स्वामी सहजानंन्द सरस्वती आश्रम चरित्रवन बक्सर

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स्वामी सहजानंन्द सरस्वती आश्रम चरित्रवन बक्सर Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from स्वामी सहजानंन्द सरस्वती आश्रम चरित्रवन बक्सर, History Museum, SWAMI SAHAJANAND SARSWATI Ashram buxar, Buxar.

"श्री दण्डी स्वामी सहजानन्द सरस्वती कीर्ति मंदिर, बक्सर (स्थापना: 1954) — दंडी सन्यासी आश्रम, संत निवास,सांस्कृतिक साहित्य और धार्मिक चेतना का केंद्र। संस्थापक: पूज्य दंडी स्वामी विमलानन्द सरस्वती जी। ।।धर्म, सेवा व सनातन संस्कृति को समर्पित पावन धाम ।।

॥ ॐ नमो नारायणाय ॥महर्षि भृगु की पावन नगरी बलिया जनपद अंतर्गत अंजोरपुर ग्राम में वर्ष 2019 में पूज्य गुरुदेव श्री श्री 1...
16/08/2026

॥ ॐ नमो नारायणाय ॥
महर्षि भृगु की पावन नगरी बलिया जनपद अंतर्गत अंजोरपुर ग्राम में वर्ष 2019 में पूज्य गुरुदेव श्री श्री 1008 ब्रह्मलीन दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने शिष्यों के साथ चातुर्मास व्रत का पावन अनुष्ठान किया।
इस पावन अवसर पर पूज्य गुरुदेव के साथ
बाएँ से दाएँ — दंडी स्वामी सुदर्शनानंद सरस्वती जी, दंडी स्वामी महेश्वरानंद सरस्वती जी एवं दंडी स्वामी परमात्मानंद सरस्वती जी महाराज।
यह स्मरणीय चित्र गुरुदेव के तप, साधना एवं शिष्य-परंपरा की पावन स्मृति को संजोए हुए है।
पूज्य गुरुदेव के श्रीचरणों में कोटि-कोटि साष्टांग दंडवत प्रणाम।

23 सितम्बर 1925, बुधवार, आश्विन शुक्ल पंचमी के पावन दिवस पर बिहार प्रांत के बक्सर जनपद अंतर्गत कर्मनाशा नदी के पवित्र तट...
10/08/2026

23 सितम्बर 1925, बुधवार, आश्विन शुक्ल पंचमी के पावन दिवस पर बिहार प्रांत के बक्सर जनपद अंतर्गत कर्मनाशा नदी के पवित्र तट पर स्थित डिहरी ग्राम में एक धार्मिक, संस्कारित एवं ब्राह्मण कृषक परिवार में एक दिव्य बालक का अवतरण हुआ। परिवार के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में आपका नाम देव मुनि राय रखा गया। नाम के अनुरूप ही बचपन से आपका स्वभाव अत्यंत शांत, सरल, संत-सदृश एवं ऋषि-मुनियों जैसा था। धर्म, पूजा-पाठ, सत्संग और ईश्वर-भक्ति में आपकी विशेष रुचि प्रारंभ से ही दिखाई देती थी। सांसारिक विषयों की अपेक्षा आपका मन वैराग्य की ओर अधिक आकर्षित रहता था।
परिवार की परंपरा एवं सामाजिक दायित्व के अनुसार आपका विवाह हुआ, किंतु गृहस्थ जीवन अधिक समय तक नहीं चला। कुछ ही वर्षों में आपका मन पूर्णतः आध्यात्मिक जीवन की ओर उन्मुख हो गया। आप अपने ग्राम के प्रसिद्ध मठ एवं समाधि स्थल पर अधिकाधिक समय व्यतीत करने लगे। वहीं श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीरामचरितमानस तथा अन्य धर्मग्रंथों का नित्य स्वाध्याय आपके जीवन का अभिन्न अंग बन गया। धीरे-धीरे आपके भीतर वैराग्य दृढ़ होता गया और ईश्वर-प्राप्ति ही आपके जीवन का एकमात्र लक्ष्य बन गया।
मठ में निवास करते हुए आपने उत्तर भारत तथा उत्तर-पूर्व भारत के अनेक प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्राएँ कीं। यात्रा के साथ-साथ आप ग्रामों में धर्मप्रचार, सत्संग एवं लोकजागरण का कार्य करने लगे। आपके मधुर व्यवहार, सरल व्यक्तित्व और सात्त्विक जीवन से लोग अत्यंत प्रभावित होने लगे।
सन 1980 के दशक में आपने सांसारिक जीवन का पूर्णतः त्याग कर संन्यास आश्रम को स्वीकार किया। आपको परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री 1008 दंडी स्वामी विमलानंद सरस्वती जी महाराज से विधिवत दंडी संन्यास की दीक्षा प्राप्त हुई। उस समय पूज्य गुरुदेव राजगुरु मठ, शिवाला घाट, वाराणसी तथा श्री स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम, बक्सर के संस्थापक एवं अध्यक्ष थे। संन्यास के उपरांत आपका नामकरण दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती हुआ और आपने स्वयं को संन्यास धर्म के प्रति पूर्णतः समर्पित कर दिया।
संन्यास ग्रहण करने के बाद आपने उत्तर प्रदेश के वीरपुर ग्राम स्थित गंगा तट की एक साधारण गुफा में लगभग 25–26 वर्षों तक अत्यंत कठोर तपस्वी जीवन व्यतीत किया। आपने कभी धन का स्पर्श नहीं किया, किसी प्रकार का संग्रह नहीं किया और न ही जूते-चप्पल धारण किए। आपका जीवन पूर्णतः अपरिग्रही, त्यागमय और वैराग्यपूर्ण था। आप निरंतर चातुर्मास व्रत करते रहे तथा नारायणपुर, बहोरनपुर, अंजोरपुर आदि अनेक ग्रामों में धर्मोपदेश देते रहे। मिर्जापुर, प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर, सासाराम सहित अनेक क्षेत्रों में आपने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
आपकी दैनिक साधना अत्यंत अनुशासित थी। प्रातःकाल श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीरामचरितमानस, महाभारत, पुराण एवं अन्य धर्मग्रंथों का स्वाध्याय तथा निरंतर मंत्र-जप आपका नित्य नियम था। आप कहा करते थे कि ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास ही साधना की सबसे बड़ी शक्ति है। आपके जीवन का प्रिय आधार यह चौपाई थी—
"मोर दास कहाइ नर आसा।
करइ तौ कहहु कहा बिस्वासा॥"
आप अक्सर कहते थे—"रघुवर मिलिहैं सांचे से, न वेद-पुराण के बांचे से।" अर्थात् केवल शास्त्रों का अध्ययन ही नहीं, बल्कि निष्कपट श्रद्धा, सच्ची भक्ति और निर्मल आचरण से ही भगवान की प्राप्ति होती है।
सन 2008 में परम पूज्य गुरुदेव की विशेष आज्ञा से आपको राजगुरु मठ, शिवाला घाट, वाराणसी तथा श्री स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम, बक्सर का उत्तराधिकारी नियुक्त किया गया। आपने अपनी विनम्रता के कारण स्वयं को इस उत्तरदायित्व के योग्य नहीं माना, परंतु गुरु आज्ञा को सर्वोपरि मानकर आपने इसे सहर्ष स्वीकार किया। गुरुकृपा और ईश्वर-विश्वास के बल पर आपने आश्रम की सेवा का दायित्व निभाया।
आप सदैव कहा करते थे—
"यह सम्पत्ति हमारी नहीं, भगवान की है। भगवान अत्यंत दयालु हैं। हम सबका कर्तव्य है कि उनकी सम्पत्ति का सदुपयोग हो, कभी दुरुपयोग न हो।"
आपका जीवन निःस्वार्थ सेवा का अद्भुत उदाहरण था। आप अपने व्यक्तिगत कार्य स्वयं करते थे और किसी से व्यक्तिगत सेवा लेना उचित नहीं समझते थे। शतायु होने के पश्चात भी आप आश्चर्यजनक रूप से आत्मनिर्भर रहे। सादगी, अपरिग्रह, त्याग, अनुशासन और समर्पण आपके व्यक्तित्व की पहचान थी।
सन 2008 से 2026 तक आपने श्री स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम, बक्सर तथा राजगुरु मठ के आध्यात्मिक, धार्मिक, शैक्षणिक एवं सेवा कार्यों को नई दिशा प्रदान की। आश्रम में सत्संग, संस्कार, धर्मप्रचार, गौसेवा, विद्यार्थियों के मार्गदर्शन तथा विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यों को आपने निरंतर आगे बढ़ाया। आपके नेतृत्व में आश्रम का सर्वांगीण विकास हुआ और हजारों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त हुई।
अपने जीवन के 100 वर्ष पूर्ण करने के उपरांत भी आप उसी उत्साह, अनुशासन और सेवा-भाव से कार्यरत रहे। अंततः जीवन के शाश्वत सत्य को स्वीकार करते हुए 18 जुलाई 2026 को आप ब्रह्मलीन हो गए। आपके पार्थिव शरीर को बक्सर के वामन घाट के समीप पवित्र गंगा नदी में जल समाधि दी गई तथा पंचतत्त्व में विलीन हो गया, किंतु आपके आदर्श, उपदेश, तप, त्याग और सेवा की अमूल्य विरासत आज भी असंख्य भक्तों और शिष्यों के हृदय में जीवित है।
परम पूज्य दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती जी महाराज का जीवन हमें सिखाता है कि सच्चा वैराग्य संसार से भागना नहीं, बल्कि ईश्वर में पूर्ण समर्पण, गुरु आज्ञा का पालन, निष्काम सेवा, सत्यनिष्ठता, आत्मसंयम और लोकमंगल के लिए सतत कर्म करना है। आपका संपूर्ण जीवन सनातन संस्कृति के उन शाश्वत आदर्शों का सजीव स्वरूप था, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
"ऐसे महान संत युगों में जन्म लेते हैं। उनका शरीर भले ही पंचतत्त्व में विलीन हो जाए, किंतु आपके आदर्श, तप, त्याग, सेवा और आध्यात्मिक प्रकाश सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
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07/08/2026

॥ ॐ नमो नारायणाय ॥
परम पूज्य गुरुदेव के पावन पूजन के दिव्य क्षण... 🙏
परम पूज्य श्री श्री 1008 ब्रह्मलीन दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती जी महाराज की पावन स्मृति में आयोजित कार्यक्रम के दौरान गुरुदेव के श्रीचरणों में श्रद्धापूर्वक पूजन एवं वंदन का यह भावपूर्ण दृश्य।
गुरु चरणों में समर्पण ही जीवन का परम सौभाग्य है।

॥ नारायण ॥

॥ ॐ नमो नारायणाय ॥ दिनांक: 03 अगस्त 2026परम पूज्य श्री श्री 1008 ब्रह्मलीन दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती जी महाराज की पावन...
06/08/2026

॥ ॐ नमो नारायणाय ॥ दिनांक: 03 अगस्त 2026
परम पूज्य श्री श्री 1008 ब्रह्मलीन दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती जी महाराज की पावन स्मृति में आयोजित षोडशी (भंडारा) दिनांक 03 अगस्त 2026 को श्रद्धा, भक्ति एवं गरिमामय वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस पावन अवसर पर पधारे सभी पूज्य संत-महात्माओं, श्रद्धालु भक्तों, गणमान्य नागरिकों, दानदाताओं, सहयोगकर्ताओं एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं के प्रति हम हृदय से कोटि-कोटि आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करते हैं। आप सभी की श्रद्धामयी उपस्थिति एवं सहयोग से यह आयोजन दिव्य, भव्य एवं अविस्मरणीय बन सका।
हम सभी परम पूज्य गुरुदेव के श्रीचरणों में साष्टांग दण्डवत प्रणाम अर्पित करते हुए प्रार्थना करते हैं कि उनकी असीम कृपा हम सभी पर सदैव बनी रहे तथा उनके बताए धर्म, सेवा, त्याग एवं साधना के मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें।
आप सभी का हृदय से कोटिशः धन्यवाद।
॥ नारायण ॥

॥ ॐ नमो नारायणाय ॥परम पूज्य श्री श्री 1008 ब्रह्मलीन दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती जी महाराज के पावन स्मृति में आयोजित षोड...
31/07/2026

॥ ॐ नमो नारायणाय ॥
परम पूज्य श्री श्री 1008 ब्रह्मलीन दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती जी महाराज के पावन स्मृति में आयोजित षोडशी (भंडारा) के पावन अवसर पर रउआ सभे श्रद्धालु भक्त, संत-महात्मा, सज्जन आ शुभचिंतक लोग के सूचित कइल जात बा कि ई कार्यक्रम 3 अगस्त 2026, सोमवार के श्री स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम, बक्सर में आयोजित होई।

रउआ सभे से विनम्र आग्रह बा कि एह पुण्य अवसर पर उपस्थित होके गुरु महाराज के पावन स्मृति में श्रद्धा-सुमन अर्पित करीं, प्रसाद ग्रहण करीं आ अपना उपस्थिति से कार्यक्रम के सफल बनाई।

रउआ सभे के हार्दिक प्रतीक्षा बा।

26/07/2026
॥ ॐ नमो नारायणाय ॥श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ – द्वितीय दिवसपरम पूज्य श्री श्री 1008 ब्रह्मलीन दंडी स्वामी देवानंद सरस्वत...
25/07/2026

॥ ॐ नमो नारायणाय ॥
श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ – द्वितीय दिवस
परम पूज्य श्री श्री 1008 ब्रह्मलीन दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती जी महाराज की पावन स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के द्वितीय दिवस श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह का अनुपम संगम देखने को मिला।
पूज्य श्री उमेश ओझा जी ने अपने श्रीमुख से श्रीमद्भागवत महापुराण की दिव्य महिमा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए भक्तों को धर्म, भक्ति, सत्संग एवं सदाचार का संदेश दिया। कथा श्रवण कर उपस्थित श्रद्धालु भक्त भाव-विभोर हो गए तथा गुरुदेव के श्रीचरणों में अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
आप सभी श्रद्धालु भक्तों से अनुरोध है कि आगामी कथा प्रसंगों में भी सपरिवार उपस्थित होकर श्रीमद्भागवत कथा का पुण्य लाभ प्राप्त करें।
📍 स्थान: श्री स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम, बक्सर
🗓 कथा अवधि: 24 जुलाई से 30 जुलाई 2026
🕒 समय: प्रतिदिन दोपहर 3:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक
॥ नारायण ॥
श्री स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम, बक्सर

24/07/2026

॥ ॐ नमो नारायणाय ॥
श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ – प्रथम दिवस
परम पूज्य श्री श्री 1008 ब्रह्मलीन दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती जी महाराज की पावन स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ आज श्री स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम, बक्सर में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ हुआ।
पूज्य श्री उमेश ओझा जी के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा का अमृतमय प्रवचन सुनकर श्रद्धालु भक्त भाव-विभोर हो उठे।
📍 स्थान: श्री स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम, बक्सर
🗓 24–30 जुलाई 2026
🕒 प्रतिदिन दोपहर 3:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक
आप सभी सपरिवार सादर आमंत्रित हैं।
॥ नारायण ॥

॥ ॐ नमो नारायणाय ॥श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ – प्रथम दिवसपरम पूज्य श्री श्री 1008 ब्रह्मलीन दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती ...
24/07/2026

॥ ॐ नमो नारायणाय ॥
श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ – प्रथम दिवस
परम पूज्य श्री श्री 1008 ब्रह्मलीन दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती जी महाराज की पावन स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ आज अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ।
पूज्य श्री उमेश ओझा जी के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी कथा का प्रथम दिवस भक्तिरस एवं ज्ञान की दिव्य गंगा में सभी श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर गया। कथा के प्रारंभ में भगवान श्रीहरि, श्रीमद्भागवत एवं सद्गुरुदेव का पूजन-अर्चन कर मंगलाचरण के साथ कथा का शुभारंभ हुआ।
आप सभी श्रद्धालु भक्तों से सादर निवेदन है कि आगामी दिनों में भी अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा श्रवण करें तथा इस दिव्य आयोजन का पुण्य लाभ प्राप्त करें।
📍 स्थान: श्री स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम, बक्सर
🗓 कथा अवधि: 24 जुलाई से 30 जुलाई 2026
🕒 समय: प्रतिदिन दोपहर 3:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक
॥ नारायण ॥
श्री स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम, बक्सर

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