प्रभाव - अल्बर्ट आइंस्टीन -
195 पाकिक मीटर - कार्लटन मैगी - अमेरिका
196 पाश्चुरीकरण - लुई पाश्चर - फ्रांस
197 रडार - रॉबर्ट वाटसन वाट - स्कॉटलैंड
198 रबर (पौधों का दूध) - डनलप रबर कंपनी - ब्रिटेन
199 रबर (टायर) - थॉमस हॉनकाक - ब्रिटेन
200 रबर (जलरोधी) - चार्ल्स मैकिनटोस - ब्रिटेन
201 रबर(वलक्निकृत)-चार्ल्स गुड़इयर- अमेरिका
202 लाइटिंग कंडक्टर - बेंजामिन फ्रेंकलिन - अमेरिका
203 लिनोलियम - फ़्रेडिक बाल्टन - ब्रिटेन
204 थर्मस फ्लास्क - डेवार - अमेरिका
205 आवर्त सारणी - मैण्डलीफ़
206 तैरने के नियम - आर्कमिडीज
207 तापायनिक उत्सर्जन - एडिसन
208 डायोड बाल्व - सर जे. एस. फ्लेमिंग
209 ट्रायोड बाल्व - डॉ ली. डी. फोरेस्ट
210 साइकिल की पुरानी छूछी - जॉन डनलप - ब्रिटेन
211 साइकिल की नई छूछी -( )- चीन
212 मानचित्र - सुमेरियनो द्वारा - 2250 ई० पू०

👉 इत्यादि और भी न जाने कितने ही ऐसे कार्य जिनकी शुरुआत विदेशों से हुई इनको फॉलो करते हुए अन्य देश तरक्की की राह पर अग्रसर है।

परम लक्ष्य देवत्व का हो पूरा नया रूप कुल दुनिया पावे उच्च शक्तियां होकर रूपांतरित उच्चतम बनती जायेनीच शक्तियां हो रूपांत...
19/10/2020

परम लक्ष्य देवत्व का हो पूरा नया रूप कुल दुनिया पावे
उच्च शक्तियां होकर रूपांतरित उच्चतम बनती जाये
नीच शक्तियां हो रूपांतरित दिनों दिन नष्ट होती जाये
उच्च मिलन हो सदा, जीवनव्रत लाइट हाउस बखूबी रोशन हो
जीवनदायक अमृत व महक पाने की विधि चारों तरफ फैले
आनंदित हो उठे उच्च जन, देख सके विकास की भव्यता को

आत्मा का सत्य ज्ञान व आत्म हित का सच्चा बोध काश! मनुष्यों में विकसित हो जावे आत्मिक भलाई की मानव नीच सुखों पर जय पावें क...
18/10/2020

आत्मा का सत्य ज्ञान व आत्म हित का सच्चा बोध
काश! मनुष्यों में विकसित हो जावे
आत्मिक भलाई की मानव नीच सुखों पर जय पावें
कुल मानवता सत्य-शुभ दिव्य महासागर में नहा आवे
जहां कहीं भी हैं अनमेल जीवित व अजीवित जगतों में
काश! वह सब अनमेल हो जहां तक संभव दूर हो जावे
शुभकर मेल वहां सब आवे, दिव्य एकता सदा रह पावे

जो कुछ भी है नेचर के सच्चे नियमो मुताबिक़ इन्साफकाश! उसका बोध और प्यार मानवता में पैदा हो जावेजो जो है बेइंसाफी व जुल्म,...
17/10/2020

जो कुछ भी है नेचर के सच्चे नियमो मुताबिक़ इन्साफ
काश! उसका बोध और प्यार मानवता में पैदा हो जावे
जो जो है बेइंसाफी व जुल्म, विश्व से सब नष्ट हो जावे
काश! मानव जीवन में सच्ची नियमता का भाव पैदा हो
अपने व औरों के सम्बन्ध में कुल अनियमता नष्ट हो जावे
सुश्रृंखला व एकता सब संबंधों में विकसित हो जावे
काश! विश्रृंखला सम्पूर्ण संसार में सब ही मिट जावे
नीच कलह और अनुचित युद्ध सब नष्ट हो जावे
पूरी क़ायनात में उच्च शांति हर तरफ पैदा हो जावे

मनुष्यात्मा में विविध सुखों के नीच अनुराग हैं जाते पायेहैं जो विभिन्न संबंधों में जारी, नीच घृणा हो नष्ट जाए उच्च भाव व ...
15/10/2020

मनुष्यात्मा में विविध सुखों के नीच अनुराग हैं जाते पाये
हैं जो विभिन्न संबंधों में जारी, नीच घृणा हो नष्ट जाए
उच्च भाव व उच्च घृणा की सम्पन्नता हो विकसित जाए
शरीर व आत्मा के बोध की सच्ची पवित्रता हो पैदा जाये
जो कुछ भी है सच्ची मलिनता वह सब हो नष्ट जावे
जो जो है सच्चा, पवित्र व हितकर सौंदर्य कायनात में
काश! उसका बोध और प्यार मनुष्यों में हो पैदा जावे
कुरूपता हैं जहा उच्च घृणा उसके लिए हो जाग्रत जावे
काश ! समस्त मानवता सत्य शुभ राज में ले सांस पाए !

ओ! (लायक रूह की) प्रत्येक दुःख हरन औषधि !ओ! सच्चाई के स्वर की मधुरता का शिखर !ऐसा हो ! ओ भरोसेमंद और विशाल नेचर !अद्विती...
14/10/2020

ओ! (लायक रूह की) प्रत्येक दुःख हरन औषधि !
ओ! सच्चाई के स्वर की मधुरता का शिखर !
ऐसा हो ! ओ भरोसेमंद और विशाल नेचर !
अद्वितीय और परम लक्ष्य देवत्व का पूरन हो !

काश! जीवन व्रत देवत्व का पूरन हो जावे !
नया जन्म यह दुनिया पावे, सत्य राज इस जग में आवे
हो संभव जहां तक, मिथ्या और झूठ सब नष्ट हो जावे
जो भी सच्ची भलाई हैं, वह इस दुनिया में पैदा हो जावे
फलस्वरूप, सब प्रकार की बुराइयां विनष्ट हो जावे
मानव विश्वास में प्रचलित मिथ्यापन ग़ारत हो जावे
धार्मिक साधनो, पूजा पाठ में मिथ्या खत्म हो जावे
मिथ्या-मूलक भय व दुःख सब नष्ट हो जावे

ये कैसी जन्नत...?ऐसा हो ! ओ विशाल और सत्य विकासकारी नेचर ओ विकास पथ की रक्षक और वर्द्धनकारी सहायक  आगे भी हो सको सदा हर ...
14/10/2020

ये कैसी जन्नत...?

ऐसा हो ! ओ विशाल और सत्य विकासकारी नेचर
ओ विकास पथ की रक्षक और वर्द्धनकारी सहायक
आगे भी हो सको सदा हर प्रकार से मददगारी नेचर
करने पूरा मिशन-ए-देवत्व हैं जो तेरा अपना मिशन

ऐसा हो ! हे सत्य नेचर, मददगार हो सको दिखलाने में
असल हक़ीक़त किताब-ए-देवत्व देववाणी समझाने में
जहां तक भी हो सके सब अधिकारी इंसानो को पाने में
देव रौशनी की आला तरंगे पा रहस्य रूह के सुलझाने में

ऐसा हो ! भेद खुल सके तमाम तालीम-ए-मिथ्या का
फैली है पूरी क़ायनात में, गुनाह-जुर्म की है जो वजह
ग़ारत किए बगैर सब मिथ्याओं के उद्धार कोई न पायेगा
चाहे कोई सम्प्रदाय, समाज, जाति व देश भी क्यों न हो
सच्चे आत्मिक हित का मार्ग जो पूर्णतया बंद पड़ा था
खोलने व प्रशस्त खातिर नेचर ने हुजूर है प्रकट किया
(The Highest Meaning of life -chapter 1)

“मुझे वह आत्मा मिले जो अपनी किसी नीच गति को मेरी ज्योति में देख सके l नाना संबंधों में उन्होंने जो नाना हानिकारक गतियाँ ...
09/10/2020

“मुझे वह आत्मा मिले जो अपनी किसी नीच गति को मेरी ज्योति में देख सके l नाना संबंधों में उन्होंने जो नाना हानिकारक गतियाँ की हैं, और जिनको दिखाना और जिनसे मोक्ष देना मेरे जीवन व्रत का उद्देश्य हैं, वह उनकी नीच गतियों को देख सके l ऐसा हो कि मुझे ऐसे अधिकारी आत्मा प्राप्त हो जो उपरोक्त प्रकार की नीच गति को उनके प्रवृत रूप में देख सके l मेरा बल उनके भीतर प्रवेश करें l उनका हृदय हिले l अधिक से अधिक हिले l उनके भीतर एक व दूसरी नीच गति से निकलने के लिए अधिक से अधिक संग्राम उत्पन हो l वह चुप न रह सके l उनके भीतर सख्त दर्जे की बेचैनी पैदा हो l अपनी नीच गतियों को देखकर वह अशांत और बे आराम हो जावें l“ -Devatma

“मैं चाहता हूं और बार बार चाहता हूं और व्याकुल होकर चाहता हूं कि मुझे अधिकारी आत्मा मिले जिनके भीतर मेरी ज्योति केवल एक ...
08/10/2020

“मैं चाहता हूं और बार बार चाहता हूं और व्याकुल होकर चाहता हूं कि मुझे अधिकारी आत्मा मिले जिनके भीतर मेरी ज्योति केवल एक व दूसरे समय में कुछ काल के लिए ही नहीं किन्तु हर समय अथवा लगातार प्रवेश कर सके l मुझे ऐसे आत्मा मिले जिन के भीतर में अपने बल का संचार कर सकूँ और वह कुछ देखने के योग्य बन सके कि जो मैं उन्हें दिखाना चाहता हूँ l”—Devatma

मानव इतिहास मे पहली बार Spiritual Master Devatma (1850-1929) के जीवन मे सत्य का अनुराग पैदा हुआ कि जिसके आठ अंग है। जो अ...
08/10/2020

मानव इतिहास मे पहली बार Spiritual Master Devatma (1850-1929) के जीवन मे सत्य का अनुराग पैदा हुआ कि जिसके आठ अंग है। जो अपनी गहराई के विचार से अथाह है। वो इस प्रकार है:-
1-सत्य भाषण अनुराग--- हमेशा सत्य ही बोलना चाहे उससे उनको औरो के व्दारा कैसा ही नुकसान और दुख मिले।
2-सत्यगत स्पष्ट कथन अनुराग--- हमेशा सत्य को साफ-2 बिना लाग लपेट के बोलना।
3-सत्य ज्ञान उपार्जन अनुराग-- जहां कही सत्य ज्ञान मिले उसे तुरन्त तलाश करने का प्यार। इस लिए उन्होने अपने जीवन काल मे सैकड़ो किताबे पढ़ी।
4-सत्य ग्रहण अनुराग----- उन्हे जो सत्य ज्ञान प्राप्त होता था उसे वह तुरन्त ग्रहण कर लेते थे।इसलिए उनका ज्ञान बड़ता चला गया कि जिससे उन्होने 35 वर्षो मे 300 पुस्तको की रचना कर दी।
5-सत्य प्रतिज्ञा पालन अनुराग--- सच्ची प्रतिज्ञा पर सदा पक्के रहना। अगर किसी को चार बजे का समय दिया है तो उसका मतलब उनके लिए चार बजकर पांच मिन्ट नही था।
6-सत्य प्रचार अनुराग---- इस अनुराग से परिचलित होकर वह जो कुछ सत्य हो उसी का प्रचार करते थे।
7- सत्य समर्थन अनुराग---- वो जिस बात, व्यक्ति और घटना को सत्य की तरक पर खरी उतरे देखते तो उसका साथ देते थे। और जो सत्य के विरूध हो उसका कभी साथ नही देते थे।
8- धर्म विषयक सत्य अनुसन्धान अनुराग----- धर्म के विज्ञान मूलक सत्यो की खोज का प्यार, जिनको परखा जा सकता हो। जिन पर तर्क हो सकती हो।
सत्य के इन आठ अनुरागो (प्यारो) ने उनको सारी मानव जाति से शिरोमनी बना दिया।

लिखना मैं चाहता हूं दास्तान-ए-दर्द-देवजीवन की lपर हाय पेश कोई न जाएं llयह जो सत्य शिव सुंदर का अद्भुत गीत गाया जा रहा है...
06/10/2020

लिखना मैं चाहता हूं दास्तान-ए-दर्द-देवजीवन की l
पर हाय पेश कोई न जाएं ll

यह जो सत्य शिव सुंदर का अद्भुत गीत गाया जा रहा हैं
यह जो जग के उपकार ही में पल पल बिताया जा रहा हैं
यह जो रूह का अंधेरा सिमट रहा हैं उजाला फैल रहा हैं
यह जो मिथ्या-पाप ग़ारत हो सत्य-शुभ राज आ रहा हैं
यह जो दुख सहकर भी रूह का पूर्ण मुदावा जान गया हैं
यह जो पूर्ण त्यागी हो मौत निकट कुल नेचर बचा रहा हैं
यह जो संबंधों में कड़वाहट जा रही हैं व मेल आ रहा हैं
यह जो पूर्ण सत्य खातिर देवजीवन दाव पर लगा रहा हैं
यह जो परम श्रेष्ट व सर्वोच्च जीवन निरंतर बढ़ रहा हैं
यह जो देवशक्तियों की दिव्य महक गुलशन गुलशन हैं
यह जो परम सुंदर जीवन की चमक आलम आलम हैं
बस यही देवजीवन हैं देवात्मा जीवन हैं दिव्य जीवन हैं

लिखना मैं चाहता हूं दास्तान-ए-दर्द-देवजीवन की lपर हाय पेश कोई न जाएं llपढ़कर जिसको अधिकारी जन रह जाता हो अवाकऐसे सर्वोच्च...
05/10/2020

लिखना मैं चाहता हूं दास्तान-ए-दर्द-देवजीवन की l
पर हाय पेश कोई न जाएं ll

पढ़कर जिसको अधिकारी जन रह जाता हो अवाक
ऐसे सर्वोच्च, सच्ची व एकता प्रतिपादक चरम उत्कर्ष
पूर्ण कल्याणकारी शास्त्र, दिया है हुज़ूर ने भव्य दान
लिखा खून-ए-जिगर से है हरेक लफ्ज़ रूह की खुराक
तड़प तड़प कर सींचा हैं, न दी इजाज़त सेहत बीमार
पढ़कर जिन लफ्ज़ो को, देवप्रभावों की बारिश पायेगा
लाख कोशिश करले दुनिया, देवराज यहाँ आएगा

भरकर ह्रदय देवगुरु का, देव-शास्त्र की महिमा गाये
‘तेरे साथ हैं विशेष सम्बन्ध, हे महान देव-शास्त्र मेरे
हो इस संसार में सबसे निकट, हे श्रेष्ठ देव-शास्त्र मेरे
हो भाग मेरे परम सुंदर रूप का, देवजीवन दर्शाया तेरे
तुल्य कोई और वस्तु नहीं, हे अमूल्य देवशास्त्र प्रिय
न कोई प्रतिनिधि इलावा तेरे, हैं उमीदें देवशास्त्र मेरे’
तुझसे देवज्योति फैलकर यह बोध पैदा हो पायेगा
हो चुकी हैं शुरुआत, अब यहां देवराज आएगा

04/10/2020

"जिस विशाल नेचर ने मनुष्य जगत् में अद्वितीय देव-शक्तियों से विशिष्ट देवात्मा को इसलिए प्रगट किया, ताकि जैसे उसके निर्जीव सूर्य की ज्योति और तेज से हमारी पृथ्वी के सब प्रकार के छोटे से छोटे और बड़े से बड़े जीव-धारियों के जीवित शरीरों की जहां तक उसके अपने नियमानुसार रक्षा वा उन्नति हो सकती है, तथा वह रक्षा और उन्नति हो रही है, वैसे ही जीवित जगत् के सूर्य देवात्मा की देव-ज्योति और उनके देव-तेज के द्वारा मुख्यतः मनुष्य जगत् और गौणत: उस से नीचे के जगतों की जीवनी शक्तियों की भी उसके नियमानुसार जहां जहां तक रक्षा वा उन्नति सम्भव है, वह रक्षा और उन्नति हो; और वह उस के उस विकास कार्य्य को उन तरफ़ों में और आगे बढ़ाएं, कि जिन तरफ़ों में उसका और आगे बढ़ना देव-शक्तियों से विहीन मनुष्य जगत् के आत्माओं के द्वारा सम्भव न था; और वह अपनी इन देव-शक्तियों को प्राप्त होकर उन के देव प्रभाओं के द्वारा उस के नाना दिशाओं से बंद पड़े विकास मार्ग के खोलने और उसके बढ़ाने वा प्रशस्त करने का हेतु हों “

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Chase the Dreams which make your life meaningful.
~My humble request to all, kindly read in full. From …ALTRUISM …Secular Moral Spectrum A Student---What is the kind of atmosphere that the Dev Samaj provides? Teacher ---I give you a few facts and you can draw the conclusions for yourselves. In the first place, the Dev Samaj does not admit any man even as the lowest grade member, who has not given up eight specified gross sins about which he takes the following pledges: 1.I shall not myself take or give or cause to be given to others intoxicants, such as wine, opium, bhang, tobacco, charas, chandu, cocaine etc., except on medical grounds. 2.I shall not myself eat or give or cause to be given to others for eating, flesh or eggs or anything made therefrom. 3.I shall neither gamble nor be helpful to the others in such an act. 4.I shall neither steal anything nor help others in committing theft. 5.I shall not take bribes in performance of my legitimate duties. 6.I shall not withhold any money or any other thing entrusted to me as deposit; I shall not suppress payment of any donation promised by me towards a beneficent cause, nor withhold any debt borrowed by me from anybody, when I am able to pay or return it; I shall not suppress payment of the price of anything purchased by me. 7.I shall neither commit adultery, nor help others in doing so, nor remarry in the life time of my wife or husband. 8.I shall not knowingly kill any sentient being without a just cause for doing so, i.e. , when one is obliged to use the right of defense for himself or his relations or property etc. The freedom from these gross sins is the minimum moral life which the Dev Samaj is achieving in the lives of fit souls who come under its influence.