Devatma Science Museum

Devatma Science Museum Devatma

Devatma Science Museum Represents the philosophy of Devatma-ONTOLOGY, EPISTEMOLOGY, ETHICS & RELIGION which motivates the Altruistic conduct, pathways of altruistic conduct and scientic philosophy on life after death. First time in the History, Devatma Science Museum explains how to be good in relation to self, society and world in the light of science.

सोनाली बेंद्रे - कैंसरअजय देवगन - लिट्राल अपिकोंडिलितिस (कंधे की गंभीर बीमारी)इरफान खान - कैंसरमनीषा कोइराला - कैंसरयुवर...
25/11/2019

सोनाली बेंद्रे - कैंसर
अजय देवगन - लिट्राल अपिकोंडिलितिस
(कंधे की गंभीर बीमारी)
इरफान खान - कैंसर
मनीषा कोइराला - कैंसर
युवराज सिंह - कैंसर
सैफ अली खान - हृदय घात
रितिक रोशन - ब्रेन क्लोट
अनुराग बासु - खून का कैंसर
मुमताज - ब्रेस्ट कैंसर
शाहरुख खान - 8 सर्जरी
(घुटना, कोहनी, कंधा आदि)
ताहिरा कश्यप (आयुष्मान खुराना की पत्नी) - कैंसर
राकेश रोशन - गले का कैंसर
लीसा राय - कैंसर
राजेश खन्ना - कैंसर,
विनोद खन्ना - कैंसर
नरगिस - कैंसर
फिरोज खान - कैंसर
टोम अल्टर - कैंसर...

ये वो लोग हैं या थे-
जिनके पास पैसे की कोई कमी नहीं है/थी!
खाना हमेशा डाइटीशियन की सलाह से खाते है।
दूध भी ऐसी गाय या भैंस का पीते हैं
जो AC में रहती है और बिसलेरी का पानी पीती है।
जिम भी जाते है।
रेगुलर शरीर के सारे टेस्ट करवाते है।
सबके पास अपने हाई क्वालिफाइड डॉक्टर है।
अब सवाल उठता है कि आखिर
अपने शरीर की इतनी देखभाल के बावजूद भी इन्हें इतनी गंभीर बीमारी अचानक कैसे हो गई।

क्योंकि ये प्राक्रतिक चीजों का इस्तेमाल
बहुत कम करते है।
या मान लो बिल्कुल भी नहीं करते।
जैसा हमें प्रकृति ने दिया है ,
उसे उसी रूप में ग्रहण करो वो कभी नुकसान नहीं देगा।
कितनी भी फ्रूटी पी लो ,
वो शरीर को आम के गुण नहीं दे सकती।
अगर हम इस धरती को प्रदूषित ना करते
तो धरती से निकला पानी बोतल बन्द पानी से
लाख गुण अच्छा था।

आप एक बच्चे को जन्म से ऐसे स्थान पर रखिए
जहां एक भी कीटाणु ना हो।
बड़ा होने से बाद उसे सामान्य जगह पर रहने के लिए छोड़ दो,
वो बच्चा एक सामान्य सा बुखार भी नहीं झेल पाएगा!
क्योंकि उसके शरीर का तंत्रिका तंत्र कीटाणुओ से लड़ने के लिए विकसित ही नही हो पाया।
कंपनियों ने लोगो को इतना डरा रखा है,
मानो एक दिन साबुन से नहीं नहाओगे तो तुम्हे कीटाणु घेर लेंगे और शाम तक पक्का मर जाओगे।
समझ नहीं आता हम कहां जी रहे है।
एक दूसरे से हाथ मिलाने के बाद लोग
सेनिटाइजर लगाते हुए देखते हैं हम।

इंसान सोच रहा है- पैसों के दम पर हम जिंदगी जियेंगे।
आपने कभी गौर किया है--
पिज़्ज़ा बर्गर वाले शहर के लोगों की
एक बुखार में धरती घूमने लगती है।
और वहीं दूध दही छाछ के शौकीन
गांव के बुजुर्ग लोगों का वही बुखार बिना दवाई के ठीक हो जाता है।
क्योंकि उनकी डॉक्टर प्रकृति है।
क्योंकि वे पहले से ही सादा खाना खाते आए है।
प्राकृतिक चीजों को अपनाओ!
विज्ञान के द्वारा लैब में तैयार
हर एक वस्तु शरीर के लिए नुकसानदायक है!

पैसे से कभी भी स्वास्थ्य और खुशियां नहीं मिलती।।

आइए फ़िर से_ चलें
*प्रकृति की ओर...* 🙏🏻

रामास्वामी पेरियार नायकर के ईश्वर से 15 सवाल :1. क्या तुम कायर हो जो हमेशा छिपे रहते हो, कभी किसी के सामने नहीं आते?2. क...
18/11/2019

रामास्वामी पेरियार नायकर के ईश्वर से 15 सवाल :

1. क्या तुम कायर हो जो हमेशा छिपे रहते हो, कभी किसी के सामने नहीं आते?

2. क्या तुम खुशामद परस्त हो जो लोगों से दिन रात पूजा, अर्चना करवाते हो?

3. क्या तुम हमेशा भूखे रहते हो जो लोगों से मिठाई, दूध, घी आदि लेते रहते हो ?

4. क्या तुम मांसाहारी हो जो लोगों से निर्बल पशुओं की बलि मांगते हो?

5. क्या तुम सोने के व्यापारी हो जो मंदिरों में
लाखों टन सोना दबाये बैठे हो?

6. क्या तुम व्यभिचारी हो जो मंदिरों में देवदासियां रखते हो ?

7. क्या तुम कमजोर हो जो हर रोज होने वाले बलात्कारों को नही रोक पाते?

8. क्या तुम मूर्ख हो जो विश्व के देशों में गरीबी-भुखमरी होते हुए भी अरबों रुपयों का अन्न, दूध,घी, तेल बिना खाए ही नदी नालों में बहा देते हो?

9. क्या तुम बहरे हो जो बेवजह मरते हुए आदमी, बलात्कार होती हुयी मासूमों की आवाज नहीं सुन पाते?

10. क्या तुम अंधे हो जो रोज अपराध होते हुए नहीं देख पाते?

11. क्या तुम आतंकवादियों से मिले हुए हो जो रोज धर्म के नाम पर लाखों लोगों को मरवाते रहते हो?

12. क्या तुम आतंकवादी हो जो ये चाहते हो कि लोग तुमसे डरकर रहें?

13. क्या तुम गूंगे हो जो एक शब्द नहीं बोल पाते लेकिन करोड़ों लोग तुमसे लाखों सवाल पूछते हैं?

14. क्या तुम भ्रष्टाचारी हो जो गरीबों को कभी कुछ नहीं देते जबकि गरीब पशुवत काम करके कमाये गये पैसे का कतरा-कतरा तुम्हारे ऊपर न्यौछावर कर देते हैं?

15. क्या तुम मुर्ख हो कि हम जैसे नास्तिकों को पैदा किया जो तुम्हे खरी खोटी सुनाते रहते हैं और तुम्हारे अस्तित्व को ही नकारते हैंं?

##सिख# मतलब शिष्य...विचार. क्रांति. मौलिक अधिकार.बराबर ..जातिवाद.पाखंड आदि ..कुछ लाइने जो नीचे likhi है .-मेहनत करना ..ग...
11/11/2019

##सिख# मतलब शिष्य...विचार. क्रांति. मौलिक अधिकार.बराबर ..जातिवाद.पाखंड आदि ..कुछ लाइने जो नीचे likhi है .
-मेहनत करना ..गुरु नानक देव जी अपनी जि़न्दगी के आखरी 18 साल खेती की ..और कहा की mehnat करके खाओ और जरूरत मंद को भी खिलाओ ..करतारपुर पाक .
-धर्म का विरोध ..ना हम हिंदू ना मुसलमान ..गुरु नानक देव जी ...(गुरु granth साहिब पन्ना 1136),,,एक ही धर्म इन्सानियत.
ग्रह्सती जीवन ...गूरूयो ने कहा की अगर कोई insaan शादी नही करता धर्म के नाम पर (साधु )और खाना तो भीख मांगकर उसी घर से खाता जो गृहसत जीवन जी रहे है लोग ..
-पर्यावरण ...पर्यावरण को साफ रखो ..(पवन गुरु पानी पिता माता धरत महत)
-जातिवाद .. सरोवर मे किसी भी जाति का हो. नहा सकता है, जबकि पहले नल से छोटी जाति के पानी पीने से भी नल अपवित्र हो जाता था.तालाब में नहा ने का मतलब उच् नीच को खत्म करना ..
-मूर्ति पूजा विरोध ..
-जुल्म ..जुल्म करना भी नही ..सहना भी नही और किसी पर हो रहे जुल्म के खिलाफ apni जान भी दे देना ..इतिहास भी यही बताता है ..गुरु नानक देव जी ने विचारो से बाबर से टक्कर ली और जेल मे भी गए .
-धर्म के नाम पर खाने पीने क़ि चीजो को बर्बाद करना .
-बलि प्रथा का विरोध धर्म के नाम पर (insaan या janvar की ), - बकरे को काटकर हथियारो को khoon.लगाना .. गलत hai...क्यूँकि गुरु गोविन्द सिंघ जी के जाने के बाद कुछ पाखंडियों ने ये गलत प्रचार करना शुरू कर दिया था . क्यूंकि खाना पाखंडी लोगो ने होता है नाम धर्म का ..
- ज्ञान . Guru granth sahib को माथा(knowledge को )टेकना . मतलब जो बातें उसमे लिखी हैँ उनको पढ़ना .. क्यूँकि हम टीचर की पूजा नही करते ...हम अपनी लाइफ मे बुक को पढ़कर ही कामयाब होते हैँ क्यूँकि बुक लिखने बाला तो मर चुका होता hai.
-औरत की आजादी ..औरत मर्द को बराबर का दर्जा .
-मौलिक अधिकर . sikh गुरुओ ने जातिवाद जनेऊ का विरोध किया है .क्यूँकि गुरुओ तेग बहादुर जी ने बेसहरा हिन्दू के जनेऊ की रक्षा के लिए अपनी जान देने का मतलब क़ि हर इन्सान को अपनी जिंदगी अपनी marji से जीने का हक्क है .
-खुद की रक्षा .. तलवार अपनी रक्षा और दूसरे पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ इस्तेमाल होती है़ सिर्फ ..
- Sikh बाल रखता नही है़ ...बल्कि तुम बॉल काटते हो ..

-फोटो के आगे अगरबत्ती लगना Sikh सिधांत में गलत है़ .. ना ही ग्रँथ सहिब में लिखा hai..पर कुछ बिकाऊ माल ने ये शुरू कर दिया है़ hai.वैसे ये काल्पनिक फोटो है सिख गूरूयो की ..
- इक onkaar ..अगर भगवान पैदा होता है़ ...तो उसको पैदा करने वाला या उसकी मूर्ति बनाने वाला तो फिर उस से बड़ा हुआ .
- sikhism मे अमावस्या पूर्णिमा आदि को गुरु granth साहिब नही मानता ..

29/10/2019
I Support Ravish Kumar

I Support Ravish Kumar

घर बनाने के लिए ये जानकारी बहुत शानदार है.

23/10/2019

A right action must have the right content and right motivation. This can happen when the motive is free from the last trace of ego attachments and the personality completely surrenders itself at the altar of truth that the right action shines with the glow of holiness.
The highest level of motivation gives us the cue of which motives should inspire our actions. We must be inspired in our right actions by the spirit of the surrender of the best in us, even our soul, in order to strengthen and contribute to the evolutionary process. The highest motivation is self-sacrifice to the evolutionary process. Hence, a right action must become a ‘sacrificial’ act to the evolutionary process in order to reach its maximum potential.

07/10/2019

We only live once. But if we live it in the right way, then only once is enough.

बेशक हम ज़िन्दगी एक बार ही जीते हैं। किन्तु यदि इसे सही तरीक़े से जिया जाए, तो एक बार जीना भी पर्याप्त है।

06/10/2019
Kalakaars

यह जरूरी नहीं कि हर चीज़ हमें किताबें ही सिखायेंगीं, जीवन में मिलने वाले लोग भी हमें बहुत कुछ सिखा देते हैं।

Anything is possible. If we dare!💪
.
Are you a Kalakaar? Inbox us, Get featured! 🙂

कृष्ण और सुदामा का प्रेम बहुत गहरा था। प्रेम भी इतना कि कृष्ण, सुदामा को रात दिन अपने साथ ही रखते थे। कोई भी काम होता, द...
15/09/2019

कृष्ण और सुदामा का प्रेम बहुत गहरा था। प्रेम भी इतना कि कृष्ण, सुदामा को रात दिन अपने साथ ही रखते थे।
कोई भी काम होता, दोनों साथ-साथ ही करते।

एक दिन दोनों वनसंचार के लिए गए और रास्ता भटक
गए। भूखे-प्यासे एक पेड़ के नीचे पहुंचे। पेड़ पर एक
ही फल लगा था।

कृष्ण ने घोड़े पर चढ़कर फल को अपने हाथ से तोड़ा। कृष्ण ने फल के छह टुकड़े
किए और अपनी आदत के मुताबिक पहला टुकड़ा सुदामा को दिया।
सुदामा ने टुकड़ा खाया और बोला,
'बहुत स्वादिष्ट! ऎसा फल कभी नहीं खाया। एक
टुकड़ा और दे दें। दूसरा टुकड़ा भी सुदामा को मिल
गया।

सुदामा ने एक टुकड़ा और कृष्ण से मांग
लिया। इसी तरह सुदामा ने पांच टुकड़े मांग कर खा
लिए।

जब सुदामा ने आखिरी टुकड़ा मांगा, तो कृष्ण ने
कहा, 'यह सीमा से बाहर है। आखिर मैं भी तो भूखा
हूं।

मेरा तुम पर प्रेम है, पर तुम मुझसे प्रेम नहीं
करते।' और कृष्ण ने फल का टुकड़ा मुंह में रख
लिया।

मुंह में रखते ही कृष्ण ने उसे थूक दिया, क्योंकि वह
कड़वा था।
कृष्ण बोले,
'तुम पागल तो नहीं, इतना कड़वा फल कैसे खा गए?

'
उस सुदामा का उत्तर था,
'जिन हाथों से बहुत मीठे फल खाने को मिले, एक
कड़वे फल की शिकायत कैसे करूं?

सब टुकड़े इसलिए
लेता गया ताकि आपको पता न चले।

दोस्तों जँहा मित्रता हो वँहा संदेह न हो, आओ
कुछ ऐसे रिश्ते रचे...

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